पीडीएस से जुड़ा दो लाख 83 हजार परिवार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Dec 2014 8:50 AM
खगड़िया: गरीबों के लिए निश्चित रूप से वर्ष 2014 ऐतिहासिक रहा है. क्योंकि इस वर्ष लाखों गरीब लाभान्वित हुए हैं. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत वर्ष 2004 में ही जिले के दो लाख 83 हजार परिवारों को इस योजना से जोड़ा गया है. इस योजना के तहत इतने परिवारों को राशन कार्ड दिये गये […]
खगड़िया: गरीबों के लिए निश्चित रूप से वर्ष 2014 ऐतिहासिक रहा है. क्योंकि इस वर्ष लाखों गरीब लाभान्वित हुए हैं. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत वर्ष 2004 में ही जिले के दो लाख 83 हजार परिवारों को इस योजना से जोड़ा गया है. इस योजना के तहत इतने परिवारों को राशन कार्ड दिये गये हैं.
इसी राशन कार्ड के आधार पर इन्हें काफी सस्ते दर पर गेहूं एवं चावल दिये जा रहे हैं. मार्च 2014 से लागू राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत जिले के 2 लाख 83 हजार परिवारों के करीब 13 लाख सदस्यों को सस्ते दर पर गेहूं एवं चावल दिये जा रहे हैं. जानकार बताते हैं कि जिले के इतने आबादी को पीडीएस से इसी वर्ष जोड़ा गया है. जो अब तक इतिहास में पहली बार हुआ है. राशन कार्ड तथा अंत्योदय कार्ड के आधार पर वर्तमान समय में 14 लाख गरीब परिवार पीडीएस से जुड़े हैं. जिसमें आधे से अधिक वर्ष 2014 में जुड़े हैं. अगर इन परिवारों के लिए यह वर्ष लकी कहा जाये तो गलत नहीं होगा.
मजदूरों के लिए बना अभिशाप
वर्ष 2014 गरीबों के लिए जहां लकी साबित हुआ वहीं मजदूर के लिए यह वर्ष काफी अनलक्की साबित हुआ. मजदूरों के कल्याण के लिए रोजगार के लिए एवं पलायन रोकने के लिए संचालित मनरेगा योजना विफल रही है. मिट्टी से पहचान बनाने वाले मनरेगा योजना को अगर कहा जाये कि योजना वर्ष 2014 में मिट्टी में ही विलीन हो गयी तो कोई गलत नहीं होगा. क्योंकि मजदूरों की उम्मीद पर मनरेगा इस वर्ष खरी नहीं उतरी. वर्ष के आरंभ के कुछ माह तो यह योजना पंचायतों में ठीक ठाक रही. किंतु राशि की कमी ने वर्ष के अंत के कुछ माह में इस योजना को बुरी तरह प्रभावित कर दिया. अधिकांश पंचायतों में काफी दिनों से मनरेगा की गाड़ी रुकी हुई है. मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं. ये रोजगार के पलायन भी कर रहे हैं. क्योंकि इन्हें पंचायत/प्रखंड/जिला में इस योजना के तहत रोजगार ही नहीं मिल पाया है.
वर्ष की अच्छी बातें
आंगनबाड़ी केंद्र भवन के लिए यह वर्ष काफी अच्छा रहा है. जिले में एक साथ 3 सौ आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जमीन की खोज तथा निर्माण आरंभ कराया है. एक साथ इतने केंद्रों के लिए जमीन की खोज करना तथा निर्माण आरंभ कराना किसी उपलब्धि से कम नहीं है. वर्ष 2014 में अन्य वर्षो की भांति अधिक लोगों को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार योग्य बनाया गया है. रूढ़ सेठी प्रशिक्षण भवन में हजारों प्रशिक्षणार्थियों को इस वर्ष प्रशिक्षण दिया गया है.
अच्छी योजनाएं हुई आरंभ
वर्ष 2014 में महादलितों के लिए कुछ अच्छी एवं उपयोगी योजनाएं भी आरंभ हुई है. वर्षो से परचा की जमीन से बेदखल परचाधारियों को दखल दिलाने के लिए सितंबर अक्तूबर माह से अभियान दखल दहानी आरंभ किया गया है. इसके योजना के तहत बेदखल लोगों को 31 मार्च 15 तक जमीन पर दखल दिलायी जायेगी. इसके साथ साथ दाखिल में गड़बड़ी रोकने के लिए कैंप का आयोजन किया जा रहा है. अभियान बसेरा के तहत भूमिहीन महादलितों, अनुसूचित जाति, जनजाति,पिछड़ा वर्ग एक तथा दो जाति के लोगों को जमीन देने का भी निर्णय हाल के दिनों में ही लिया गया है. पीएम जन धन योजना की शुरुआत भी इसी वर्ष हुआ है. इस योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बीते चार माह में एक लाख से अधिक लोगों के विभिन्न बैंकों में खाते खोले गये हैं. इसी तरह राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान भी 2 अक्तूबर 2014 से ही चलाया गया है. जिसकी हर लोगों ने प्रशंसा की है.
प्रभावित कुछ योजनाएं
वर्ष 2014 में कई जगहों पर सड़कों का निर्माण भी कराया है. जिससे आवागमन में होने वाली परेशानियां दूर हुई है. साथ ही कुछ ऐसी योजनाएं अपूर्ण रह गयी. जिससे लोगों सालों भर परेशानियां होती है. पूर्वी केबिन ढाला का निर्माण भी इसी वर्ष आरंभ हुआ. काफी जोर शोर से निर्माण आरंभ कराया गया. सड़कों पर कई जगह गड्ढे भी खोदे गये. काफी दिनों तक लोगों को धूल एवं कीचड़ के बीच से होकर गुजरना पड़ा. काफी परेशानियों के बावजूद लोग खुश थे कि पुल का निर्माण हो रहा है. किंतु पुल के निर्माण के धीमी गति से लोगों को निराशा हाथ लगी है. आज काफी दिनों से बंद है. लोग उम्मीद कर रहे थे कि इस वर्ष काफी काम हो जायेगा. किंतु पुल का निर्माण जमीन के अंदर ही सिमट कर रह गयी. जिले वासियों को उम्मीद थी कि इस वर्ष सौ शय्या अस्पताल मरीजों की सेवा/ सुविधा के लिए उपलब्ध कराये जायेंगे. किंतु निर्माण पूरी हो जाने के बावजूद इस नये भवन में उपचार आरंभ नहीं हो पाया. जिले के कई पंचायतों में बन रहे पंचायत सरकार भवन की प्रगति भी संतोष पद्र नहीं रही है.
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