जिला स्थापना दिवस पर इस बार फीकी पड़ी प्रदर्शनी मेले की रौनक

Published by : VIKASH KUMAR Updated At : 17 Mar 2026 4:15 PM

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खरीदारों की कमी से व्यापारी मायूस, प्रचार-प्रसार के अभाव में पसरा सन्नाटा

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खरीदारों की कमी से व्यापारी मायूस, प्रचार-प्रसार के अभाव में पसरा सन्नाटा दिनभर की मजदूरी तो दूर, स्टॉल का भाड़ा भी नहीं निकाल पाये दुकानदार भभुआ नगर. भभुआ में कभी जिला स्थापना दिवस से लेकर बिहार दिवस तक जगजीवन स्टेडियम में लगने वाला प्रदर्शनी मेला लोगों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था. वर्षों तक यह मेला न सिर्फ लोगों के मनोरंजन का माध्यम रहा, बल्कि स्थानीय व बाहरी व्यापारियों के लिए भी बड़ा बाजार साबित होता था. लोग परिवार के साथ मेले में पहुंचते व जमकर खरीदारी भी करते थे, लेकिन इस बार वह उत्साह व भीड़ पूरी तरह से गायब दिखी. मेले के आयोजन को लेकर न तो पहले जैसी तैयारी दिखी व न ही लोगों में कोई उत्सुकता नजर आयी. हालांकि, यह पहली बार नहीं है, बीते कुछ बरसों से यही स्थिति देखने को मिल रही है. इस वर्ष जिला प्रशासन ने प्रदर्शनी मेले का आयोजन जगजीवन स्टेडियम के बजाय लिच्छवी भवन में कर दिया. बिना व्यापक प्रचार-प्रसार के आयोजित इस मेले की जानकारी अधिकांश लोगों तक पहुंच ही नहीं सकी. नतीजतन, मेले में दुकानदार तो पहुंचे, लेकिन ग्राहक पूरी तरह गायब रहे, जिससे यह पूरा आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह गया. स्टॉल लगाये गये, लेकिन उनमें चहल-पहल के बजाय सन्नाटा पसरा नजर आ रहा था. व्यापारियों को हुआ भारी नुकसान मेले में शामिल हुए व्यापारियों को इस बार भारी निराशा का सामना करना पड़ा. कंबल, कालीन, स्ट्रॉबेरी व अन्य उत्पादों के स्टॉल लगाये गये, लेकिन खरीदारी के अभाव में बिक्री शून्य रही. कंबल बेचने आये व्यापारी बिगाऊ पाल ने बताया कि आने-जाने में ही काफी खर्च हो गया, लेकिन एक भी कंबल नहीं बिक सका. अन्य व्यापारियों का भी यही हाल रहा. उनका कहना था कि दिनभर की मजदूरी तो दूर, भाड़े की लागत भी नहीं निकल पायी, जिससे व्यापारियों को काफी निराशा हुई है. प्रशासन की अनुपस्थिति पर उठे सवाल प्रदर्शनी मेले में अधिकतर स्टॉल खाली नजर आये. हैरानी की बात यह रही कि आयोजन स्थल पर जिला प्रशासन के अधिकारी या कर्मचारी भी नजर नहीं आये, इससे व्यापारियों व स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गयी. लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सही तरीके से प्रचार-प्रसार करता व आयोजन को गंभीरता से लेता, तो मेले की स्थिति इतनी खराब नहीं होती. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भविष्य में इस आयोजन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाये, ताकि पुरानी रौनक वापस लौट सके.

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