कटिहार : हत्या मामले में पति व सास को आजीवन कारावास की सजा

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2014 में घटी थी घटना फोन पर दी गयी थी मौत की सूचना कटिहार : जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रशेखर झा की अदालत ने गुरुवार को दहेज हत्या में दोषी पाये जाने पर पति व सास को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. यह सजा भादवि की धारा 304 बी\34 तथा 302\34 के तहत दोनों […]

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2014 में घटी थी घटना

फोन पर दी गयी थी मौत की सूचना

कटिहार : जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रशेखर झा की अदालत ने गुरुवार को दहेज हत्या में दोषी पाये जाने पर पति व सास को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. यह सजा भादवि की धारा 304 बी\34 तथा 302\34 के तहत दोनों अभियुक्तों को सुनायी गयी है. न्यायालय ने अभियुक्तों को जुर्माना के रूप में 10 हजार रुपये भुगतान का भी आदेश दिया है. नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त सजा

कटिहार : हत्या मामले

का प्रावधान किया है.

इसी मामले में न्यायालय ने भादवि की धारा 201\34 के तहत भी अभियुक्तों को दोषी पाया है. इसमें न्यायालय ने अभियुक्तों को तीन साल की सजा व पांच हजार जुर्माना सुनाया है. आजमनगर थाना अंतर्गत तामावाड़ी गांव के सूचक मनोज सिंह ने तीस मई 2014 को थाने में दिये एक फर्द बयान में कहा था कि उसकी बहन कंचन देवी की शादी जून 2012 में बौला टोला निवासी मालवर सिंह के पुत्र सोराई सिंह के साथ हुई थी. शादी के बाद एक पुत्री भी हुई, जिसकी उम्र चार माह है. पति स्वराई सिंह ने फोन पर सूचना दी कि उसकी बहन इस दुनिया में नहीं रही. सूचना पर जब वह अपने चचेरे भाई जयनारायण सिंह के साथ बहन के ससुराल पहुंचे तो देखा कि उसकी बहन का शव कमरे में खून से लथपथ पड़ा था. और उसके शरीर पर कई भागों में कटने का निशान था. फर्द बयान में उसने पूर्व में भी अपनी बहन से पति एवं सास चिंता देवी की ओर से दहेज मांगने के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. गांव के लोगों से उसे पता चला कि सास चिंता देवी सुसर मनवर सिंह, तथा पति सोराई सिंह खेत में काम करने गये थे. खेत से आने पर उसी बात को लेकर उसका झगड़ा पत्नी से हुआ. इसी बीच पति ने धारदार हथियार से कंचन देवी को जख्मी कर दिया. बाद में दोनों ने मिल कर उसकी हत्या कर दी. पुलिस के समक्ष दोनों अभियुक्तों ने घटना के संदर्भ में स्वीकरोक्ति बयान दिया है. सजा की बिंदु पर सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने कहा कि चूंकि घटना में दोष सिद्धि हो चुका है. इस कारण अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा दी गयी है. सूचक मनोज सिंह के अधिवक्ता अजीत कुमार मोदी ने न्यायालय से कहा कि यह घटना अमानवीय है तथा कभी कभार ऐसी घटना देखने को मिलती है. इस कारण अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा दी जाये. अभियोजन पक्ष की ओर से इस सत्रवाद में लोक अभियोजक शंभु प्रसाद ने कुल दस गवाहों का न्यायालय में परीक्षण कराया.

सुनवाई के दौरान सूचक व मृतका की पुत्री भी रही उपस्थित

गुरुवार को सजा की बिंदु पर सुनवाई के पश्चात न्यायालय द्वारा दी गयी सजा से सूचक संतुष्ट दिखे. सूचक मनोज सिंह का कहना था कि उसके बहनोई सोराई सिंह ने अमानवीय घटना को अंजाम दिया है. इसका समाज में कोई स्थान नहीं है.

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