सदर अस्पताल में दो घंटे तक प्रसूता इलाज के लिए दर्द से तड़पती रही, नहीं मिला इलाज, हो गयी मौत

Updated at : 27 Aug 2025 7:08 PM (IST)
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सदर अस्पताल में दो घंटे तक प्रसूता इलाज के लिए दर्द से तड़पती रही, नहीं मिला इलाज, हो गयी मौत

सदर अस्पताल में दो घंटे तक प्रसूता इलाज के लिए दर्द से तड़पती रही, नहीं मिला इलाज, हो गयी मौत

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– परिजनों ने कहा चिकित्सक ड्यूटी से थे नदारत, दो घंटे तक अस्पताल में ढूंढते रहे – स्वासथ्य कर्मियों ने बेड खाली नहीं होने का बहाना बनाकर नहीं किया भरती कटिहार सदर अस्पताल में चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों की लापवाही ने एक बार फिर प्रसव कराने पहुंची महिला व पेट में पल रहे नवात की जान ले ली. आक्रोशित परिजनों ने ड्यूटी से गायब रहे चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर जमकर विरोध- प्रदर्शन किया. पोठिया थाना क्षेत्र के रामनगर निवासी 32 वर्षीय लप्पी देवी को बुधवार को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था. परिजनों का आरोप है सदर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण प्रसूता ने दम तोड़ दिया. घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया. दोषी डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की. लप्पी देवी पति विजय कुमार मंडल को बुधवार की सुबह करीब छह बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे. मृतका की सास ललिता देवी ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बावजूद समय पर इलाज शुरू नहीं किया गया. उस समय डॉक्टर मौजूद नहीं थे. वहां के कर्मियों ने यह कहकर टालमटोल किया कि अस्पताल में बेड खाली नहीं है. करीब दो घंटे तक प्रसूता बिना इलाज के दर्द से छटपटाती रही. अंततः लापरवाही के चलते लप्पी देवी ने दम तोड़ दिया. दुखद पहलू यह भी रहा कि उनके गर्भ में पल रहा बच्चा भी दुनिया में आने से पहले ही मौत की भेंट चढ़ गया. लप्पी देवी की असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया. मृतका दो साल की एक बच्ची की मां थीं. प्रसूता की मौत की खबर फैलते ही परिजन आक्रोशित हो उठे, उन्होंने शव को अस्पताल के मातृ शिशु गेट पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. परिजन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे. इस दौरान अस्पताल परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर मामला को शांत कराया. मौके पर स्थानीय लोगों का कहना था कि सदर अस्पताल में अकसर डॉक्टरों और कर्मियों की लापरवाही सामने आती रहती है. लेकिन किसी पर ठोस कार्रवाई नहीं होती. इस कारण आम मरीजों की जान खतरे में रहती है. घटना के बाद से लोगो में सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आक्रोश व्याप्त है. कहते हैं सिविल सर्जन सिविल सर्जन डॉ जितेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है. इस मामले की निष्पक्ष जांच करायी जायेगी. फिलहाल जिस समय घटना घटित हुई है. प्रसव वार्ड में मौजूद उस समय की ड्यूटी के सभी स्टाफ को लेबर रूम के कार्यों से हटा दिया गया है. इस मामले में जो भी दोषी पाये जायेंगे विधि संवत उन पर कार्रवाई की जायेगी.

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