कोसी-सीमांचल से नहीं रुक रहा पलायन

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मनरेगा भी नहीं रोक पा रही मजदूरों का पलायन अनुमान के मुताबिक रोजाना तीन हजार लोग जा रहे परदेस कटिहार : सरकार के तमाम दावों व प्रयासों के बीच कोसी और सीमांचल इलाके के मजदूरों का बाहर अन्य राज्यों में काम की खोज में जाना रोके नहीं रुक रहा है. बिहार सरकार के सरकारी प्रयास […]

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मनरेगा भी नहीं रोक पा रही मजदूरों का पलायन

अनुमान के मुताबिक रोजाना तीन हजार लोग जा रहे परदेस
कटिहार : सरकार के तमाम दावों व प्रयासों के बीच कोसी और सीमांचल इलाके के मजदूरों का बाहर अन्य राज्यों में काम की खोज में जाना रोके नहीं रुक रहा है. बिहार सरकार के सरकारी प्रयास इन मजदूरों एवं इनके परिवार के अन्य सदस्यों के पेट की आग के सामने बौने साबित हो रहे है. मजदूरों का पलायन का आलम यह है कि कटिहार से अन्य संपन्न राज्यों में जाने वाली ट्रेनों से रोजाना लगभग तीन हजार की संख्या में मजदूर जाते है. जिससे यह सहज ही मालूम पड़ता है
कि इतनी बड़ी संख्या में रोजाना मजदूरों का पलायन होना सभी सरकारी दावे के खोखलेपन को उजागर करता है. सभी सरकारी योजना का संचालन बेहतर ढंग से नहीं होने की वजह से गरीबों को लाभ नहीं मिल पा रहा है. यही वजह है कि कटिहार जैसे पिछड़े इलाके से प्रतिदिन हजारों गरीब, मजदूरों का पलायन होता है. ट्रेनों के जेनरल डब्बे में मजदूर ठूंस-ठूंस कर पलायन कर रहे हैं. जबकि सरकार का दावा सिर्फ कागजों में ही है.
रेलवे को रोजाना 16 लाख की कमाई : रोजाना इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों का दूसरें राज्यों में जाने से रेलवे को लगभग 16 लाख रुपये का रोजाना कमाई हो रही है. इससे रेलवे की राजस्व में बढ़ोतरी भी हो रही है. लेकिन मजदूर तो घर परिवार को छोड़ कर बाहर जाने को मजबूर हो रहे हैं. जबकि सरकार, जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर कोई नहीं जा रहा है.
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