साफ पानी का काला धंधा : बढ़ता जा रहा अवैध आरओ प्लांट का कारोबार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Apr 2019 7:31 AM
विज्ञापन
खगड़िया/गोगरी : यहां साफ पानी का काला धंधा तेजी से परवान चढ़ रहा है. शुद्ध पेयजल के नाम पर पानी का कारोबार बढ़ता जा रहा है.बिना लाइसेंस के जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालयों में आरओ वॉटर प्लांट लग गये हैं. इन प्लाटों से जार में दुकानों से लेकर निजी प्रतिष्ठानों में पानी पहुंचाया जा […]
विज्ञापन
खगड़िया/गोगरी : यहां साफ पानी का काला धंधा तेजी से परवान चढ़ रहा है. शुद्ध पेयजल के नाम पर पानी का कारोबार बढ़ता जा रहा है.बिना लाइसेंस के जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालयों में आरओ वॉटर प्लांट लग गये हैं. इन प्लाटों से जार में दुकानों से लेकर निजी प्रतिष्ठानों में पानी पहुंचाया जा रहा है.
लेकिन इस पानी की शुद्धता जांचने परखने वाला कोई नहीं है.स्वच्छ पानी के नाम पर यह कारोबार जिस गति से बढ़ता जा रहा है, उसी के अनुपात में पानी बर्बाद हो रहा है.जिससे भू गर्भ जलस्तर पर भी असर पड़ने लगा है.
बढ़ रही गर्मी, घट रहा जलस्तर
गर्मी बढ़ने के साथ ही चापाकल से लेकर घरों में लगे पंप जवाब देने लगे हैं.जलस्तर नीचे खिसक रहा है.इसके बाद भी बिना लाइसेंस के चल रहे शुद्ध पानी के इस कारोबार के प्रति नगर परिषद खगड़िया, नगर पंचायत गोगरी, सहित जिला से लेकर प्रखंड के अधिकारी उदासीन बने हुए हैं. पिछले कुछ सालों में पानी की शुद्धता को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है.
पानी जनित बीमारियों के मामले हर साल बढ़ते जाने के कारण शुद्ध पानी की मांग भी बढ़ने लगी है.अपने अपने घरों में लोग आरओ लगा रहे हैं.होटलों, रेस्टोरेंट तथा दुकानों व निजी प्रतिष्ठानों में जार से सप्लाई की जाने वाली शुद्ध पानी की मांग बढ़ गई है.इसी के साथ ही पानी का कारोबार भी बढ़ता जा रहा है.
हालांकि पानी का कारोबार बढ़ने की कीमत भी लोगों को चुकानी पड़ रही है.एक तो लोग पानी के लिए पैसा चुका रहे हैं.ऊपर से जार में सप्लाई किए जाने वाले पानी की शुद्धता को जांचने परखने वाला कोई नहीं है.
बिना लाइसेंस के चल रहे हैं आरओ प्लांट
जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालयों में बिना लाइसेंस के ही अधिकांश आरओ वॉटर प्लांट चल रहे हैं.लाइसेंस नहीं लगने के कारण इन प्लांटों में पानी की शुद्धता की जांच परख भी नहीं होती है.गैर सरकारी आंकड़े बताते हैं कि गोगरी शहर में आधा दर्जन तथा प्रखंड मुख्यालय के ग्रामीण इलाकों सहित जिले में करीब दो दर्जन आरओ वाटर प्लांट हैं.
पिछले तीन चार साल के अंदर हर साल आरओ वॉटर प्लांट की संख्या बढ़ती जा रही है.पानी का कारोबार दिन दुना बढ़ रहा है.हद तो यह कि न तो नगर पंचायत को और ना ही प्रखंड के बीडीओ को उनके क्षेत्र में कितने आरओ वाटर प्लांट लगाये गये हैं इनकी जानकारी भी नहीं है.
कारोबार बढ़ने के साथ बढ़ रही पानी की बर्बादी
आरओ वॉटर प्लांट लगाकर पानी की सप्लाई जिस तेज से पिछले कुछ सालों में बढ़ी है, उसकी के अनुपात में पानी की बर्बादी भी बढ़ती जा रही है.इंजीनियर एके तिवारी बताते हैं कि आरओ प्लांट में पानी शुद्ध करने के लिए ऑस्मोसिस प्रॉसेस अपनाई जाती है.
इस प्रक्रिया में सौ लीटर पानी में सिर्फ 40 लीटर पानी की शुद्ध होता है.जबकि शेष 69 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है.अगर शहर में प्रतिदिन 50 हजार लीटर पानी की सप्लाई की जाती है तो इतना की पानी बर्बाद हो जाता है.
जिसका असर भू गर्भ जलस्तर पर पड़ रहा है.वे कहते हैं कि आरओ प्लांट में पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है.जो पानी बर्बाद हो रहा है उसे किसी जगह इकट्ठा कर री-साइकिल किया जा सकता है.री साइकिल से पहली बार 24 प्रतिशत तथा दूसरी बार 14 प्रतिशत पानी की बर्बाद रोकी जा सकती है.लेकिन री साइकिल की बात कौन कहे, यहां तो बिना लाइसेंस के ही आरओ वाटर प्लांट चल रहे हैं.
कहते हैं एसडीओ
अनुमंडल क्षेत्र में कितने आरओ प्लांट चल रहे हैं और कितने लोगों ने लाइसेंस लिया है इसके लिए सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी को पत्र लिखकर जांच करने का निर्देश दिया जायेगा.बिना लाइसेंस के चल रहे आरओ वॉटर प्लांट का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.यह भी जांच जायेगा कि वहां शुद्ध किये जाने वाले पानी की गुणवत्ता मानक के अनुसार है कि नहीं.
सुभाषचंद्र मंडल, एसडीओ गोगरी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










