जिले में बढ़ रहे हैं एचआइवी पॉजीटिव

Published at :22 Feb 2016 1:13 AM (IST)
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जिले में बढ़ रहे हैं एचआइवी पॉजीटिव

खगड़िया : पैसा कमाने के लिए प्रदेश में काम करने वाले युवा एचआइवी रोग अपने साथ लेकर लौट रहे हैं. यही कारण है कि एचआइवी के मामले में खगड़िया डेंजर जोन बना हुआ है. मरीजों की दिन प्रतिदिन बढ़ रही संख्या को देख बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति द्वारा सदर अस्पताल परिसर में एआरटी सेंटर […]

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खगड़िया : पैसा कमाने के लिए प्रदेश में काम करने वाले युवा एचआइवी रोग अपने साथ लेकर लौट रहे हैं. यही कारण है कि एचआइवी के मामले में खगड़िया डेंजर जोन बना हुआ है. मरीजों की दिन प्रतिदिन बढ़ रही संख्या को देख बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति द्वारा सदर अस्पताल परिसर में एआरटी सेंटर खोला गया है.
पांच जिले के पीड़ितों का किया जाता है इलाज
एचआइवी से पीड़ित पांच जिले के मरीजों का इलाज एआरटी सेंंटर में किया जाता है. इसमें खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, बेगूसराय के सीमावर्ती क्षेत्र, समस्तीपुर सीमावर्ती क्षेत्र के मरीजों का इलाज किया जा रहा है.
760 मरीजों का किया जा रहा है इलाज
एआरटी सेंटर में लगभग 760 मरीजों का इलाज किया जा रहा है. इसमें खगड़िया के सर्वाधिक लगभग 455 एचआइवी पीड़ितों का इलाज किया जा रहा है. सबसे कम पीड़ित सुपौल जिले के हैं.
भरती की सुविधा नहीं
एचआइवी से पीड़ित मरीज को एआरटी सेंटर में भरती करने की सुविधा नहीं है. भरती करने की स्थिति आने पर मरीज को सीसी सेंटर भागलपुर, पटना, हाजीपुर भेजा जाता है. एआरटी सेंटर पर एड्स नियंत्रण इकाई द्वारा प्रति माह लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं, लेकिन मरीज की जांच के लिए आवश्यक मशीन उपलब्ध नहीं है. सीडी-4 जांच के लिए मरीजों का ब्लड लेकर कटिहार व पटना भेजा जाता है.
छह माह में जांच है अनिवार्य
एचआइवी पीड़ित मरीजों की सीडी-4 जांच प्रत्येक छह माह तक की जानी अनिवार्य है. जांच मशीन उपलब्ध नहीं रहने के कारण छह के बदले पीड़ितों को आठ माह लग जाते हैं. यदि एआरटी सेंटर में सीडी फोर जांच की मशीन उपलब्ध रहती, तो मरीजोंं को समय पर जांच रिपोर्ट मिलती और उनकी प्रतिरोधक क्षमता की जानकारी मिलती.
जागरूकता का अभाव
एचआइवी को लेकर जागरूकता का अभाव है. यही कारण है कि मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. विभाग द्वारा एचआइवी को लेकर समुचित पहल नहीं की जा रही है. यदि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को एचआइवी की जानकारी दी जाये, तो मरीजों की संख्या में कमी आ सकती है.
पर्व आते ही बढ़ जाती है मरीजों की संख्या
होली निकट है. मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना बनी हुई है. अभी से यदि लोगों को सतर्क कर जांच शुरू कर दी जाये, तो एचआइवी बांटने से पहले इलाज शुरू किया जा सकता है.
कहते हैं सीएस
सीएस डॉ रास बिहारी सिंंह ने बताया कि सीसी सेंटर मेडिकल कॉलेज में भी बनाया जाता है. एआरटी सेंटर पर भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है. मशीन के लिए नोडल पदाधिकारी ने विभाग को पत्र लिखा गया है.
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