पॉश मशीन से लेनदेन की राह में टैक्स बना रोड़ा

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समस्या. शहर में कैशलेश व्यवस्था में नहीं आ रही तेजी बैंकों में पड़े 64 आवेदन, मशीन मिली सिर्फ 15 को पॉश मशीन लेने से कतरा रहे दुकानदार भभुआ नगर : नोटबंदी से सफलता पूर्वक निबटने के बाद सरकार ने कैशलेश व्यवस्था में अपनी ताकत झोंक दी. हालांकि, सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद व्यावसायिक लेनदेन […]

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समस्या. शहर में कैशलेश व्यवस्था में नहीं आ रही तेजी

बैंकों में पड़े 64 आवेदन, मशीन मिली सिर्फ 15 को
पॉश मशीन लेने से कतरा रहे दुकानदार
भभुआ नगर : नोटबंदी से सफलता पूर्वक निबटने के बाद सरकार ने कैशलेश व्यवस्था में अपनी ताकत झोंक दी. हालांकि, सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद व्यावसायिक लेनदेन में कैशलेश सिस्टम में तेजी नहीं आ रही है. आंकड़े बताते हैं कि अभी भी शहर में 90 प्रतिशत लेनदेन नकदी हो रहे हैं. हालांकि, बिजली बिल व बीमा प्रीमियम आदि में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पहले की अपेक्षा ज्यादा हो रहे है. कैशलेश लेनदेन के लिए पॉस मशीन के साथ अन्य माध्यमों को अपनाने की सलाह दी जा रही है, परंतु व्यवसायी पॉस मशीन लेने से कतरा रहे हैं. जो लोग मशीन के लिए बैंकों में आवेदन दिये हैं उन्हें भी मशीन नहीं मिल पा रही है.
जिले में एक अनुमान के मुताबिक 95 फीसदी दुकानदारों के पास पॉस मशीन नहीं है. दुकानदार इसके पीछे ट्रांजेक्सन टैक्स को वजह बता रहे है. कई दुकानदार जहां नकदी लेनदेन को ही तरजीह दे रहे हैं, तो कई दुकानदार कैशलेश लेनदेन को अच्छा भी बता रहे हैं.
टैक्स ने फंसाया पेच
एलडीएम रत्नाकर झा ने बताया कि नोटबंदी के बाद से अब तक पॉश मशीन लेने के लिए कुल 64 आवेदन आये हैं. इनमें 15 लोगों को मशीनें उपलब्ध करा दी गयी हैं. कंपनी द्वारा ससमय पॉश मशीने उपलब्ध नहीं कराये जाने से कुछ दिक्कतें आ रही हैं. उन्होंने इतने कम आवेदन आने को ले अपनी चिंता जतायी है. प्रावधानों की बात करे तो दुकानदारों को इसके लिए 350 रुपये सालाना के अलावा प्रत्येक लेन देन पर अतिरिक्त टैक्स देना होता है. इसमें ढ़ाई हजार से अधिक के ट्रांजेक्सन पर 1.25 व ढाई हजार से नीचे प्रत्येक ट्राजेक्सन पर 0.5 फीसदी भुगतान करना होता है. यह राशी दुकानदार के खाते से सीधे काट ली जाती है.
क्या है पॉश मशीन
यह सीम कार्ड के माध्यम से चलानेवाली एक बेहद छोटी सी मशीन है, जो बैंक के सरवर से जुड़ा होता है. जिस व्यक्ति से पैसे लेने होते हैं उनके एटीएम कार्ड मशीन में स्वाइप कर रकम भरते ही एक खाते से दूसरे खाते में पैसा स्वत: चला जाता है. इसमें नकदी भुगतान की कोई जरूरत नहीं होती है. छोटा जिला होने की वजह से भभुआ शहर सहित ग्रामीण इलाकों में चल रही दुकानों में पॉश मशीन नहीं के बराबर है. जबकि, सरकार ने इसके प्रचार-प्रसार के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है. पीडीएस दुकानों में भी पॉश मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. लेकिन, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बहुत कम ही इस मशीन का प्रयोग हो रहा है.
बोले दुकानदार
सरकार की कैशलेश मुहिम का स्वागत करते हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया कारोबारियों के हित में नहीं बनायी गयी. सबसे बड़ी समस्या प्रत्येक लेनदेन पर लिये जाने वाले टैक्स को बताया है. इसके तहत प्रत्येक लेनदेन के बाद बैंक इनसे अतिरिक्त टैक्स की वसूली करता है. कंपटीशन के बाजार में एक से दो प्रतिशत के मुनाफे पर धंधा चलाता है. ऐसे में पॉश मशीन से लेनदेन करने पर उसका एक से ढाई फीसदी जब टैक्स ही चला जायेगा, तो हमें क्या मिलेगा.
मोहम्मद अखतर अंसारी
महीनों पहले आवेदन दिये जाने के बावजूद उन्हें अब तक पॉश मशीन उपलब्ध नहीं करायी गयी. बैंक का चक्कर लगाते थक गये, पर अब तक मशीन नहीं मिली. अब तो बैंक जाना भी छोड़ दिये हैं.
राजेंद्र कुमार
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