महिला ने नर्सरी से परिवार की खराब माली हालत को सुधारा

महिला ने नर्सरी से परिवार की खराब माली हालत को सुधारा
कोढ़ा कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करने वाला बासगड़ा गांव का एक साधारण परिवार आज दूसरों को भोजन कराने में सक्षम है. यह प्रेरणादायक कहानी मधु देवी की है. जिनके आत्मबल और दृढ़ संकल्प ने उनके पूरे परिवार की तस्वीर बदल दी. मधु देवी की शादी एक सामान्य आर्थिक स्थिति वाले परिवार में हुई थी. घर की हालत इतनी खराब थी कि बच्चों की पढ़ाई तक मुश्किल हो गई थी. वर्ष 2018 में मधु ने अपने पति वीरेंद्र कुमार के साथ मिलकर घर की जिम्मेदारी खुद उठाने का निश्चय किया. उन्होंने नर्सरी व्यवसाय की शुरुआत की. छोटे-छोटे पौधे तैयार कर बाजार में बेचना शुरू किया. उनकी मेहनत रंग लाई और यह आमदनी का स्थायी जरिया बन गया. इसके बाद मधु ने जीविका समूह से जुड़कर 50 हजार रुपये का लोन लिया और 10 कट्ठा जमीन में खेती शुरू की. धीरे-धीरे उन्होंने मशरूम उत्पादन भी शुरू कर दिया. उनकी सालाना आमदनी दो लाख रुपये से अधिक है. हर मौसम में उनके खेत में हरी-भरी सब्जियां लहलहाती हैं. उनकी नर्सरी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है. मधु देवी बताती हैं कि अब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह सुधर चुकी है. रहन-सहन, खान-पान और बच्चों की शिक्षा में काफी सुधार आया है. उनकी पुत्री पायल ने वर्ष 2022 में मैट्रिक की परीक्षा में प्रखंड टॉपर बनकर गांव और परिवार का नाम रोशन किया. वर्तमान में वह कटिहार महिला कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रही है और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही है.
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