2014 का नियम बदला, बिहार में गलत दाखिल-खारिज कराने वालों की खैर नहीं, विभाग ने जारी किया कड़ा आदेश
सांकेतिक फोटो
Bihar Land Mutation New Rules: बिहार में सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए दाखिल-खारिज के हर मामले में रिकॉर्ड मिलान अनिवार्य कर दिया गया है. डीएम को 10 एकड़ तक सरकारी या गैरमजरूआ आम जमीन मुफ्त ट्रांसफर करने का अधिकार मिला है. इससे गलत जमाबंदी पर रोक और विकास योजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज होगी.
Bihar Land Mutation New Rules: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य में सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं से बचाने और कागजातों को दुरुस्त रखने के लिए सभी डीएम को सख्त निर्देश जारी किया है. विभाग ने साफ कहा है कि अब म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज के हर एक मामले में सरकारी भूमि वाली जमाबंदियों की जांच और मिलान करना बिल्कुल अनिवार्य होगा.
विभाग की समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि कई ब्लॉक में दाखिल-खारिज के समय बिहार भूमि पोर्टल पर दर्ज सरकारी जमीन की लिस्ट को चेक ही नहीं किया जा रहा है. इससे सरकारी जमीन की गलत जमाबंदी किसी और के नाम पर दर्ज होने का बड़ा खतरा बना रहता है. अब अंचल अधिकारियों (CO) को हर आवेदन के निपटारे से पहले इस लिस्ट से मिलान करना ही होगा, जिससे अवैध कब्जों और फर्जी दावों पर पूरी तरह लगाम लगेगी.
अब डीएम खुद कर सकेंगे 10 एकड़ तक सरकारी जमीन का मुफ्त ट्रांसफर
राज्य सरकार ने सरकारी जमीन को एक विभाग से दूसरे विभाग में मुफ्त भेजने की प्रक्रिया को बेहद आसान और तेज बना दिया है. नए फैसले के तहत अब जिलाधिकारियों को 10 एकड़ तक की सरकारी या गैरमजरूआ आम जमीन को ट्रांसफर करने की सीधी पावर दे दी गई है. अगर जमीन 10 एकड़ से ज्यादा और 20 एकड़ तक है, तो इसका अधिकार प्रमंडलीय आयुक्तों के पास होगा.
20 एकड़ से अधिक की सरकारी जमीन के ट्रांसफर के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी. राजस्व विभाग ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिया है.
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बदला गया साल 2014 का पुराना नियम
विभाग के सचिव जय सिंह के मुताबिक, नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान यह देखा गया था कि अस्पताल, सड़क, स्कूल और पेयजल जैसी छोटी और जनहित की योजनाओं के लिए जमीन ट्रांसफर की जो पुरानी व्यवस्था थी, उसमें बहुत ज्यादा समय लग रहा था. इस देरी की वजह से विकास के काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे थे.
इसी रुकावट को दूर करने के लिए सरकार ने साल 2014 के पुराने नियमों को बदल दिया है. साल 2014 के नियम के तहत डीएम को सिर्फ तीन एकड़ तक और प्रमंडलीय आयुक्त को तीन से पांच एकड़ तक ही जमीन ट्रांसफर करने का हक था, जिसे अब सरकार ने काफी ज्यादा बढ़ा दिया है ताकि जनता से जुड़े विकास कार्य बिना किसी देरी के फटाफट पूरे हो सकें.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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