आभूषण व्यवसायियों से रुपये लूटनेवाला जालसाज गिरफ्तार
Updated at : 30 Aug 2019 8:23 AM (IST)
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भभुआ : चांद थाना क्षेत्र के खरौली गांव से बुधवार को बरामद किये गये नकली सिक्का व साढे सात लाख के जाली नोट मामले में पुलिस ने खरौली के ही आशिक नामक जालसाज को गिरफ्तार किया है. इसको लेकर कैमूर एसपी दिलनवाज अहमद ने मोहनिया थाने में प्रेसवार्ता कर बताया कि उत्तर प्रदेश के दो […]
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भभुआ : चांद थाना क्षेत्र के खरौली गांव से बुधवार को बरामद किये गये नकली सिक्का व साढे सात लाख के जाली नोट मामले में पुलिस ने खरौली के ही आशिक नामक जालसाज को गिरफ्तार किया है.
इसको लेकर कैमूर एसपी दिलनवाज अहमद ने मोहनिया थाने में प्रेसवार्ता कर बताया कि उत्तर प्रदेश के दो व्यवसायी भरत जायसवाल एवं अरमान शाह की सूचना पर चांद थाने के खरौली गांव में छापेमारी की गयी थी. इसमें चांदी के ब्रिटिशकालीन सिक्के एवं साढ़े सात लाख के जाली नोट बरामद किये गये थे.
इसी क्रम में चांदी का सिक्का दिखा कर ठगी करनेवाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया गया था. लेकिन, उक्त मामले में बुधवार को किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी. उसी मामले में गुरुवार को छापेमारी की गयी, तो जिसकी झोंपड़ी से सिक्के एवं जाली नोट बरामद किये गये थे. उस आशिक नामक युवक को गिरफ्तार किया गया है.
पुलिसिया पूछताछ में अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए उसने बताया कि इस गिरोह में कुल 20 लोग शामिल हैं, जिनमें तहसिब धोबी, पिंटू गिरि, संजय धोबी, मनोज राम मुख्य सरगना हैं.
जो लोगों को सिक्का को लोभ दिखा कर फंसा कर लाते थे और फिर उनसे लूटपाट करते थे.
कैसे करते थे जालसाजी
दरअसल गिरोह के सदस्य अपने पास रखे हुए चांदी के पुराने सिक्का को लेकर व्यापारियों के पास जाते थे और उन्हें बाजार मूल्य से काफी कम कीमत में पुराने ब्रिटिश काल के चांदी का सिक्का देने की बात कह उन्हें जाल में फंसाते थे.
और फिर उन्हें बड़ी संख्या में चांदी का सिक्का देने की बात कह पैसा लेकर चांद थाना क्षेत्र में कैमूर पहाड़ी के पास स्थित खरौली गांव में बुलाते थे और फिर उक्त व्यापारी लालच में पड़ कर पैसा लेकर खरौली गांव चांदी का सिक्का लेने पहुंचता था, तो गिरोह के सदस्य हथियार दिखा मारपीट कर उसके पास मौजूद रुपये लूट लेते थे.
असली नोट समझ पैसे छीन लिये
दरअसल, गिरफ्तार आशिक नामक युवक की जिस झोंपड़ी से सिक्का और जाली नोट बरामद किया गया है, उसने पुलिस को बताया है उसे पता भी नहीं है कि जो नोट उसके यहां से मिला है वह जाली है. इसकी उसे जानकारी भी नहीं थी.
दरअसल चांदी का सिक्का दिखा कर जिस व्यापारी को जाल में फंसाया गया वह जाली नोट लेकर चांदी का सिक्का खरीदने आया था. हमलोग असली नोट समझ उससे वह पैसा छीन लिये, लेकिन वह हमलोगों को ठग कर चला गया यानी कुल मिला कर उक्त ठग गिरोह को एक अन्य ठग द्वारा जाली नोट देकर ठग दिया गया.
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