नाबालिग सहायिका अब बन गयी महिला पर्यवेक्षिका

Published at :17 Dec 2015 10:04 PM (IST)
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नाबालिग सहायिका अब बन गयी महिला पर्यवेक्षिका

नाबालिग सहायिका अब बन गयी महिला पर्यवेक्षिका प्रभात खबर एक्सक्लूसिव ———————-खगड़िया में 14 वर्ष की उम्र में सहायिका बनाने के खुलासे से हो रही किरकिरी नाबालिग नीलम पहले बनी सहायिका फिर सेविका बनने में रही कामयाब फिलहाल अलौली प्रखंड में महिला पर्यवेक्षिका के पद पर तैनात नीलम की बहाली पर उठे सवाल सूचना के अधिकार […]

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नाबालिग सहायिका अब बन गयी महिला पर्यवेक्षिका प्रभात खबर एक्सक्लूसिव ———————-खगड़िया में 14 वर्ष की उम्र में सहायिका बनाने के खुलासे से हो रही किरकिरी नाबालिग नीलम पहले बनी सहायिका फिर सेविका बनने में रही कामयाब फिलहाल अलौली प्रखंड में महिला पर्यवेक्षिका के पद पर तैनात नीलम की बहाली पर उठे सवाल सूचना के अधिकार से मिली जानकारी से हुआ पूरे खेल का खुलासा नाबालिग को सहायिका बनाने के सवाल का जवाब देने से कन्नी काट रहे विभागीय अधिकारी सहायिका पद पर चयन से संबंधी पत्र व संचिका कार्यालय से गायब, आवेदिका बोली बाढ़ में बहे कागजात अलौली सीडीपीओ द्वारा पांच महीने पूर्व कार्रवाई के लिए डीपीओ को भेजा गया पत्र फाइलों में गुम ————–नाम : नीलम देवी जन्म तिथि : 01-01-1972 सहायिका पद पर चयन : 1986 सेविका पद पर चयन : 1992 महिला पर्यवेक्षिका बनी : 2010 नोट : (14 वर्ष की उम्र में सहायिका, फिर सेविका और अब महिला पर्यवेक्षिका पद पर तैनात हैं नीलम देवी.) —————महज 14 वर्ष की उम्र में कोई सहायिका कैसे बन सकती है? क्या नाबालिग की भी आइसीडीएस विभाग में बहाली होती है? बिना सहायिका के नियुक्ति पत्र के ही नीलम देवी सहायिका से सेविका और अब सेविका से महिला पर्यवेक्षिका कैसे बन गयीं? पूरे मामले में जिस पत्रांक व दिनांक के माध्यम से सेविका पद पर बहाली हुई, उससे संबंधी संचिका कार्यालय में उपलब्ध नहीं है. जो पूरे मामले को संदेहास्पद बनाता है. दीपक कुमार अकेला, आरटीआइ कार्यकर्ता—————सहायिका से महिला पर्यवेक्षिका बनने के दौरान कोई भी गड़बड़ी नहीं की गयी है. सारे आरोप गलत हैं. सहायिका पद पर चयन से संबंधी कागजात बाढ़ में बह गये. हमको याद नहीं है कि सहायिका पद पर कब मेरा चयन हुआ था. नीलम देवी, महिला पर्यवेक्षिका, अलौली प्रतिनिधि, खगड़ियाबाल विकास परियोजना विभाग में अजब-गजब कारनामे उजागर हो रहे हैं. अबकी नाबालिग लड़की का सहायिका पद पर चयन का खुलासा हुआ है. इतना ही नहीं नाबालिग सहायिका को कुछ महीने बाद पहले सेविका और उसके बाद महिला पर्यवेक्षिका बना दिया गया. महज 14 वर्ष की उम्र में सहायिका बनी नीलम देवी फिलहाल अलौली प्रखंड में महिला पर्यवेक्षिका पद पर तैनात हैं. सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार नीलम देवी का सहायिका पद पर चयन महज 14 वर्ष की उम्र में होना विभागीय कार्यशैली की पोल खोलने के लिए काफी है. पूरे मामले के खुलासे बाद नाबालिग को सहायिका बनाने संबंधी सवाल का जवाब देने से विभागीय अधिकारी कन्नी काट रहे हैं. उधर, आरोपों के घेरे में आयीं महिला पर्यवेक्षिका नीलम देवी ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है. इधर, आरटीआई कार्यकर्ता ने नीलम देवी की बहाली पर सवाल उठाते हुए विभाग को कटघरे में खड़ा किया है.सहायिका से सेविका फिर महिला पर्यवेक्षिका पद का सफर बताया जाता है कि अलौली प्रखंड के शुम्भा गाजीघाट की रहने वाली नीलम देवी का चयन 1986 में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 19 में सहायिका पद पर किया गया. मैट्रिक के प्रमाण पत्र के अनुसार नीलम देवी की जन्म तिथि 01-01-72 है. ऐसे में सहायिका बनने के वक्त उसकी उम्र महज 14 साल थी. फिर पत्रांक 56 दिनांक 02-04-92 के माध्यम से नीलम देवी का चयन सेविका पद पर हो गया. इसके बाद 10 जून, 2010 को नीलम देवी महिला पर्यवेक्षिका बन गयीं. इस पूरी प्रक्रिया में विभागीय मापदंड के अनुसार पूर्व में सहायिका व सेविका रहने के कारण नीलम देवी को इसका लाभ मिला. उधर, आरटीआइ कार्यकर्ता दीपक कुमार अकेला ने सवालिया लहजे में पूछा है कि जब नीलम देवी सहायिका बनी ही नहीं, तो फिर सेविका और अब एलएस पद पर चयन कैसे हो गया. क्या यह सरकारी नियम कायदे का उल्लंघन नहीं है. नीलम देवी की सफाई 12 जुलाई, 2012 को अलौली सीडीपीओ को भेजे पत्र में महिला पर्यवेक्षिका नीलम देवी ने साफ तौर पर कहा है कि मेरा चयन 1986 में सहायिका पद के लिए हुआ था. पर, 1987 के बाढ़ में चयन संबंधी कागजात बाढ़ में बह गये. इसके लिये सहायिका का चयन पत्र जमा नहीं कर रही हूं. ——————–अलौली सीडीपीओ का जवाब ज्ञापांक 56 दिनांक 02-04-92, इसमें डीएम का आदेश एवं जिला कल्याण पदाधिकारी की स्वीकृति का जिक्र है. उसकी छायाप्रति अलौली बाल विकास परियोजना कार्यालय में उपलब्ध नहीं है. साथ ही किसी संचिका में नीलम देवी के सेविका चयन संबंधी आदेश की प्रति भी कार्यालय में नहीं है. नीलम देवी की नियुक्ति वर्ष 1986 में हुई. उस वक्त नीलम देवी की उम्र महज 14 वर्ष थी. इसका प्रमाण पत्र स्वयं नीलम देवी ने समर्पित किया है. अपने कार्यालय के पत्रांक 287 दिनांक 14 जुलाई, 14 को डीपीओ को भेजे पत्र में अलौली सीडीपीओ ने कहा है कि पूरे मामले में कार्रवाई उनके स्तर से संभव नहीं है. अत : आरटीआइ कार्यकर्ता के आवेदन के आलोक में अग्रेतर कार्रवाई की जाये. पर, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है.

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