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10 वर्ष बीतने के बाद भी अगुवानी-सुलतानगंज के बीच गंगा नदी पर नहीं बन सका पुल

Updated at : 27 Jun 2024 12:57 AM (IST)
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10 वर्ष पहले अगुवानी-सुलतानगंज के बीच गंगा नदी पर पुल निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है

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खगड़िया.10 वर्ष पहले अगुवानी-सुलतानगंज के बीच गंगा नदी पर पुल निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है. दो-दो बार पुल का नवनिर्मित भाग गिर जाने के कारण निर्माण कार्य पूरा होने का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है. आलम यह है कि बीते वर्ष नवनिर्मित पुल का बड़ा भाग गिर जाने के कारण गंगा नदी में जमे मलवा को निकालने का काम भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है.

नाव की सवारी से लोगों को कब मिलेगी मुक्त

इलाके में बसे व यहां आने-जाने वाले लोगों के आवागमन के लिए अभी नाव की सवारी कर गंतव्य तक पहुंचना होता है, जो खतरे से खाली नहीं है. इधर, निर्माण शुरू होने के बाद 10 वर्ष बाद भी पुल निर्माण की धीमी रफ्तार से खतरनाक नाव यात्रा से मुक्ति पाने के लिए लोगों को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा. बता दें ठीक 10 वर्ष पहले जिस अगुवानी-सुल्तानगंज पुल की आधारशिला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रखी थी, उसे 2019 में ही पूरा होना था, लेकिन दावे खोखले साबित हुए. वर्तमान में पुल निगम से लेकर निर्माण कंपनी के अधिकारी भी इस संबंध में कुछ भी बता पाने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं.

मलवा हटाने व कुआं की सफाई का चल रहा कामअगवानी पुल के वर्तमान हालात पर गौर करें तो बीते वर्ष चार जून को हुए हादसों के बाद से ही पिलर संख्या 10 11 व 12 के गिरे हुए मलबे को हटाने का कार्य जारी है. पिलर संख्या 12 के कुआं की सफाई का कार्य लगभग अंतिम चरण में है. स्थल पर मौजूद कर्मियों के मुताबिक इसके भीतर से मलवा हटाने के बाद इसकी जांच होगी. उसके बाद ही इस पर कार्य शुरू हो सकता है.

बढ़ रहा है गंगा का जलस्तर

माॅनसून के दस्तक देते ही प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत बहने वाली गंगा नदी का जल स्तर रोजाना बढ़ रहा है. जलस्तर ज्यादा बढ़ा तो दो-चार दिनों के भीतर मलवा हटाने का जो कार्य चल रहा है उसे भी रोकना पड़ेगा .

राजेंद्र पुल निर्माण के वक्त से यहां भी पुल निर्माण की उठी थी मांग

बताते चलें कि मोकामा में गंगा नदी पर राजेंद्र पुल उद्घाटन के समय तत्कालीन केंद्रीय मंत्री ललित नारायण मिश्र ने दूसरे पुल के रूप में सुल्तानगंज-अगुवानी का नाम घोषित किया था. बाद में गंगा महासेतु संघर्ष मोर्चा अगुआनी की बुलंद आवाज ने उम्मीदों को अंजाम तक पहुंचाने की ठान ली. बताते चलें कि 1962 में भारत चीन युद्ध के समय सेनाध्यक्ष जनरल करियप्पा ने मुंगेर, भागलपुर के बजाय सुल्तानगंज -अगुआनी गंगा के बीच महासेतु के लिए भारत सरकार से आग्रह किया था तथा इसकी प्रक्रिया भी शुरू हुई. सरकार के अभियंता जीएम बख्शी ने पुल निर्माण के लिए भागलपुर मुंगेर व अगुवानी की मिट्टी पुणे स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा था, जहां अगुआनी- सुल्तानगंज की मिट्टी को पुल बनाने लायक घोषित किया गया था.

जननायक कर्पूरी ठाकुर ने कराया था सर्वे

बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने उक्त स्थान पर पुल निर्माण के लिए राशि जारी कर सर्वेक्षण कार्य करवाएं. जानकार बताते हैं की पुनः प्रधानमंत्री मंत्री राजीव गांधी और बिहार के मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के कार्यकाल में अगुआनी -सुल्तानगंज गंगा पर पुल निर्माण की योजना स्वीकृत हुई, लेकिन बाद में यहां पर पुल निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 23 फरवरी 2014 को परबत्ता केएमडी कॉलेज मैदान में अगुवानी-सुलतानगंज के बीच गंगा नदी पर पुल निर्माण का शिलान्यास किया था. नौ मार्च 2015 को मुरारका कॉलेज सुलतानगंज के मैदान से पुल निर्माण का कार्यारम्भ मुख्यमंत्री ने किया.

2019 में पूरा होना था पुल निर्माण कार्य

कार्य एजेंसी एसपी सिंगला निर्माण कंपनी को इसका निर्माण कार्य वर्ष 2019 में ही पूरा करना था, लेकिन यह नहीं हो सका. तारीखें बढ़ती गयी वर्ष 2020 व 2021 कोरोना की भेंट चढ़ गया उसके बाद वर्ष 2022 व 23 में लगातार दो बार सिंगमेंट व तीन पिलर ढहने के बाद पूरा निर्माण कार्य अधर में है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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