सदर अस्पताल में आये दिन होती है चिकित्सकों के साथ मारपीट
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अस्पताल की सुरक्षा के नाम पर सालाना खर्च हो रहे 64 लाख रुपये कटिहार : सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों भगवान भरोसे है. नित्य सदर अस्पताल में कोई न कोई अापराधिक घटनाएं घटित होती रहती है. कभी मरीज के परिजन सदर अस्पताल में हंगामा करते दिखते हैं तो कभी चिकित्सक के साथ हाथापाई […]
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अस्पताल की सुरक्षा के नाम पर सालाना खर्च हो रहे 64 लाख रुपये
कटिहार : सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों भगवान भरोसे है. नित्य सदर अस्पताल में कोई न कोई अापराधिक घटनाएं घटित होती रहती है. कभी मरीज के परिजन सदर अस्पताल में हंगामा करते दिखते हैं तो कभी चिकित्सक के साथ हाथापाई तक हो जाती है. इन सभी मामलों में सदर अस्पताल में तैनात निजी सुरक्षा कर्मी खुद को सुरक्षित करने के जुगाड़ में दिखते हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने कटिहार डीएम व सीएस को निर्देश जारी किया है कि शीघ्र ही सदर अस्पताल में एक्स आर्मी की बहाली कर सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर करें. ताकि सदर अस्पताल में हंगामा व चिकित्सकों के साथ मारपीट जैसी वारदात नहीं हो पाये.
लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश की बाद भी जिला प्रशासन ने सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में मानो रुचि नहीं ले रही है. संभवत: चिकित्सक के साथ मारपीट व सदर अस्पताल में होने वाले हंगामा को नजर अंदाज कर जिला प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है.
केस स्टडी-वन
बीते तीन अगस्त को सहायक थाना पुलिस घायल को इलाज कराने सदर अस्पताल लेकर आयी थी. ड्यूटी पर तैनात डॉ आदित्य ने उसकी स्थिति देख उसे कटिहार मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया था. सहायक थानाध्यक्ष ने इस संदर्भ में डॉ आदित्य से भी बात की, थानाध्यक्ष ने डॉ आदित्य को कहा कि मरीज को भरती कर नगर थाना पुलिस को एक ओडी स्लीप दे कर उनका इलाज कर दे. लेकिन डॉ आदित्य ने संसाधन का घोर अभाव कहते हुए मरीज को कटिहार मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने की बात कही. इस पर पुलिस ने मरीज को सदर अस्पताल के बाहर ही छोड़ कर निकल गयी. इधर मरीज के परिजनों को सूचना मिलते ही सदर अस्पताल पहुंची. तथा डॉ आदित्य को पीट दिया.
केस स्टडी-टू
बीते माह पूर्व सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड से एक नवजात को आरोपित महिला लेकर फरार हो गयी थी. घटना की जानकारी मिलते ही मामले में नगर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष केएन सिंह के नेतृत्व में सहायक थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष अमित कुमार ने सदर अस्पताल में लगे सीसीटी फुटेज के आधार पर छापेमारी कर मनसाही से एक आरोपित महिला व उसके रिश्तेदार को गिरफ्तार कर नवजात को बचा लिया था. मामले में नवजात को दस हजार रुपये में नवजात को बेचने की तैयारी में थी.
केस स्टडी-थ्री
सदर अस्पताल में सर्पदंश से आहत एक बच्ची की मौत पर उपजे बवाल को लेकर मृतक के परिजनों ने जमकर हंगामा किया था. चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी के साथ मारपीट कर सदर अस्पताल में जमकर तोड़ फोड़ की थी. इस मामले में भी निजी सुरक्षा कर्मी अपनी जान बचा कर निकलने में थे. इस प्रकार के दर्जनों मामले सदर अस्पताल में होती रहती है. उन मामले में निजी सुरक्षा कर्मी अपनी सुरक्षा के फिराक में रहते है तो फिर ऐसी सुरक्षा व्यवस्था पर लाखों का खर्च क्यों.
कहते हैं सीएस
इस संदर्भ में सीएस बीएन मिश्रा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की चिठ्ठी प्राप्त हो गयी है. उक्त आदेश के आलोक में जिला स्वास्थ्य विभाग अग्रेतर कार्रवाई में जुट गयी है.
जिले में 70 से अधिक निजी सुरक्षा कर्मी हैं तैनात
पटना की एक निजी सुरक्षा कंपनी एली फॉलकोन के जिम्मे जिले के सदर अस्पताल सहित जिले के सभी प्रखंड की स्वास्थ्य केंद्र की सुरक्षा का जिम्मा है. सदर अस्पताल में 17 कर्मी तथा पूरे जिले में है 84 सुरक्षा कर्मी की बहाली एली फॉलकोन ने की है. इस कंपनी के तहत सदर अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्र में लगाये गये सुरक्षा कर्मी को किसी प्रकार की ट्रेनिंग भी नहीं दी गयी है. बस जैसे तैसे उनकी बहाली कर कंपनी सुरक्षा के नाम पर सरकारी खजाने को लूट रही है.
इस कंपनी में तैनात सुरक्षा कर्मी कोई चाय बेचता था तो कोई मोची का कार्य करता था. बस एली फॉलकोन ने उन कर्मियों को सीधे ड्रेस पहनाकर सदर अस्पताल सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात कर दिया है. सुरक्षा के नाम एली फॉलकोन कंपनी सरकार से सदर अस्पताल सहित जिले की स्वास्थ्य केंद्र के लिए 84 लाख रुपये लेती है, जबकि सदर अस्पताल व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों को 3500 से 4000 तक का ही भुगतान करती है.
पूर्व विधायक की बहन की मौत पर चिकित्सक के साथ हुई थी मारपीट
भाजपा के पूर्व विधायक महेश पासवान की बहन की अचानक तबीयत बिगड़ गयी थी. उसे आनन फानन में सदर अस्पताल में भरती कराया गया था. उसे सदर अस्पताल के बरामदे में एडमिट कर इलाज कराया जा रहा था. जिस क्रम में उसकी मौत हो गयी थी. उस मामले में चिकित्सक पर आरोप लगाते हुए चिकित्सक के साथ मारपीट की गयी थी.
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