मत्स्यजीवी समिति चुनाव पर उठे सवाल, संयुक्त जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे

# सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत रहते पति-पत्नी ने करायी तालाब की बंदोबस्ती
# सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत रहते पति-पत्नी ने करायी तालाब की बंदोबस्ती # बकायादार होने व नीलाम पत्र वाद दायर रहने के बाद भी बिना राशि जमा किये कराया नामांकन # विद्यालय में शिक्षण कार्य और मछली पालन, शिकाहारी एक साथ कैसे हुआ संभव # प्रभात खास # मोहनिया सदर. प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी सूर्यकांत कुमार व वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी (मुख्यालय) इलताफ हुसैन की संयुक्त जांच रिपोर्ट ने मत्स्य जीवी सहयोग समिति भभुआ का नामांकन, मंत्री पद पर निर्वाचित होने से लेकर पति व पत्नी के सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत रहते हुए समिति का सदस्य बनने, नीलाम पत्र वाद दायर होने पर भी मंत्री के पद के लिए निर्वाचित होने व शिक्षण कार्य करते हुए अपने नाम से सरकारी तालाबों की बंदोबस्ती कराने सहित मछली पालन करने, पकड़ने व बिक्री करने आदी सभी कार्य एक साथ करने के मामले में की गयी जांच में कई चौकाने वाला खुलासा करते हुए पूरे सिस्टम को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. संयुक्त जांच रिपोर्ट डीसीओ को सौंप दिया गया है. हालांकि, इस जांच रिपोर्ट पर डीसीओ क्या कार्रवाई करते है यह तो बाद की बात है, फिर भी यह जांच प्रतिवेदन प्रशासन के पारदर्शी व निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के सभी दावों की कलई खोलने के लिए काफी है. दोनों पदाधिकारी ने अपने संयुक्त जांच रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है कि राजकीय कृत कन्या मध्य विद्यालय चैनपुर में आठ फरवरी 2012 से 30 जनवरी 2022 तक कामेश्वर प्रसाद शिक्षक के पद पर कार्यरत रहे और 31 जनवरी 2022 को शिक्षक के पद से सेवानिवृत हुए हैं. वहीं, मणी बेन पटेल बालिका उच्च विद्यालय अखलासपुर में कामेश्वर प्रसाद की पत्नी रीता कुमारी को विद्यालय कमेटी द्वारा शिक्षिका के रूप में 06 अक्तूबर 1998 को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने अपनी स्वेच्छा से 16 अगस्त 2019 को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया. जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है बंदोबस्ती वर्ष 2006-10 की सूची के क्रमांक संख्या 23 पर कामेश्वर प्रसाद व 27 पर रीता कुमारी का नाम अंकित है, इससे स्पष्ट है कि कामेश्वर प्रसाद व उनकी पत्नी रीता कुमारी वर्ष 2010 के पूर्व से ही समिति के सदस्य हैं और दोनों पति-पत्नी शिक्षक के पद पर कार्यरत थे. समिति का सदस्य होना, जलकर प्राप्त करना, मछली पालन व पकड़ना एक समय में कैसे संभव है, इसके लिए कारण पृच्छा किया गया, लेकिन दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया है. # जलकर अधिनियम 2006 का उल्लंघन संयुक्त जांच रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि कामेश्वर प्रसाद की पत्नी रीता कुमारी समिति के मंत्री पद पर कार्यरत थी, उस समय उनके ऊपर 308096 रुपये बकाया था. इसको लेकर इनके खिलाफ नीलम पत्र वाद भी दायर किया गया था. 10 सितंबर 2024 को मत्स्यजीवी सहयोग समिति का चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें कामेश्वर प्रसाद मंत्री पद पर निर्वाचित हुए, जिसके बाद इन्होंने निर्वाचित होने के बाद अपनी पत्नी का बकाया राशि 308000 रुपये 21 सितंबर 2024 को जमा कर दिया. जांच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिला मत्स्य पदाधिकारी के पत्रांक 955, 05 अगस्त 2024, पत्रांक 218, 20 फरवरी 2025 के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि उक्त चुनाव के समय पूर्व मंत्री रीता कुमारी पर बकाया था. जिला मत्स्य पदाधिकारी के पत्रांक 1099, 27 अगस्त 2024 में इस बात का उल्लेख किया गया है कि बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम 2006 की धारा 2 के कंडिका (VI) के अनुसार पति-पत्नी, अवयस्क बच्चे व अविवाहित पुत्री को परिवार माना गया है, ऐसे में समिति उपविधि के धारा 9(1) की कंडिका (ग) में विनिर्दिष्ट प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है ऐसे कार्य के लिए जुर्माना, निलंबन तथा निष्कासन का प्रावधान है. ऐसी स्थिति में कामेश्वर प्रसाद का नामांकन सही प्रतीक नहीं हो रहा है. अब सवाल यह उठता है कि यह सब कुछ जानते हुए भी समिति चुनाव में नामांकन करने से लेकर निर्वाचित होने तक का सफर कैसे तय हुआ? आज इस जांच रिपोर्ट ने मत्स्य जीवी सहयोग समिति के पारदर्शी चुनाव को तार-तार करते हुए निष्पक्ष चुनाव पर कई प्रश्न चिह्न लगाती नजर आ रही है.
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