मामला करोड़ों के गबन के मामले में 111 प्रधान शिक्षकों पर कार्रवाई का

खगड़िया : शिक्षा विभाग में डीएम के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते हैं. सारी प्रक्रिया पूरी किये जाने के बाद डीएम दागी 111 शिक्षकों पर निलंबन/प्राथमिकी का आदेश देते हैं. जिसमें सात दिनों के अंदर अनुपालन प्रतिवेदन सौंपना था. अब जरा जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय का कारनामे पर गौर करें. डीएम के आदेश का […]
खगड़िया : शिक्षा विभाग में डीएम के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते हैं. सारी प्रक्रिया पूरी किये जाने के बाद डीएम दागी 111 शिक्षकों पर निलंबन/प्राथमिकी का आदेश देते हैं. जिसमें सात दिनों के अंदर अनुपालन प्रतिवेदन सौंपना था. अब जरा जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय का कारनामे पर गौर करें.
डीएम के आदेश का अनुपालन तो दूर जिला शिक्षा पदाधिकारी उस आदेश के एक महीने बार फिर से स्पष्टीकरण पूछने लगते हैं. ऐसे मंे सवाल उठता है कि आखिर डीएम के आदेश पर दागी शिक्षकांे पर कार्रवाई की बजाय जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण पूछे जाने के पीछे राज क्या था? जब पूर्व में स्पष्टीकरण जैसी सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद निलंबन/प्राथमिकी का आदेश दिया गया तो एक महीने बाद फिर से स्पष्टीकरण पूछे जाने का क्या औचित्य है.
हाल के दिनों मंे लगातार हो रहे खुलासे से शिक्षा विभाग कटघरे में हैं. खासकर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में नियम को ताक पर रख कर पिछले दरवाजे से कई गड़बड़ी को अंजाम दे दिया जाता है और किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगती है. ऐसे एक दो नहीं बल्कि दर्जनों मामले हैं जिसमें परदे के पीछे खेल कर दोषी को सजा की बजाय बचाने का काम किया गया है.
बताया जाता है कि स्पष्टीकरण की आड़ में यहां नजराना का खेल होता है. पूरी जांच हो तो अधिकारी के साथ साथ कई कर्मचारियों की गरदन लपेटे मंे आ सकते हैं. हालांकि जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ ब्रज किशोर सिंह किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से साफ तौर पर इंकार करते हैं.
लेकिन परदे से बाहर आ रही सच्चाई कुछ और ही इशारा कर रही है. हालांकि डीएम द्वारा गबन के आरोपी प्रधान शिक्षकों पर प्राथमिकी व निलंबन के आदेश के एक महीने बाद स्पष्टीकरण पूछे जाने के औचित्य के सवाल पर डीइओ कन्नी काट गये.
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