कागजों में चालू व हकीकत में खराब, शिकायत के बावजूद नहीं हो रही सुनवाई

गर्मी का मौसम आने के बावजूद शहर में की पेयजल व्यवस्था अभी तक दुरुस्त नहीं हो पायी है
भीषण गर्मी में आधे से ज्यादा हैंडपंप बंद = कई पार्षदों ने कहा-आवेदन दिये जाने के बाद भी नहीं करायी जा रही मरम्मत अफसरों की अनदेखी से पानी को तरस रहे शहरवासी, बाजार का पानी खरीदने की मजबूरी भभुआ सदर. गर्मी का मौसम आने के बावजूद शहर में की पेयजल व्यवस्था अभी तक दुरुस्त नहीं हो पायी है, नतीजा यह है कि शहर की मुख्य सड़कों और विभिन्न मुहल्लों में इंडिया मार्क हैंडपंप खराब पड़े हैं. हाल यह है कि महीनों से खराब हैंडपंपों की मरम्मत की फिक्र नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है. इधर शहर में अधिकतर हैंडपंप के खराब रहने की शिकायत कई पार्षदों ने भी लिखित रूप से कार्यपालक पदाधिकारी से की है, लेकिन उनके आवेदनों पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई. शहर के वार्ड सात के पार्षद मनोज सिंह का कहना था कि स्टेडियम गेट और नहर के समीप आस्करण बाबा मंदिर के समीप लगे हैंडपंप मरम्मत के अभाव में बंद पड़ा हुआ है. इन हैंडपंपों से कई लोगों के काम चलता है. इसके लिए उनके द्वारा कई बार लिखित रूप से शिकायत की गयी है, लेकिन महीना दिन बीतने के बाद भी हैंडपंपों की मरम्मत नहीं करायी गयी. उनका कहना था कि नगर पर्षद में जब पार्षदों की सुनवाई नहीं हो रही है, तो आम लोगों का काम किस प्रकार से किया जाता होगा. जबकि, नलजल और हैंडपंप की मरम्मत के लिए नगर पर्षद के पास मैकेनिक भी उपलब्ध है. हालांकि, जिला पदाधिकारी के निर्देश पर पीएचइडी ने ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंपों की मरम्मत के लिए टीम का गठन किया है, लेकिन शहरी क्षेत्र में हैंडपंप की मरम्मत की जिम्मेदारी नगर पर्षद के भरोसे छोड़ दिया है, जो शहर में हैंडपंप तो क्या नलजल से भी लोगों के प्यास बुझाने में असमर्थ है. गौरतलब है कि बिहार सरकार के सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल की शुरुआत होने से पूर्व शहर की आबादी और जरूरत को देखते हुए पीएचइडी और भभुआ नगर पर्षद ने शहर में विभिन्न स्थानों पर लगभग 900 से ज्यादा हैंडपंप लगवाये है, लेकिन इनमें कितने लगने के बाद से बेकार पड़े हैं, यह विभाग को भी नहीं पता है. इसके अलावा नगर पर्षद क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर इंडिया मार्का हैंडपंप भी लगाया गया हैं. लेकिन, मुंडेश्वरी सिनेमा हॉल, अखलासपुर बस स्टैंड के बाहर, नगर थाना के सामने, स्टेडियम गेट के समीप, कचहरी के सामने, जय प्रकाश चौक, वन विभाग आदि प्रमुख स्थानों पर अधिकतर हैंडपंप खराब होकर बंद पड़े है. वहीं, हैंडपंप को छोड़ हर घर नल का जल की बात करे तो अभी भी भभुआ शहर में मुख्यमंत्री के सात निश्चय की यह योजना शैशवावस्था से आगे नहीं बढ़ पायी हैं. फिलहाल, नलजल योजना के तहत अभी भी अधिकतर जगहों पर पानी सप्लाई जैसे तैसे की जा रही है. ले देकर शहर में पीएचइडी की ओर से विशाल जलमीनार खड़ी कर सप्लाइ की पानी दिये जाने का दंभ भले ही भरा जा रहा हो. लेकिन, अधिकतर मुहल्लों में वाटर सप्लाई महज ख्वाब बनकर रह गयी है. ऐसे में सेहत ठीक रखने का केवल एक ही चारा बचता है, कि खुद ही साफ पानी का प्रबंध करें या फिर बाजार में बिक रहे आरओ के पानी पर पैसे खर्च करें. = कहीं धूल फांकते, तो कहीं मिले महीनों से खराब शहर में पेयजल की हो रही समस्या और खराब पड़े हैंडपंपों के संबंध में मंगलवार को प्रभात खबर की टीम भी जब शहर में गाड़े गये हैंडपंपों की स्थिति जांचने निकली, तो कई प्रमुख जगहों पर हैंडपंप खराब पड़े थे. शहर के अखलासपुर बस स्टैंड से राजेंद्र सरोवर और कैलाशपुरी मुहल्ला गेट तक तो एक भी हैंडपंप नहीं मिला और ना ही इन जगहों पर प्यास बुझाने के कोई साधन ही लगे दिखायी दिये. ऐसा ही हाल कैमूर स्तंभ से लेकर सोनहन बस पड़ाव तक की है. सोनहन बस पड़ाव में एक हैंडपंप गड़ा मिला. लेकिन जानकारी मिली कि पेयजल की खातिर इसे स्थानीय लोगों द्वारा सहयोग से मरम्मत करवाया जाता है, जिसके चलते यह चालू है. अगर विभाग के भरोसे रहता तो यह भी हैंडपंप खराब मिलता. बस पड़ाव में मिले लोगों का कहना था कि खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत के लिए कई बार नगर पर्षद से गुहार लगायी गयी, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी व्यस्तता बताकर शहर की इस गंभीर समस्या से अपनी मुंह मोड़ ले रहे है. =नगर पर्षद की सुस्ती से लोगों में भारी आक्रोश शहर के लोगों का कहना था कि हैंडपंप मरम्मत के लिए नगरपालिका को कई बार कहा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती. शहर के वार्ड 18 के रहनेवाले धीरज कुमार, चंदन पटेल, विनीत कुमार, गोविंद चौबे, राधे सिंह आदि का कहना था कि शहर में कई जगहों पर महीनों से हैंडपंप खराब पड़ा हुआ है. हैंडपंप की मरम्मत के लिए कई बार नगरपालिका के अधिकारियों को फोन के द्वारा जानकारी दी गयी, लेकिन किसी ने कोई संज्ञान नहीं लिया है. इसी तरह एकता चौक निवासी अभिषेक चौरसिया ने कहा कि उनके मुहल्ले में अधिकतर हैंडपंप खराब है लेकिन कोई बनवा नहीं रहा है. गर्मी के दिनों में काफी परेशानी हो रही है. शक्तिनगर के राजीव कुमार ने कहा कि मोहल्ले में कई हैंडपंप खराब हैं लेकिन किसी को कोई चिंता नहीं है. आशीष पांडे ने कहा कि सरकारी हैंडपंप काफी दिनों से खराब है, लेकिन जवाबदेह अधिकारी मरम्मत कराने का नाम नहीं ले रहे है. रवि श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्य मार्ग पर हैंडपंप खराब हैं. गर्मी के दिन में पानी की किल्लत है, वाटर सप्लाई भी एक निश्चित समय पर लोगों को मिलता है.
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