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करोड़ों की सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री में फंसे आधा दर्जन सीओ, सीआई सहित कई राजस्व कर्मचारी

Updated at : 11 Nov 2024 11:26 PM (IST)
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जमीन की खरीद-बिक्री में फंसे आधा दर्जन सीओ, सीआई सहित कई राजस्व कर्मचारी

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अधिकारियों के नाक के नीचे सरकारी जमीन की होती रही रजिस्ट्री, सीओ से लेकर सीआई बने रहे लापरवाह ———-

जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने सुनवाई के दौरान पकड़ी गड़बड़ी तब हुआ करोड़ों की जमीन की अवैध रजिस्ट्री के खेल का खुलासा

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डीपीजीआरओ ने अपर समाहर्ता राजस्व को दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई के दिये निर्देश, आयुक्त व डीएम को भेजी गई आदेश की कॉपी

प्रतिनिधि, खगड़िया

शहर व इससे सटे इलाके में करोड़ों की सरकारी जमीन खरीद-बिक्री मामले में सात सीओ, सीआई सहित कई राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है. जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विमल कुमार सिंह ने सुनवाई के दौरान सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री के खेल को पकड़ा कि कैसे जिम्मेदार अधिकारियों के नाक के नीचे सालों तक सरकारी जमीन की रजिस्ट्री होती रही. सुनवाई के बाद डीपीजीआरओ ने सीओ समेत राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई का फैसला सुनाया. अपर समाहर्ता राजस्व को सरकारी जमीन की खरीद बिक्री मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिये गये हैं. अग्रतर कार्रवाई के लिए फैसले कॉपी आयुक्त से लेकर डीएम को भी भेजी गयी है.

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दो महीने तक सुनवाई के बाद सुनाया गया फैसला

बता दें कि करीब दो महीने तक जिला लोक शिकायत निवारण के तहत दायर वाद पर चली सुनवाई के दौरान सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ी पोटली खुल गयी. नियम कायदे को ताक पर रख कर सरकारी भूमि के अवैध खरीद-बिक्री की बातें प्रमाणित हो जाने बाद लोक शिकायत एडीएम ने राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मियों के क्रिया-क्लाप पर चिंता व्यक्त की है.

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सिर्फ दो मौजा में 200 से अधिक बार सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री

सरकारी भूमि (गैर मजरुआ खास, आम, बकास्त, कैसरे हिंद, भू-अर्जित, भूदान आदि ) की खरीद-बिक्री पर रोक के बावजूद उक्त श्रेणी की भूमि की खरीदने-बेचने का सिलसिला कई सालों से लगातार जारी है. हेराफेरी का आलम यह है कि सदर अंचल के मात्र दो राजस्व ग्राम मथुरापुर एवं सन्हौली में बीते आठ साल के दौरान सरकारी नियम कायदे को ताक पर रख कर 200 से अधिक बार सरकारी भूमि की रजिस्ट्री करने वक्त निबंधन विभाग भी आंखें मूंदे रहा. शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के कई मौजा क्रमशः रहीमपुर, जलकौड़ा, तेताराबाद, भदास तथा जहांगीरा मौजा में करोड़ों की सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री हुई है. बता दें कि उक्त भूमि की बिक्री पर 2014 से रोक है. जिले के तत्कालीन डीएम राजीव रोशन के द्वारा सरकारी भूमि यानि गैर मजरुआ आम, गैर मजरुआ खास, बकास्त मालिक, कैसरे हिन्द, भू-अर्जित आदि श्रेणी की भूमि के खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई थी. सूत्र बताते हैं कि जिस जमीन की खरीद-बिक्री हुई है, उसे अपर समाहर्ता ने रैयती घोषित नहीं किया है. फिर भी जमीन की रजिस्ट्री हो गयी.

सीओ ने निबंधन कार्यालय को नहीं भेजी सरकारी भूमि की पूरी सूची

जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में सुनवाई के दौरान यह बातें सामने आई कि वरीय पदाधिकारी के आदेश के बाद भी खगड़िया अंचल के तत्कालीन सीओ ने सरकारी भूमि की पूरी सूची निबंधन कार्यालय को नहीं भेजी थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में सरकारी भूमि को रोक सूची में शामिल नहीं किया जा सका. सीओ की लापरवाही के कारण क्रेता-विक्रेता बेरोकटोक सरकारी भूमि की खरीद-बिक्री करते रहे. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने माना कि विगत आठ सालों में खगड़िया अंचल में सीओ व आरओ के पद पर पदस्थापित/ प्रभार में रहे आधे दर्जन से अधिक पदाधिकारी से लेकर वर्तमान सीओ सहित मथुरापुर एवं सन्हौली मौजा के कई राजस्व कर्मचारी सरकारी भूमि की खरीद-बिक्री की जानकारी देने के बाद भी लापरवाह बने रहे. बता दें कि अपने-अपने कार्यकाल में इन सभी राजस्व पदाधिकारी/सीओ ने साल 2015 के बाद खरीद किये गए गैर मजरुआ खास तथा बकास्त भूमि के दाखिल-खारिज आवेदन को अस्वीकृत कर दिया, लेकिन बिक्री पर रोक लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. एक रिटायर एडीएम ने बताया कि दाखिल-खारिज आवेदन अस्वीकृत करने के साथ ही तत्काल खरीद-बिक्री पर भी रोक लगाने की कार्रवाई की जाती तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती.

कहते हैं अधिकारी

अंचल कार्यालय से प्राप्त गैर मजरुआ खास एवं बकास्त भूमि के खेसरा को रोक सूची में शामिल कर दिया गया है. अब आगे से ऐसी जमीन की खरीद-बिक्री सक्षम पदाधिकारी के अनुमोदन के बाद ही होगा.

नवनीत कुमार, अवर निबंधन पदाधिकारी, खगड़िया

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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