नौ जनवरी को गंभीर अवस्था में भरती हुई थीं हफलागंज निवासी सुमित्रा देवी, बीपीएल कार्डधारी थीं, िफर भी प्रबंधन ने एक न सुनी
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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शव िदये जाने के ऐवज में पैसे मांगे जाने के बाद आक्रोशित हो गये परिजन, घंटों िकया हंगामा काफी जद्दोजहद व स्थानीय जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद परिजनों को सौंपा गया शव कटिहार : शहर के डीएस कॉलेज स्थित एसआरएम अस्पताल में इलाज में लापरवाही पर मंगलवार की सुबह एक महिला की मौत हो गयी. […]
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शव िदये जाने के ऐवज में पैसे मांगे जाने के बाद आक्रोशित हो गये परिजन, घंटों िकया हंगामा
काफी जद्दोजहद व स्थानीय जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद परिजनों को सौंपा गया शव
कटिहार : शहर के डीएस कॉलेज स्थित एसआरएम अस्पताल में इलाज में लापरवाही पर मंगलवार की सुबह एक महिला की मौत हो गयी. जब मरीज के परिजन शव लेकर जाना चाहे, तो अस्पताल प्रबंधन ने 25 हजार रुपये की डिमांड करते हुए कहा कि जब रुपये मिलेगा तब ही शव को ले जाने देंगे. इस बात पर मृतका के परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया.
हंगामा को लेकर निजी नर्सिंग होम में भीड़ इकठ्ठा हो गयी. निजी नर्सिंग होम में मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधक शव देने से इनकार कर रहे थे. बकाया राशि का भुगतान करने के बाद ही शव देने की बात की जा रही थी. इधर, मृतका के परिजन अस्पताल प्रबंधक से बार-बार गुहार लगा रहे थे.
इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधक पर किसी बात व गुहार का असर नहीं हो रहा था. इस बात को लेकर मरीज के गांव से काफी संख्या में लोग एकत्रित हो गये और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया. काफी जद्दोजहद व स्थानीय जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद शव को परिजनों को सौंपा गया. प्राप्त जानकारी के अनुसार हफलागंज निवासी सुमित्रा देवी को नौ जनवरी को गंभीर अवस्था में इलाज के लिए एसआरएम अस्पताल में भरती कराया गया था. हालांकि वह बीपीएल कार्डधारी थी. उसके परिजन अस्पताल प्रबंधन पर बार-बार बीपीएल परिवार का बता कर रियायत की मांग कर रहे थे.
अस्पताल प्रबंधन ने उनकी बातों को नकारते हुए उसे वीआइपी आइसीयू में भरती कर दिया. अस्पताल प्रबंधन ने अाइसीयू का चार्ज प्रतिदिन 8000 रुपया बताया. मरीज के परिजन में पुत्र शिवा पासवान व उसके सहयोगी ने 2000 मरीज के भरती कराने समय भुगतान किया तथा दो अलग-अलग किश्तों में 1800 सौ रुपया का रात में भी भुगतान कर दिया. 10 जनवरी की सुबह 5.30 मिनट पर इलाजरत महिला की मौत हो गयी.
परिजन ने मांगा शव प्रबंधक ने किया इनकार : महिला की मौत उपरांत जब परिजन ने शव ले जाना चाहा तो अस्पताल प्रबधंक ने मृतक के परिजन से 25 हजार रुपये की मांग की. जिस पर परिजन व अस्पताल प्रबंधक में बहस की स्थिति उत्पन्न हो गयी. कुछ घंटों तक अस्पताल में हंगामा का माहौल देखने को मिला. आसपास के लोग साथ ही मृतक के पक्ष की ओर से दर्जनों की संख्या में भीड़ एकत्रित हो गयी.
परिजनों में मृतका के पुत्र शिवा ने कहा कि अस्पताल प्रबंधक ने कहा जबतक 25 हजार रुपया जमा नहीं कराओगे, तबतक मृतक के शव नहीं सौंपी जायेगी. इस बीच मृतक की ओर से स्थानीय मुखिया नारायण पासवान अस्पताल पहुंचे व दोनों पक्ष में बातचीत उपरांत 1600 रुपये का भुगतान करने उपरांत ही शव को परिजनों के हवाले किया गया.
दिखाया था बीपीएल कार्ड प्रबंधक ने किया एडिमट करने से इनकार
बताते चलें कि एसआरएम निजी नर्सिंग होम का उद्घाटन राज्यपाल बिहार ने बीते 23 नवंबर को किया था. इस दौरान यह दावा किया गया था िक यह अस्पताल गरीबों के हित के लिए बनाया गया है. बीपीएल परिवार वालों के लिए महज कुछ राशि में ही इलाज यहां संभव होगा. एक सौ रुपये में आइसीयू में बीपीएल परिवार वालों का इलाज किया जायेगा. इसी सूचना के बाद परिजनों ने हफलागंज निवासी सुमित्रा देवी को एसआरएम अस्पताल में भरती कराया, लेकिन जब परिजनों ने महिला को एडमिट करने से पूर्व बीपीएल कार्ड दिखाया तो प्रबंधक ने उसे बीपीएल कार्ड पर एडमिट करने से मना कर दिया. परिजनों ने मरीज की गंभीर अवस्था को देख उसे एसआरएम में एडमिट कर दिया. प्रबंधक ने मरीज को 8000 रुपये प्रतिदिन वाले आइसीयू में रखा. इतना ही नहीं मरीज की मौत पर भी प्रबंधक ने रुपये के लिए शव को परिजनों को नहीं सौंपा. शव को अस्पताल प्रबंधक ने तकरीबन 11 घंटे अपने कस्टडी में रखा. यह तो वही बात को चरितार्थ करता है कि नाम बड़े दर्शन छोटे. क्योंकि उद्घाटन के दौरान बड़ी-बड़ी घोषणाएं हो रही थी कि यह अस्पताल गरीब व निर्धन परिवार वालों के लिए खोला गया है. लेकिन जमीनी स्तर पर अस्पताल प्रबंधक ठीक इसके विपरीत है. प्रबंधक ने बीपीएल कार्ड धारी को ही बीआइपी ट्रीटमेंट दे डाली तथा मरीज के मरने के बाद भी शव को देने में आनाकानी की.
परिजनों ने बीपीएल होने की बात नहीं बतायी थी
मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को बीपीएल कार्डधारी होने की बात नहीं बतायी थी. हां, महिला की मौत के बाद उसके इलाज का जो बकाया बिल था निश्चित उस बिल के भुगतान के लिए उसके शव को देने से मनाही की गयी थी, जिसको लेकर बात बढ़ी और अंत में बिना राशि लिये ही शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया.
डॉ एमएल प्रसाद, अस्पताल प्रबंधक
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