सुरक्षित ट्रेन संचालन को लेकर पहरेदारों को किया गया नियुक्त

Updated at : 03 Jun 2025 6:39 PM (IST)
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सुरक्षित ट्रेन संचालन को लेकर पहरेदारों को किया गया नियुक्त

पूर्वोत्तर के राज्य में भारी बारिश व लैंड स्लाइड को लेकर खतरा बना हुआ है.

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रेलवे ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारी बारिश को लेकर लिया फैसला

कटिहार. पूर्वोत्तर के राज्य में भारी बारिश व लैंड स्लाइड को लेकर खतरा बना हुआ है. ऐसे में पूर्वोत्तर के राज्य से राजधानी, वंदे भारत, तेजस, संपर्क क्रांति, रानी कमलापति, अवध-असम, महानंदा सहित पूर्व मध्य रेलवे व पूर्व रेलवे की ओर दर्जनों ट्रेनें परिचालित होती है. ऐसे में उन क्षेत्रों के लिए रेलवे ने पूर्व से ही अपनी तैयारी पूरी कर ली थी. स्थिति बिगड़ने पर रेलवे सतर्क व सजग है. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारी मानसून बारिश के बीच निर्बाध और सुरक्षित ट्रेन सेवाओं को बनाये रखने के लिए व्यापक उपायों को सक्रिय रूप से लागू कर रहा है. क्षेत्र की जटिल भू-संरचना और गंभीर मौसम स्थितियों से उत्पन्न चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, एनएफ रेलवे ने यात्री सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए अपनी निगरानी और रखरखाव गतिविधियों को तेज कर दिया है.

संवेदनशील स्थानों पर पहरेदारों की नियुक्ति

इस मानसून के दौरान ट्रैक की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, रेलवे ने सभी संवेदनशील स्थानों पर स्थायी पहरेदार तैनात किए हैं. विशेष रूप से लामडिंग-बदरपुर पहाड़ी खंड और त्रिपुरा के विभिन्न स्थानों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है. ट्रैक और बुनियादी ढांचे की स्थिति की निगरानी के लिए नियमित गश्त की जा रही है.

पूसी रेलवे के अपर महाप्रबंधक और मंडल रेल प्रबंधक सहित वरिष्ठ अधिकारी स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं. निकट निगरानी और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों द्वारा ट्रॉली गश्त की जा रही है. जमीनी स्तर पर सतर्कता को और मजबूत करने के लिए, वरिष्ठ अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों की निगरानी और आवश्यकतानुसार त्वरित प्रतिक्रिया समन्वय के लिए क्षेत्र में तैनात किया गया है.

ड्रोन आधारित लिडार तकनीकी पहल अपनाई

इसके अतिरिक्त, पूसी रेलवे ने भूस्खलन, जल निकासी समस्याओं और तटबंध स्थिरता से जुड़े जोखिमों को संबोधित करने के लिए तकनीकी पहल अपनाई है. इनमें लामडिंग-बदरपुर पहाड़ी खंड के 80 किलोमीटर के हिस्से में ड्रोन-आधारित लिडार (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग), हाई रिजॉल्यूशन एरियल इमेजिंग और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सर्वेक्षण शामिल हैं. ये तकनीकें भूमिगत दोषों और जल-जमाव वाले क्षेत्रों का शीघ्र पता लगाने में सुविधा प्रदान करती हैं. जिससे संभावित खतरों को कम करने के लिए पहले से ही कार्रवाई करना संभव हो जाता है. इसके अलावा, भारी बारिश के दौरान सुरंग सुरक्षा और संरचनात्मक निगरानी को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनिंग (टीएलएस) शुरू की गयी है.

एनएफ रेलवे चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थिति के बावजूद क्षेत्र में सुरक्षित और विश्वसनीय रेल कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए बेहतर तकनीक अपनाये जा रहे हैं. और संवेदनशील स्थानों पर पहरेदार की प्रतिनियुक्ति की जा रही है, ताकि रेलयात्री सुरक्षित एवं सुखद रेल यात्रा का अनुभव प्राप्त कर सके.

कपिंजल किशोर शर्मा, मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी, एनएफ रेलवेB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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