कैमूर में बारिश आते ही विषधरों का खौफ, किशोर-महिला सहित सात लोगों को सांप ने काटा
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Bihar News: कैमूर जिले के पहाड़ी जंगली व ग्रामीण इलाकों में सांपों के बिल मानव बस्तियों के आसपास होते हैं. इसलिए यहां सर्पदंश का सबसे अधिक हमला भी उन्हीं पर होता है.
Bihar News: कैमूर जिले में बारिश का सीजन आते ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगती है. बुधवार को एक ही दिन सांप के काटने से अक्रांत हो गये. इसमें 14 वर्षीय किशोर व किशोरी सहित सात लोगों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. सर्पदंश के शिकार लोगों में नेवरास गांव निवासी प्रिंस कुमार, भगवानपुर थानाक्षेत्र के अवसान गांव निवासी कोमल सिंह की बेटी 14 वर्षीया खुशी कुमारी, रूपपुर गांव निवासी शिववचन सिंह, नुआंव निवासी अंकित सिंह, विशनपुरा गांव निवासी जितेंद्र सिंह, शहर के वार्ड संख्या 14 निवासी रजनीश रावत और भभुआ थाना क्षेत्र के कबार गांव की रहनेवाली शंभू पासवान की पत्नी सरिता देवी की हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दरअसल हर साल बरसात के मौसम में सांप और बिच्छुओं सहित अन्य जहरीले कीटों का हमला इंसानों पर होता ही रहता है.
बरसात में बढ़ जाती है जहरीले जंतुओं के काटने की घटना
शहरी इलाकों में सांप और बिच्छू भले ही कम निकलते हों, लेकिन, सांप, बिच्छु सहित अन्य कीट कैमूर जिले के पहाड़ी जंगली व ग्रामीण इलाकों में सांपों के बिल मानव बस्तियों के आसपास होते हैं. इसलिए यहां सर्पदंश का सबसे अधिक हमला भी उन्हीं पर होता है. इसके अलावा बारिश के दिनों में सांप, बिच्छू से लेकर तमाम जहरीले जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं. ऐसे में जरूरत है, तो शुरू हो चुके बरसात के इस मौसम में सावधानी बरतने की. दरअसल, बारिश के महीनों में पानी भरने के चलते चूहे बिलों से बाहर निकल आते हैं, जिनकी तलाश में सांप और सक्रिय हो जाते हैं.
सांप काट ले, तो तुरंत पहुंचे अस्पताल
पशु रोग विशेषज्ञ नंदजी उपाध्याय ने बताया कि सर्पदंश के बाद व्यक्ति को भागना नहीं चाहिए. क्योंकि इससे रक्त का संचार बढ़ने से जहर तेजी से शरीर में फैलने लगता है. सांप के काटने के बाद व्यक्ति को तत्काल बैठ जाना चाहिए और सर्पदंश के स्थान को पोटेशियम परमैग्नेट या लाल दवा के पानी अथवा साबुन से खूब धोना चाहिए. इसके बाद सर्पदंश के स्थान से दो इंच ऊपर कपड़े की पट्टी अथवा रस्सी कसकर बांध दें. इसके साथ ही पट्टी इतना टाइट भी नहीं बांधना चाहिए. इससे खून का प्रवाह ही पूरी तरह बंद जाये. इसके तत्काल बाद उसे सदर अस्पताल या डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए. जहां एंटी स्नेक वेनम के अतिरिक्त सांस और दिल के सहायता संबंधी उपकरण उपलब्ध हों. वहीं, इस मामले में झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने से जान भी गंवानी पड़ सकती है.
सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है वैक्सीन
सिविल सर्जन डॉ चंदेश्वरी रजक ने बताया कि सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल मोहनिया, रेफरल अस्पताल रामगढ़ के अलावा सभी पीएचसी में एंटी स्नैक वेनम वैक्सीन उपलब्ध करायी जा चुकी है. वैसे, भी सांप काटने पर लोगों को झाड़ फूंक कराने की जगह मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए.
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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