कैमूर: कुदरा के स्कूल परिसर में बंध रहे मवेशी, चहारदीवारी और पेयजल के अभाव में 55 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
विद्यालय परिसर में बंधा हुआ मवेशी
बिहार के एक प्राथमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. चहारदीवारी न होने से परिसर में मवेशी घूमते हैं और पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है. 55 बच्चे इन अव्यवस्थाओं के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं.
Kaimur Cattle Tied in School Premises: कुदरा प्रखंड क्षेत्र के न्यू प्राथमिक विद्यालय छोटका कझार में पढ़ने वाले बच्चों को आज भी कई बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करनी पड़ रही है. विद्यालय में पांच शिक्षक और 55 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन परिसर में चहारदीवारी नहीं होने के साथ बच्चों के लिए पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है.
चहारदीवारी नहीं होने के कारण विद्यालय परिसर में आसपास के ग्रामीणों के मवेशी आसानी से प्रवेश कर जाते हैं. स्थिति यह है कि विद्यालय परिसर में पशु घूमते रहते हैं और ग्रामीण विद्यालय की जमीन पर अपने मवेशी बांध देते हैं. इससे परिसर में गंदगी फैलने के साथ बच्चों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है.
पेयजल के लिए घर से पानी लाते हैं बच्चे
विद्यालय में पेयजल की समस्या भी गंभीर बनी हुई है. यहां पढ़ने वाले बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए घर से पानी लेकर आना पड़ता है. प्रतिदिन विद्यालय आने वाले 55 बच्चों के लिए पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं होने से गर्मी और उमस के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है. मध्याह्न भोजन सहित अन्य गतिविधियों के दौरान भी बच्चों को पानी की आवश्यकता होती है. ऐसे में घर से पानी लाने की मजबूरी बच्चों के लिए अतिरिक्त परेशानी बन गयी है.
आवेदन के बाद हुई जांच, नई व्यवस्था का मिला था आश्वासन
विद्यालय के प्रधानाध्यापक विद्यासागर सिंह ने बताया कि पेयजल की समस्या को लेकर विभाग को आवेदन दिया गया है. इसके बाद संबंधित विभाग के कर्मी विद्यालय में जांच के लिए पहुंचे थे. जांच के दौरान बताया गया कि विद्यालय में मौजूद पुराने नल से समस्या का समाधान नहीं हो पायेगा और इसके स्थान पर नए नल की आवश्यकता है. संबंधित कर्मियों की ओर से नई व्यवस्था उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन जांच के बाद भी अब तक विद्यालय में पेयजल की नई व्यवस्था नहीं हो सकी है. प्रधानाध्यापक के अनुसार, विद्यालय की ओर से इस समस्या से विभाग को लगातार अवगत कराया जा रहा है.
चहारदीवारी नहीं होने से परिसर में घुसते हैं मवेशी
विद्यालय की दूसरी बड़ी समस्या चहारदीवारी का अभाव है. विद्यालय परिसर खुला होने के कारण मवेशी दिनभर परिसर में घूमते रहते हैं. आसपास के ग्रामीण अपने पशुओं को विद्यालय की जमीन पर बांध देते हैं.
इससे विद्यालय परिसर में गंदगी फैलने के साथ बच्चों के आवागमन और पढ़ाई पर भी असर पड़ता है. पशुओं के परिसर में प्रवेश को रोकने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है. प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय में चहारदीवारी निर्माण की आवश्यकता से विभाग को अवगत कराया गया है. चहारदीवारी बनने से विद्यालय की जमीन सुरक्षित होने के साथ परिसर में पशुओं का प्रवेश भी रोका जा सकेगा.
जमुनीपुर और छोटका कझार के बच्चे करते हैं पढ़ाई
न्यू प्राथमिक विद्यालय छोटका कझार में आसपास के गांवों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं. मुख्य रूप से जमुनीपुर और छोटका कझार गांव के बच्चे यहां पढ़ने आते हैं. विद्यालय में पांच शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले इन बच्चों के लिए विद्यालय शिक्षा के साथ उनके दैनिक विकास और सीखने का महत्वपूर्ण स्थान है. ऐसे में विद्यालय में पेयजल, चहारदीवारी और परिसर की सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का होना जरूरी है.
बुनियादी सुविधाओं के अभाव से अभिभावकों में चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए केवल शिक्षक और भवन होना पर्याप्त नहीं है. विद्यालय परिसर में स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित वातावरण और मूलभूत सुविधाएं भी जरूरी हैं.
चहारदीवारी के अभाव में विद्यालय की जमीन का इस्तेमाल मवेशी बांधने के लिए किया जाना गंभीर समस्या है. ग्रामीणों ने विभाग से विद्यालय की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने, चहारदीवारी का निर्माण कराने और बच्चों के लिए जल्द से जल्द स्थायी पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है.
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