कैमूर : गैस सिलिंडर में लगी आग, पत्नी की मौत, पति झुलसा
Updated at : 05 Dec 2019 9:40 AM (IST)
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भभुआ सदर (कैमूर) : भभुआ थाना क्षेत्र के मचियांव गांव में मंगलवार की रात करीब 10 बजे खाना बनाने के दौरान गैस सिलिंडर में रिसाव से लगी आग में एक 30 वर्षीय महिला की मौत हो गयी, जबकि उसे बचाने में पति भी झुलस गया. कोई मदद नहीं मिलने से बुरी तरह झुलसा दंपती छह […]
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भभुआ सदर (कैमूर) : भभुआ थाना क्षेत्र के मचियांव गांव में मंगलवार की रात करीब 10 बजे खाना बनाने के दौरान गैस सिलिंडर में रिसाव से लगी आग में एक 30 वर्षीय महिला की मौत हो गयी, जबकि उसे बचाने में पति भी झुलस गया. कोई मदद नहीं मिलने से बुरी तरह झुलसा दंपती छह घंटे तक पड़ा रहा. बाद में गंभीर रूप से झुलसे पति-पत्नी को मोहनिया स्थित एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया, जहां महिला ने दम तोड़ दिया. पति का इलाज जारी है. मृतका मचियांव निवासी कृष्णा राम की पत्नी रेखा देवी बतायी जाती है.
जानकारी के अनुसार, रेखा देवी रात में गैस चूल्हे पर खाना बना रही थी और उसका दो वर्षीय बेटा पौलुष वहीं खेल रहा था. महिला के पति और वृद्ध ससुर घर के बाहर बैठे हुए थे. सिलिंडर में अचानक लीकेज से आग लग गयी, जिसे बुझाने में महिला भी उसकी चपेट में आ गयी. महिला के चिल्लाने पर बाहर दरवाजे पर बैठे पति उसे बचाने आये और सबसे पहले आग से घिरे अपने बेटे को उठा कर बाहर फेंका. इतने में आग की चपेट में आयी महिला जान बचाने के लिए अपने पति से ही लिपट गयी, जिससे दोनों बुरी तरह से झुलस गये.
घटना की सूचना पर गांव के कुछ लोग दौड़े, लेकिन दोनों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने की जगह लोग महिला के मायके में सूचना देकर अपने घर के लिए निकल लिये. इधर, सूचना मिलने पर बक्सर जिले के राजपुर थानांतर्गत शायर डिहरी से महिला के मायके से उसके दो भाई दयानंद राम और लक्ष्मीकांत बुधवार सुबह चार बजे मचियांव गांव पहुंचे. उसके बाद आग से झुलस कर नि:सहाय पड़े दोनों पति-पत्नी को इलाज के लिए मोहनिया स्थित एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया. इलाज के क्रम में आग से झुलसी महिला ने सुबह 11 बजे दम तोड़ दिया.
पति का गंभीरवस्था में इलाज जारी है. महिला की मौत के बाद पोस्टमार्टम के लिए उसे सदर अस्पताल लाया गया. शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया. बेटे को बाहर फेंकने से वह बाल-बाल बच गया. पत्नी को बचाने में झुलसा कृष्णा राम मजदूर है और समीप के ही एक राइस मिल में मजदूरी करता है.
गांववाले मदद करते, तो बच सकती थी महिला की जान
महिला के शव का पोस्टमार्टम कराने आये दोनों भाइयों का कहना था कि अगर उसकी बहन को समय से चिकित्सीय सुविधा मिल जाती, तो शायद उसकी जान बच जाती. लेकिन, गांव के लोगों ने कोई मदद नहीं की. सुबह चार बजे वे लोग घटनास्थल पहुंचे, तो दोनों पति-पत्नी को मोहनिया लाकर अस्पताल में भर्ती कराया. लेकिन, बहन को नहीं बचा सके.
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