शहर में धुआं उगलते खटारा वाहनों पर नहीं लगी लगाम
बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए नहीं हो रहा कोई प्रयास हो रहीं कई गंभीर बीमारियां भभुआ नगर : पर्यावरण प्रदूषण के रोकथाम के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाये जाने से प्रदूषण लोगों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है. इसकी चपेट में आने से लोग गंभीर बीमारी के शिकार बनते जा रहे हैं. […]
बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए नहीं हो रहा कोई प्रयास हो रहीं कई गंभीर बीमारियां
भभुआ नगर : पर्यावरण प्रदूषण के रोकथाम के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाये जाने से प्रदूषण लोगों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है. इसकी चपेट में आने से लोग गंभीर बीमारी के शिकार बनते जा रहे हैं. आज तेजी से वायु, जल व ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. वायु प्रदूषण से लोग सांस, फेफड़े, चर्म, खून, आंख आदि संबंधित रोगों से ग्रसित हो रहे हैं. साथ ही सर्दी, खासी, सिरदर्द के भी शिकार हो रहे हैं. इसके अलावा वायु प्रदूषण से बहरापन, अनुवांशकीय और कैंसर संबंधित रोगों का खतरा बना रहता है. यह प्रदूषण शहर ही नहीं गांव तक भी पहुंच गया है.
इन प्रदूषण से आमलोग बेहाल हैं. सड़कों पर उड़ते घूलकण, वाहनों से निकलते हानिकारक धुएं, नदी और तालाबों में गंदे पानी का बहाव, अस्पतालों में बिखरे पड़े बॉयोमेडिकल वेस्ट, बजबजाती गंदगी से लोगों के लिए यह रोगों का सौगात होते जा रहा है.
सदर अस्पताल के डॉ सिद्धार्थ राज सिंह ने बताया कि प्रदूषण से लोग अधिक बीमार होते हैं. वातावरण में फैला प्रदूषण अब जानलेवा बन रहा है. शहर में ही खटारा वाहनों से निकलनेवाले काले धुएं लोगों को बीमार कर रहे हैं. लेकिन, ऐसे वाहनों के धर पकड़ के लिए प्रशासन द्वारा कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है. वहीं, लोग भी पर्यावरण प्रदूषण को लेकर ज्यादा सजग नजर नहीं आते.
प्रदूषण का प्रभाव जानकारों की माने तो वायु में अवांछित गैसों की उपस्थिति से जीवन पर खतरा उत्पन्न हो गया है. इसमें नाइट्रस, कार्बनडाईआक्साइड, ओजोन लेवेल की क्षति, गामा रेज आदि तत्वों से वायुमंडल को खतरा उत्पन्न हो गया है. प्रदूषण से लंग्स में निमोकोनिएसिस, डस्ट से सिलिकोसिस, न्युप्लास्टि, कार्सिनोमा, सर्दी खांसी, सिर दर्द, चिड़चिडापन आदि के लक्षण आ जाते हैं.
ध्वनि प्रदूषण रेल इंजन, हवाई जहाज, जेनेरेटर, टेलीफोन, टेलीविजन, वाहन, लाउडस्पीकर आदि से फैल रहा है. इसके कारण बहरापन, चिड़चिड़ापन, उच्च रक्तचाप, स्नायु, मनोवैज्ञानिक रोग बढ़ रहे हैं. निजी नर्सिंग होम, सरकारी अस्पताल और एक्सरे वाले परिसर में यह प्रदूषण फैलता है. इस प्रदूषण से आंख रोग, हृदय रोग, चर्म रोग, कैंसर आदि रोग से लोग पीड़ित हो जाते हैं.
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