मुख्य पार्षद के पद से हटाये जाने के बाद विकास तिवारी पर अब दर्ज हुआ केस

=सरकारी अधिवक्ता की सलाह व डीएम के निर्देश पर इओ ने नगर थाने में दर्ज करायी प्राथमिकी
फोटो.24 नगर पर्षद कार्यालय =सरकारी अधिवक्ता की सलाह व डीएम के निर्देश पर इओ ने नगर थाने में दर्ज करायी प्राथमिकी =28 अप्रैल को दो से अधिक बच्चे होने के साक्ष्य छुपाने पर निर्वाचन आयोग ने मुख्य पार्षद को किया था पदमुक्त भभुआ सदर. दो से अधिक बच्चे होने का साक्ष्य छिपाने और झूठा शपथ पत्र दाखिल किये जाने को लेकर पिछले 28 अप्रैल को बिहार निर्वाचन आयोग द्वारा पदमुक्त किये गये भभुआ नगर पर्षद के सभापति रहे विकास तिवारी उर्फ बबलू तिवारी पर सरकारी अधिवक्ता के कानूनी सलाह और जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह के निर्देश पर नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी संजय उपाध्याय ने भभुआ नगर थाने में केस दर्ज कराया है. पूर्व सभापति पर दर्ज करायी प्राथमिकी में इओ ने बताया कि निर्वाचन आयोग के वाद संख्या 25/2025 के संदर्भ में एक निर्णय पारित किया गया, जिसमें मुख्य पार्षद नगर पर्षद भभुआ को पदमुक्त कर दिया गया है और झूठा शपथ पत्र देने के आलोक में बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 धारा 447 (ख) के तहत कार्रवाई करने का निर्देश निर्वाचन आयोग द्वारा दिया गया है. इसके आलोक में जिला पदाधिकारी द्वारा उन्हें प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर निर्देशित किया गया है. इओ ने इस मामले में मुख्य पार्षद विकास तिवारी उर्फ बबलू तिवारी पिता नरेंद्र तिवारी वार्ड संख्या-21 के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की अपील की है. थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने कार्यपालक पदाधिकारी के दिये आवेदन पर मुख्य पार्षद विकास तिवारी के खिलाफ विभिन्न सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है. गौरतलब है कि नगर पर्षद के पूर्व मुख्य पार्षद जैनेंद्र आर्य की शिकायत पर दो से अधिक बच्चे होने का साक्ष्य छुपाने व झूठा शपथ-पत्र दाखिल करने पर राज्य निर्वाचन आयोग बिहार द्वारा 28 अप्रैल 2026 को मुख्य पार्षद रहे विकास तिवारी उर्फ बबलू तिवारी को पद से हटा दिया था. पद से हटाये जाने के बाद इस मामले में जिलाधिकारी स्तर से सरकारी अधिवक्ता शीलनिधि श्रीवास्तव से विधिक परामर्श ली गयी थी. सरकारी अधिवक्ता शीलनिधि श्रीवास्तव ने भी पांच मई 2026 को प्रतिवेदित किया कि मुख्य पार्षद विकास तिवारी उर्फ बबलू तिवारी द्वारा सभी तथ्यों को छुपाकर गलत सूचना व तथ्य दर्ज कर नगरपालिका चुनाव में भाग लिया गया और वह सफल भी रहे. विकास तिवारी के विरुद्ध बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 447 (ख) व भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 216, 236, 237 व अन्य सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराये जाने का परामर्श दिया गया है.
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