यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ हरनौत हादसे से भी सबक नहीं

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मोहनिया शहर : मोहनिया बस स्टैंड से तीन राज्यों के लिए बसें खुलती हैं, पर जिस हिसाब से सुविधाएं मिलनी चाहिए नहीं मिल रहीं. यहां से यूपी, झारखंड व पश्चिम बंगाल सहित राज्य के अन्य जगहों के लिए बसें खुलती हैं. रविवार को प्रभात खबर की टीम ने बसों में यात्रियों के लिए सुविधाओं की […]

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मोहनिया शहर : मोहनिया बस स्टैंड से तीन राज्यों के लिए बसें खुलती हैं, पर जिस हिसाब से सुविधाएं मिलनी चाहिए नहीं मिल रहीं. यहां से यूपी, झारखंड व पश्चिम बंगाल सहित राज्य के अन्य जगहों के लिए बसें खुलती हैं.
रविवार को प्रभात खबर की टीम ने बसों में यात्रियों के लिए सुविधाओं की पड़ताल की. पड़ताल के दौरान यह बात सामने आयी कि बसों में परिवहन विभाग के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. पड़ताल की गयी, तो किसी भी बस में अग्निशमन यंत्र नहीं मिला. साथ ही अधिकतर बसों में एक ही दरवाजा था. एक भी बस में किराये की सूची नहीं लगी थी. इसके अलावा ड्राइवर व कंडेक्टर बिना वरदी के ही बस चला रहे थे.
बगैर मानक दौड़ रहीं बसें: अनुमंडल में यात्री बसों के परिचालन में नियमों की अनदेखी जारी है. नालंदा के हरनौत में पिछले दिनों हुई एक बड़ी घटना के बाद भी बस चलानेवाले कोई सीख नहीं ले रहे हैं. बगैर फिटनेस सर्टिफिकेट और सुरक्षा संसाधनों के ही यात्री बसें सड़कों पर दौड़ती हैं. कई बस चालकों के पास बीमा और फिटनेस सर्टिफिकेट तक नहीं है. परिवहन विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं करने से सड़कों पर उम्र समाप्त हो चुकीं बसें दौड़ रही हैं.
पर्यटक बसों में भी नहीं होता है नियमों का पालन: पर्यटक बसों में भी नियमों का पालन नहीं होता है. मोहनिया से पटना व आरा के लिए गुजरने वाली पर्यटक बसों की भी हालत काफी खराब है.
नियम के अनुसार, उसमें भी कोई व्यवस्था नहीं है. मोहनिया से पटना, रांची, टाटा, बोकारो, धनबाद, कोलकाता व वाराणसी जैसे शहरों के लिए लंबी रूट की बसें गुजरती हैं. लंबी दूरी की बसों में व्यवस्था के नाम पर स्थिति कुछ ठीक भी है. लेकिन, अग्निशमन यंत्र नहीं लगाया गया है. लेकिन, ग्रामीण इलाकों में चलनेवाली बसों की हालत बदतर है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में 26 जून 2016 को परिवहन विभाग के प्रधान सचिव ने सभी जिलों के डीएम को पत्र भेज कर जिला सड़क सुरक्षा समिति का गठन करने का निर्देश दिया था. लेकिन, समिति का अता पता तक नहीं है.
यात्री बसों के लिए जरूरी नियम
बसों में ड्राइवर की सीट के पीछे अग्निशमन यंत्र जरूरी
32 सीटर या उससे अधिक सीटों वाली बसों में दो गेट होना आवश्यक
बस चलने के समय गेट का लॉक होना आवश्यक है
बस के आगे कांच पर बस का बीमा और फिटनेस सर्टिफिकेट की प्रति चस्पा होना अनिवार्य
बस के ड्राइवर और कंडक्टर को ड्रेस पहनना
जरूरी बसों में फर्स्ट एंड बॉक्स का होना जरूरी
केवल सीट भर ही यात्रियों को बस में सवार करना
नहीं होती पैर रखने की भी जगह
अनुमंडल में इन दिनों नियम के अनदेखी कर बसे जोर-शोर से चल रहh है. जबकि, बसों में पैर रखने का जगह नहीं है. बस चालक क्षमता से अधिक यात्रियों को बसों में बैठा रहे हैं. स्थिति यह है कि इन बसों में न तो इमरजेंसी खिड़की है और न ही डबल डोर. इसके साथ ही ज्यादातर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की कोई व्यवस्था नहीं है.
क्या कहते हैं एसडीओ
इस संबंध में एसडीओ शिवकुमार राउत ने बताया कि यह गंभीर मामला है. इसे गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग से बात कर जो भी नियम की अनदेखी कर बस चल रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जायेगा.
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