कैशलेस व्यवस्था में बैंक ही अड़ंगा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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लेन-देन पर कमीशन भी कैशलेस व्यवस्था पर लगा रहा प्रश्नचिह्न भभुआ नगर : नोटबंदी को गुजरे हुए एक साल बीत गये. लेकिन, अब तक पूरे जिले में कैशलेस लेनदेन की प्रक्रिया पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पायी है. नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेस व्यवस्था में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. लेकिन, तमाम प्रयासों के […]
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लेन-देन पर कमीशन भी कैशलेस व्यवस्था पर लगा रहा प्रश्नचिह्न
भभुआ नगर : नोटबंदी को गुजरे हुए एक साल बीत गये. लेकिन, अब तक पूरे जिले में कैशलेस लेनदेन की प्रक्रिया पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पायी है. नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेस व्यवस्था में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. लेकिन, तमाम प्रयासों के बावजूद व्यावसायिक लेनदेन में कैशलेस सिस्टम अब भी नहीं के बराबर हो रहा है. भभुआ जैसे छोटे शहर में कैशलेस व्यवस्था दुकानदारों और ग्राहकों के लिए अब भी टेढ़ी खीर ही साबित हो रही है. कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए जहां बैंकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. लेकिन, बैंक भी इस मामले में फिसड्डी ही साबित हो रहे हैं.
नोटबंदी के बाद अब तक बैंकों के माध्यम से आवेदन किये हुए किसी भी व्यावसायिक को पॉस मशीन उपलब्ध नहीं करायी गयी. बैंक के आंकड़ें बताते हैं कि अभी भी 90 फीसदी लेनदेन नकदी ही हो रहा है. हालांकि, बिजली बिल व बीमा प्रीमियम आदि में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पहले की अपेक्षा ज्यादा हो रहे हैं.
लेकिन, बाजार की अर्थव्यवस्था नकद लेनदेन से ही आधारित है. जिले में कुछ चुनिंदा दुकानदारों व पेट्रोल पंपों पर ही पॉस मशीन उपलब्ध है. कई दुकानदार पॉस मशीन से जरिये लेनदेन को लेकर भी सजग नहीं हैं. या यूं कहे कि इसके पीछे ट्रांजेक्शन टैक्स भी एक बड़ी वजह है.
टैक्स में फंसाया पेच
नोटबंदी के बाद से अब तक पॉस मशीन के लिए जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक के पास कुल 40 आवेदन आये हैं. लेकिन, अब तक पॉस मशीन उपलब्ध करानेवाली एजेंसी और बैंकों की शिथिलता की वजह से किसी भी दुकानदार को अब तक पॉस मशीन उपलब्ध नहीं करायी गयी है.
पॉस मशीन की बात करें तो दुकानदारों को इसके लिए 350 रुपये सालाना के अलावे प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर अतिरिक्त कर देना पड़ता है, जिसमें ढाई हजार के अधिक के ट्रांजेक्शन पर 1.25 और ढाई हजार के नीचे प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर .5 फीसदी टैक्स का भुगतान करना होता है. यह राशि दुकानदारों के खाते से सीधे काट ली जाती है.
पॉस मशीन लेने से कतरा रहे दुकानदार
व्यवसायियों की माने तो कैशलेस मुहिम का वह स्वागत करते हैं. लेकिन, इसकी प्रक्रिया कारोबारियों के हित में नहीं बनायी गयी. सबसे बड़ी समस्या प्रत्येक लेनदेने के लिए टैक्स को बताया है, जिसके तहत प्रत्येक ट्रांजेक्शन के बाद बैंक उनसे अतिरिक्त भार की वसूली करता है.
व्यवसायी संजय कुमार ने बताया कि कंपटीशन के बाजार में एक से दो प्रतिशत के मुनाफे पर उनका धंधा चलता है. ऐसे में बैंक के नियमों के अनुसार पॉस मशीन से लेनदेन करने पर उसका एक से ढाई फीसदी बैंक के टैक्स में ही जब चला जायेगा, तो फिर उन्हें क्या मिलेगा. नोटबंदी के बाद जिन दुकानदारों ने बैंक में पॉस मशीन के लिए आवेदन किया है, वह भी अब आवेदन देकर भूल चुके हैं.
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