अवरैया की गलियों की नहीं बदली सूरत, लोग घर छोड़ बाहर रहने को विवश
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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न सड़क बनी न ही नाली लोग कीचड़ से होकर जाने को विवश जनप्रतिनिधियों व प्रशासन से मिला केवल आश्वासन दो हजार से अधिक आबादीवाले गांव के संपन्न लोग अपना घर छोड़ शहरों में रहने लगे मोहनिया शहर : किसी गांव में सड़क, नाली व स्कूल मुख्य रूप से विकास का पैमाना माना जाता है. […]
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न सड़क बनी न ही नाली लोग कीचड़ से होकर जाने को विवश
जनप्रतिनिधियों व प्रशासन से मिला केवल आश्वासन
दो हजार से अधिक आबादीवाले गांव के संपन्न लोग अपना घर छोड़ शहरों में रहने लगे
मोहनिया शहर : किसी गांव में सड़क, नाली व स्कूल मुख्य रूप से विकास का पैमाना माना जाता है. लेकिन, जिस गांव में आजादी के बाद अब तक सड़क व नाली न हो. लोग कीचड़ से होकर अपने गांव में आने-जाने को विवश हैं, तो यह साफ हो जाता है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासन व पंचायत के प्रतिनिधि विकास के प्रति कितने सचेत हैं. यह हाल मोहनिया अनुमंडल के कुदरा प्रखंड स्थित बहेरा पंचायत के अवरैया गांव का है. इस आधुनिक युग में भी यह गांव मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है. गांव की आबादी दो हजार से अधिक है. लेकिन, सड़क व नाली के अभाव में कई संपन्न लोग पुसौली या तो दूसरे शहरों में अपना घर बना कर रहते हैं.
यहां सड़क आजादी के बाद से बनी ही नहीं हैं. इस गंभीर समस्या को देखनेवाला कोई नहीं है. जबकि, गांव के बाहर में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत 40 लाख रुपये से गांव से लेकर पुसौली की मुख्य सड़क तक निर्माण किया गया है. लेकिन, अवरैया गांव की कई गलियां अब भी कीचड़ से पटा है. लोग बीडीओ से लेकर स्थानीय मुखिया, विधायक से कहते-कहते थक गये हैं. लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हुई. इससे लोग चिंतित हैं.
गांव के विकास के नाम पर वोट मांग करते हैं छलावा : अवरैया की बदहाली पर गांव के लोगों कहते हैं कि चुनाव के दौरान इस गांव में जनप्रतिनिधि विकास के नाम पर वोट मांगते हैं और जीतने के बाद इस गांव के विकास के साथ छलावा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं. गांव में नाली, गली, पानी, लाइट का घोर अभाव है. इस संबंध में बबन सिंह, सोनू कुमार ने बताया कि हमारे घर के आगे ही गली में घुटना भर पानी जमा रहता है. इससे असहनीय दुर्गंध निकलती है. बड़ी बीमारी की आशंका बरकरार रहती है. जनप्रतिनिधि चुनाव के समय केवल दोनों हाथ जोड़ वोट मांगने के लिए आते हैं. गांव का कल्याण करने के लिए नहीं और चुनाव जीतने के बाद इन जनप्रतिनिधियों का वादा कहां गया, ये जनप्रतिनिधि ही बता सकते हैं. गांव के विकास में स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी नगण्य है.
जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से आक्रोश
सरकार द्वारा योजना से गांव-गांव में विकास की गंगा बहा रही है. ताकि, उसका देश, राज्य, जिला, गांव विकसित हो सके. गांव के विकास के लिए जनता जनप्रतिनिधियों को चुनती है. ताकि, सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार गांव का विकास कर सके. मगर, यहां जनप्रतिनिधि की लापरवाही के कारण सरकार की योजनाओं से ग्रामीण अछूते हैं. इन जनप्रतिनिधियों की लापरवाही अवरैया गांव में साफ झलक रही है. अवरैया गांव के गलियां चिल्ला-चिल्ला कर कर रही है कि यह गांव विकास से कोसों दूर है. यहां के अधिकारी, जनप्रतिनिधि गांव के विकास के लिए कोई रुचि नहीं रखते हैं. अवरैया गांव के ग्रामीणों को किस कदर परेशानी होती होगी.
यह तस्वीर बयां कर रही है. गांव में यदि बाइक से जाना होगा, तो कई घरों तक लोग बाइक से नहीं पहुंच सकेंगे. दोचक्का तो दूर लोगों को पैदल चलने के लिए हाथ में चप्पल लेकर घरों तक जाते है. इतना ही सड़क की दुर्दशा देख आजिज होकर जो संपन्न लोग हैं, वह पुसौली या तो दूसरे शहर में अपना मकान बना कर रहते हैं. जबकि, मुखिया रमेश सिंह का कहना है कि अब वार्ड का चयन कर मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना से कार्य कराया जा रहा है. पहले से सड़क नहीं बनी थी. अब सर्वे कर बनवायी जा रही है.
शराब की सूचना पर पुसौली में पुलिस ने की छापेमारी नहीं पकड़ाया धंधेबाज
बोले थानाध्यक्ष
इस संबंध में थानाध्यक्ष राजीव रंजन ने बताया शराब की बड़ी खेप ट्रेन से पुसौली के युवक के आने की सूचना मिली. सूचना पर टीम बना कर सिविल में पुलिस तैनात थी. लेकिन, शराब धंधेबाजों को जानकारी होने के कारण ट्रेन से नहीं आये. वैसे इस मामले में पुलिस को कुछ सुराग मिले हैं.
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