शहर में रोज हाेता है लाखों का कारोबार
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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हद है. बेरोकटोक िबक रहे चायनीज सामान दीपावली को लेकर शहर का फल पट्टी मार्केट चायनीज सामान से पट गया है. चायनीज सामान का कारोबार यहां लाखों में होता है. चायनीज सामान के हब के रूप में फल पट्टी का मार्केट जिले में जाना जाता है. पर, इसकी कभी जांच नहीं होती है. कटिहार : […]
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हद है. बेरोकटोक िबक रहे चायनीज सामान
दीपावली को लेकर शहर का फल पट्टी मार्केट चायनीज सामान से पट गया है. चायनीज सामान का कारोबार यहां लाखों में होता है. चायनीज सामान के हब के रूप में फल पट्टी का मार्केट जिले में जाना जाता है. पर, इसकी कभी जांच नहीं होती है.
कटिहार : जिले के विभिन्न प्रखंडों से खुदरा विक्रेता से लेकर बड़ी संख्या में ग्राहक चायनीज सामान की खरीदारी यहां से करते हैं. यहां जितने भी चायनीज सामान की बिक्री होती है, अधिकांश चोरी छुपे तरीके से लाकर बेची जाती है. इससे राज्य सरकार को राजस्व का काफी नुकसान होता है. इस ओर न तो जिला प्रशासन का ध्यान है और न ही कस्टम की ओर से कभी कोई कार्रवाई की जाती है. जानकारों का कहना है कि जिले में कहीं भी विदेशी सामान की बिक्री होती है, तो उसकी जांच-पड़ताल का जिम्मा कस्टम का होता है. यदि अवैध तरीके से विदेशी सामान की बिक्री हो रही है, तो उसे रोकने व जब्त करने का काम कस्टम विभाग का है.
पर, शहर में इतने बड़े पैमाने पर चायनीज सामान की बिक्री हो रही है. उसे जब्त करने की बात तो दूर, उसकी जांच पड़ताल भी कभी नहीं की जाती है. जानकारों का कहना है कि जितने भी चायनीज सामान की बिक्री हो रही है, वह कस्टम विभाग की मिलीभगत से हो रही है. यही वजह है कि उक्त विभाग की ओर से कभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. जहां चायनीज सामान की बिक्री हो रही है, उससे कुछ ही दूरी पर कस्टम विभाग का कार्यालय है. इसके बाद भी कोई कार्रवाई न होना कई सवालों को खड़ा करने के लिए काफी है. गौरतलब हो कि नेपाल, बंगाल के रास्ते सबसे अधिक जायनीज सामान मंगाया जाता है.
हर तरह के सामान यहां उपलब्ध : शहर के फल पट्टी मार्केट में घर में यूज होने वाले सभी सामान समेत इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, खिलौने, दीपावली के मौके पर लगाने वाले सभी तरह के लाइट, जूते, चप्पल, सोलर लाइट, छोटे बॉक्स सहित हर तरह के सामान की बिक्री खुले आम हो रही है. जानकारों का कहना है कि दिल्ली, नेपाल, बंगाल सहित अन्य जगहों से चायनीज सामान को मंगाया जाता है तथा धड़ल्ले से बेचा जाता है. होलसेल दुकानदारों एवं खुदारा दुकानदारों को इन सामान को बेचने में किसी तरह का कोई भय भी नहीं है.
रविवार को प्रभात खबर की टीम ने फल पट्टी का जायजा लिया और जानने का प्रयास किया कि आखिर यहां चायनीज सामान की कितनी दुकानें हैं और कितने का कारोबार रोजाना होता है. जायजा लेने के क्रम में पाया गया कि फल पट्टी में एक, दो नहीं बल्कि दर्जनों ऐसी दुकानें हैं, जहां चायनीज सामान खुलेआम बेचा जा रहा है.
एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन लाखों का कारोबार यहां हो रहा है. यहां से देहाती क्षेत्रों सहित अन्य जगहों के खरीदारों की भीड़ लगी हुई थी. दीपावली के कारण खुदरा विक्रेता खूब खरीदारी कर रहे थे. सभी दुकानों पर भीड़ लगी हुई थी. स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि दीपावली की वजह से भीड़ बढ़ गयी है, लेकिन पूरे वर्ष यहां से चायनीज सामान की बिक्री बड़े पैमाने पर होती है.
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