किसान की बेटी ने रचा इतिहास, बीपीएससी में आई 8वीं रैंक, BDO से अब बनेंगी SDM

Edited by Suryakant Kumar
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70वीं BPSC परीक्षा में 8वीं रैंक हासिल करने वाली चंद्रकांता कुमारी

BPSC 70th Success Story : कैमूर जिले के नुआंव प्रखंड की रहने वाली चंद्रकांता कुमारी ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में पूरे राज्य में 8वीं रैंक हासिल की है. वे अब एसडीएम बनेंगी.

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नुआव से संजय जायसवाल की रिपोर्ट
BPSC 70th Success Story :
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में कैमूर जिले के नुआंव प्रखंड के गर्रा गांव की बेटी चंद्रकांता कुमारी ने इतिहास रच दिया है. चंद्रकांता ने पूरे बिहार में 8वीं रैंक (आठवां स्थान) हासिल कर अपने जिले और राज्य का नाम रोशन किया है. वर्तमान में वे सीतामढ़ी में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के पद पर काम कर रही हैं.

इस शानदार रैंक के बाद अब उनका अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) बनना पूरी तरह तय है. रिजल्ट आते ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है.

सासाराम, अरवल से सीतामढ़ी तक का सफर; दिल्ली में रहकर की थी तैयारी

चंद्रकांता कुमारी की प्रारंभिक पढ़ाई गांव के माहौल में ही हुई थी. इसके बाद वे सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं, जहां उन्होंने दो साल तक रहकर कड़ी मेहनत की. उनकी इस मेहनत का नतीजा यह रहा कि वे पहले बीडीओ के रूप में चुनी गईं और अब उन्होंने बीपीएससी में राज्य स्तर पर टॉप-10 में जगह बनाई है. बीडीओ बनने के बाद उनकी ट्रेनिंग (प्रशिक्षण अवधि) सासाराम में हुई थी, जबकि उनकी पहली पोस्टिंग अरवल जिले में हुई थी. फिलहाल वे सीतामढ़ी में अपनी सेवा दे रही हैं.

Kaimur News : पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी

चंद्रकांता कुमारी अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. उनके पिता बब्बन सिंह कुशवाहा एक छोटे किसान हैं और माता फूलमती देवी एक गृहिणी (हाउसवाइफ) हैं. उनका परिवार आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं था, लेकिन चंद्रकांता की लगन के आगे चुनौतियां हार गईं. उनके बड़े भाई शशिकांत सिंह बैंकिंग सेवा में हैं और बक्सर जिले के तियरा में तैनात हैं.

वहीं, उनके दूसरे भाई रविकांत सिंह नुआंव बाजार में ही किताब-कॉपी की दुकान चलाते हैं. इस साधारण परिवार से निकलकर चंद्रकांता ने जो मुकाम हासिल किया है, उसने सीमित संसाधनों में जीने वाले हर युवा को हौसला दिया है.

क्षेत्र की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

चंद्रकांता की इस ऐतिहासिक सफलता से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा कैमूर जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि चंद्रकांता ने गांव की बेटियों और युवाओं के सामने सफलता का एक नया और बेहतरीन उदाहरण पेश किया है. उनकी यह बड़ी कामयाबी समाज को संदेश देती है कि अगर मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम करने का जज्बा हो, तो किसी भी बड़े से बड़े लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है.

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Suryakant Kumar

लेखक के बारे में

By Suryakant Kumar

सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे गया, औरंगाबाद, कैमूर और बक्सर जिलों से जुड़ी हाइपरलोकल खबरों, शिक्षा, रोजगार, प्रशासनिक गतिविधियों और जनसरोकार के विषयों पर समाचार लेखन का कार्य कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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