बिहार : कोहरे की मार, भटका स्टीमर, बीच गंगा में 150 यात्रियों की कटी रात

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Jan 2018 5:56 AM

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कटिहार : गंगा तट पर बुधवार की सुबह नौ बजे एलटीसी में फंसे 150 यात्रियों को नाव से मनिहारी लाया गया. यात्री लगभग 18 घंटे तक स्टीमर में फंसे रहे. झारखंड के साहेबगंज से मनिहारी आने के क्रम में कुहासे के कारण सैकड़ों यात्रियों से को लेकर आ रहा स्टीमर मंगलवार शाम को रास्ता भटक […]

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कटिहार : गंगा तट पर बुधवार की सुबह नौ बजे एलटीसी में फंसे 150 यात्रियों को नाव से मनिहारी लाया गया. यात्री लगभग 18 घंटे तक स्टीमर में फंसे रहे. झारखंड के साहेबगंज से मनिहारी आने के क्रम में कुहासे के कारण सैकड़ों यात्रियों से को लेकर आ रहा स्टीमर मंगलवार शाम को रास्ता भटक कर फंस गया था. स्टीमर में फंसे यात्रियों ने रतजगा कर किसी प्रकार दहशत में रात काटी. स्टीमर पर छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं भी थीं. रास्ता भटकने के बाद स्टीमर चालक ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए लालबथानी, शोभनपुर के गंगा किनारे स्टीमर को खड़ा किया था. मनिहारी गंगा तट से नाव को प्रशासन ने भेजा.
फेरी सेवा की ओर से रात में ही घाट बुकिंग क्लर्क भूषण झा स्टीमर लाने के लिए रवाना हुए थे. सुबह करीब नौ बजे सभी यात्रियों को वे अपने साथ लेकर आये. रात में घना कुहासा होने के कारण नाव भी भटक जा रही थी. काफी मशक्कत के बाद नाव से लोग स्टीमर तक पहुंच पाये. इसके बाद सुबह नाव से सभी यात्रियों को सुरक्षित लाया गया.
साहेबगंज से खुला था स्टीमर : साहेबगंज से मनिहारी के लिए मंगलवार की शाम चार बज कर तीस मिनट पर स्टीमर खुला था, जबकि कोहरा पिछले 15 दिनों से शाम से पहले ही गंगा नदी में हो जाता है. इसके बावजूद फेरी सेवा प्रबंधन ने स्टीमर को रवाना कर यात्रियों की जान को खतरे में डाल दिया. साहेबगंज प्रशासन और मनिहारी प्रशासन के निर्देशों का पालन फेरी सेवा प्रबंधन ने नहीं किया. बंगाल फेरी एक्ट के तहत सख्त निर्देश दिये गये हैं कि कुहासे में स्टीमर का परिचालन नहीं होगा.
स्टीमर पर भूखे-प्यासे काटी रात : साहेबगंज से मनिहारी आ रहे यात्रियों ने शोभनपुर लालबथानी के समीप भूखे-प्यासे रात काटी. छोटे-छोटे बच्चे भी बगैर दूध के भूखे रो रहे थे. स्टीमर पर दुकान में रखी मूढ़ी से कुछ लोगों ने अपनी पेट की भूख हल्की मिटायीमनिहारी गंगा तट पर फेरी सेवा प्रबंधन की ओर से यात्रियों को चाय, पानी और नाश्ता दिया गया. अनुमंडल प्रशासन ने इस संबंध में फेरी सेवा प्रबंधन को निर्देश दिया था. कई यात्रियों ने पिछले 18 घंटे से कुछ भी नहीं खाया था. वे केवल गंगा नदी का पानी पीकर समय गुजार रहे थे.
याद आ गया वर्ष 1984 का खौफनाक मंजर : बीच गंगा नदी में स्टीमर के फंसने व भीषण ठंड में करीब 150 यात्रियों के रात भर उसमें रहने के बाद लोगों में 1984 में हुए स्टीमर हादसे की याद ताजा हो गयी.
उस याद को ताजा कर लोग सिहर उठे. इस हादसे में बच कर निकले सभी यात्री ईश्वर को लाख-लाख शुक्र मनाते हैं कि उनकी जान बच गयी. पूरी रात गुजारने के बाद बुधवार को नाव से जब यात्री मनिहारी घाट यात्री पहुंचे तो उनके चेहरे पर खौफ का मंजर साफ दिख रहा था.
उल्लेखनीय है कि 1984 में मनिहारी की ओर से स्टीमर खुला था. नदी में स्टीमर के डूब जाने से करीब 300 से अधिक लोग असमय काल के गाल में समा गये थे. देश भर में इस स्टीमर हादसे को बड़ी दुर्घटना करार दिया गया था. आज भी कहीं इस तरह की कोई घटना होती है तो मनिहारी के स्टीमर हादसे की याद ताजा हो जाती है.
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