भरत तिवारी एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील, CBI या SIT जांच कराने की उठी मांग
मृत भरत तिवारी, सुप्रीम कोर्ट
Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर के भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की गई है. वकील नरेंद्र मिश्रा ने CBI या SIT जांच, FIR दर्ज करने और वीडियो समेत सभी सबूत सुरक्षित रखने की अपील की है. बिहार सरकार पहले ही हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच का आदेश दे चुकी है.
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर का विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की गई है. वकील नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर इस अर्जी में अपील की गई है कि कोर्ट की निगरानी में इस पूरी घटना की स्वतंत्र जांच कराई जाए और पुलिस मुठभेड़ों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए.
सीबीआई या एसआईटी से जांच की अपील
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में सुझाव दिया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल के लिए सीबीआई या एक एसआईटी का गठन किया जाए. मांग में कहा गया है कि 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई इस घटना ने कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
याचिका में मांग की गई है कि घटना से जुड़े सभी वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, पुलिस की बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस बातचीत और फोरेंसिक सबूतों को तुरंत सुरक्षित किया जाए. साथ ही एनएचआरसी और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग को भी अलग से जांच के निर्देश देने और गवाहों को सुरक्षा देने की गुहार लगाई गई है.

सरेंडर के बाद गोली मारने का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि मृतक के परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी नीचे फेंक दिया था. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो भी इसी तरफ इशारा करते हैं कि गोली चलते वक्त तिवारी निहत्थे थे और यह कोई वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग थी.
याचिका में कहा गया है कि भरत तिवारी का कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं था और वे एक ग्रेजुएट थे जो सोशल मीडिया के जरिए बाढ़, कटाव और जनता की समस्याएं उठाते थे. ऐसे में उन पर जानलेवा बल का प्रयोग भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है, इसलिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर इसी धारा में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए.
सरकार ने बनाई न्यायिक जांच कमेटीस
इस विवाद और राजनीतिक दबाव के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को ही हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की देखरेख में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने का आदेश दे दिया है. लेकिन, इस मामले पर सत्ताधारी गठबंधन के अपने ही नेता पुलिस को घेर रहे हैं.
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि वायरल वीडियो ने मुठभेड़ पर गंभीर शक पैदा किया है और सिर्फ चार पुलिसवालों को सस्पेंड करना काफी नहीं है, बल्कि दोषियों पर समय सीमा के अंदर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
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अश्विनी चौबे और सांसद सुदामा प्रसाद ने भी उठाए गंभीर सवाल
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने भी पुलिस पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब भरत तिवारी निहत्थे थे और सरेंडर कर चुके थे, तो उन पर गोली क्यों चलाई गई. आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने भी इस मुठभेड़ को पूरी तरह संदिग्ध बताया है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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