होटलों और फुटपाथ पर खाद्य सामग्री बेचनेवालों के लिए अब कोयला बनने लगा सहारा

Published by : VIKASH KUMAR Updated At : 04 Apr 2026 3:42 PM

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कैमूर में व्यावसायिक गैस की किल्लत से जायका हुआ फीका, मेनू से पसंदीदा व्यंजन गायब

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कैमूर में व्यावसायिक गैस की किल्लत से जायका हुआ फीका, मेनू से पसंदीदा व्यंजन गायब पीएनजी पाइपलाइन का इंतजार बरकरार, छोटे दुकानदारों के सामने पेट पालने का संकट भभुआ सदर. व्यावसायिक रसोई गैस सिलिंडर की कमी का असर अब कैमूर जैसे छोटे जिले के होटल, ढाबों व स्ट्रीट फूड कारोबार पर साफ दिखने लगा है. गैस की अनिश्चित आपूर्ति के चलते कारोबारियों ने वैकल्पिक इंतजाम शुरू कर किये हैं. कई होटल संचालक कोयले व इलेक्ट्रिक इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं, जबकि कुछ होटलों में लोकप्रिय व्यंजन मेनू से गायब हो गये हैं. होटल संचालक अजय आर्य ने बताया कि कॉमर्शियल गैस की बहुत किल्लत है, जिसके चलते फ्राई करने वाले खानों का मेनू फिलहाल बंद करना पड़ा है. होटल चलाने के लिए ग्राहकों को सादा भोजन परोसा जा रहा है. उधर, गैस की किल्लत से ठेलों पर छोले-भटूरे बनना बंद हो गया है, जबकि गोलगप्पे व आलू टिकिया बेचने वालों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. एकता चौक पर गोलगप्पे व छोले का ठेला लगाने वाले प्रभात आर्य ने बताया कि वर्षों से वह यह कारोबार कर रहे हैं, लेकिन व्यावसायिक सिलिंडर नहीं मिलने से फिलहाल ठेला बंद करना पड़ा है. गैस की किल्लत से कई चाट-पकौड़ी व चाय की दुकानें कोयले के चूल्हे पर शिफ्ट हो गयी हैं. स्टेडियम मोड़ पर चाट-पकौड़ी की दुकान चलाने वाले हरिशंकर ने बताया कि कॉमर्शियल गैस नहीं मिलने के चलते बीस दिन से कोयले से काम चलाना पड़ रहा है, आखिर पेट व परिवार के लिए धंधा तो करना ही है. किराना व्यवसायी संघ के अध्यक्ष ददन प्रसाद जायसवाल का कहना था कि युद्ध से अभी किराना का व्यवसाय प्रभावित नहीं हुआ है, हालांकि बाहर से कुछ सामान मंगाने में लागत बढ़ गयी है. लेकिन स्थिति अभी सामान्य है. उधर, जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से सदर अस्पताल आदि में जीविका की ओर से चलायी जा रही कैंटीन में गैस उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जीविका की कैंटीन में भी मेनू अनुसार कई भोजन गायब हैं. गैस की किल्लत की वजह से फिलहाल जीविका की कैंटीन में साधारण खाना ही परोसा जा रहा है. उधर जिले में पीएनजी की स्थिति अभी शैशवावस्था से आगे नहीं बढ़ सकी है. भभुआ जिला मुख्यालय व मोहनिया अनुमंडल में तो अभी तक पूरी तरह से पीएनजी की पाइप लाइन ही नहीं बिछी है, कनेक्शन तो दूर की बात है. इस समस्या के कारण नये कनेक्शन की उम्मीद भी फिलहाल नजर नहीं आ रही है.

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