बंद रहीं दुकानें, भटकते रहे मरीज
Updated at : 23 Jan 2020 3:53 AM (IST)
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जहानाबाद नगर : जिला केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन द्वारा थोक एवं खुदरा दवा दुकानों को फार्मासिस्ट की उपलब्धता एवं तकनीकी गलती के नाम पर विभागीय उत्पीड़न एवं शोषण के विरोध में बुधवार से तीन दिवसीय बंदी शुरू हो गयी. हड़ताल के पहले दिन जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहीं. इसके कारण दवा के लिए […]
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जहानाबाद नगर : जिला केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन द्वारा थोक एवं खुदरा दवा दुकानों को फार्मासिस्ट की उपलब्धता एवं तकनीकी गलती के नाम पर विभागीय उत्पीड़न एवं शोषण के विरोध में बुधवार से तीन दिवसीय बंदी शुरू हो गयी.
हड़ताल के पहले दिन जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहीं. इसके कारण दवा के लिए मरीज भटकते दिखे. हालांकि सदर अस्पताल परिसर में संचालित जेनेरिक दवा दुकान खुली रही, जहां दवा खरीदने के लिए भीड़ लगी रही.
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन द्वारा फार्मासिस्ट समस्या का जब तक सरकार के द्वारा समाधान नहीं हो जाता तब तक विभाग द्वारा जारी सभी अनुज्ञप्तिधारियों के साथ निरीक्षण के दौरान इस नियम की आड़ में विभागीय उत्पीड़न एवं शोषण को बंद करने की मांग की गयी है.
साथ ही दवा दुकानों में निरीक्षण ड्रग एक्ट में परिभाषित फारमेट के अनुसार ही करने, निरीक्षण के लिए जारी किये गये विभागीय ज्ञापांक को अविलंब निरस्त करने, निरीक्षण के क्रम में पाये गये तकनीकी गलतियों के ऊपर दंडित करने के पहले उसे सुधार के लिए उचित समय दिये जाने, प्रदेश के दवा दुकानों में विभागीय निरीक्षण में एकरूपता एवं पारदर्शिता बनाये रखने,
अनुज्ञप्ति के नवीकरण में केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के आलोक में राज्य औषधि नियंत्रक द्वारा चालान जमा करने में एक स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने, विभागीय निरीक्षण का उद्देश्य सुधार करने का होना न कि उसके नाम पर उत्पीड़न एवं शोषण करने का है जिसके विरुद्ध बंदी बुलायी गयी. सात सूत्री मांगों को लेकर बंदी के पहले दिन दवा मंडी में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा. ऐसे में जेनेरिक दवाओं के सहारे मरीजों का इलाज हुआ.
हालांकि गनीमत यह रही कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता रही, जिससे वैसे मरीज जो सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे उन्हें दवा के लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई. हालांकि निजी अस्पतालों तथा क्लिनिकों में इलाज करवाने आये मरीजों को दवा के लिए भटकना पड़ा. ऐसे में कई मरीज दवा नहीं खरीद पाये, जिसके बाद कुछ जेनेरिक दवाएं खरीदीं.
कई चिकित्सकों के क्लिनिक में पसरा रहा सन्नाटा
जहानाबाद नगर : जिला केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन द्वारा थोक एवं खुदरा दवा दुकानों को फार्मासिस्ट की उपलब्धता एवं तकनीकी गलती के नाम पर विभागीय उत्पीड़न एवं शोषण के विरोध में बुधवार से तीन दिवसीय बंदी शुरू हो गयी.
हड़ताल के पहले दिन जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहीं. इसके कारण दवा के लिए मरीज भटकते दिखे. हालांकि सदर अस्पताल परिसर में संचालित जेनेरिक दवा दुकान खुली रही, जहां दवा खरीदने के लिए भीड़ लगी रही.
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन द्वारा फार्मासिस्ट समस्या का जब तक सरकार के द्वारा समाधान नहीं हो जाता तब तक विभाग द्वारा जारी सभी अनुज्ञप्तिधारियों के साथ निरीक्षण के दौरान इस नियम की आड़ में विभागीय उत्पीड़न एवं शोषण को बंद करने की मांग की गयी है. साथ ही दवा दुकानों में निरीक्षण ड्रग एक्ट में परिभाषित फारमेट के अनुसार ही करने,
निरीक्षण के लिए जारी किये गये विभागीय ज्ञापांक को अविलंब निरस्त करने, निरीक्षण के क्रम में पाये गये तकनीकी गलतियों के ऊपर दंडित करने के पहले उसे सुधार के लिए उचित समय दिये जाने, प्रदेश के दवा दुकानों में विभागीय निरीक्षण में एकरूपता एवं पारदर्शिता बनाये रखने,
अनुज्ञप्ति के नवीकरण में केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के आलोक में राज्य औषधि नियंत्रक द्वारा चालान जमा करने में एक स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने, विभागीय निरीक्षण का उद्देश्य सुधार करने का होना न कि उसके नाम पर उत्पीड़न एवं शोषण करने का है जिसके विरुद्ध बंदी बुलायी गयी. सात सूत्री मांगों को लेकर बंदी के पहले दिन दवा मंडी में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा. ऐसे में जेनेरिक दवाओं के सहारे मरीजों का इलाज हुआ.
हालांकि गनीमत यह रही कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता रही, जिससे वैसे मरीज जो सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे उन्हें दवा के लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई. हालांकि निजी अस्पतालों तथा क्लिनिकों में इलाज करवाने आये मरीजों को दवा के लिए भटकना पड़ा. ऐसे में कई मरीज दवा नहीं खरीद पाये, जिसके बाद कुछ जेनेरिक दवाएं खरीदीं.
जेनेरिक दवा दुकान पर लगी रही भीड़
खुदरा एवं थोक दवा दुकानदारों की तीन दिवसीय बंदी के कारण जेनेरिक दवा दुकान पर मरीजों की लंबी कतार दवा खरीदने के लिए लगी रही. सरकारी अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों को तो कई दवाएं अस्पताल से ही मिल गयीं, लेकिन कुछ दवाएं उन्हें भी जेनेरिक दुकान से खरीदनी पड़ीं.
वहीं निजी अस्पताल एवं क्लिनिक में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए जेनेरिक दुकान ही एकमात्र सहारा बनी थी. ऐसे में सुबह से ही दवा खरीदने के लिए भीड़ लगी रही.
हड़ताल का कई क्लिनिकों पर भी दिखा असर
दवा दुकान बंद रहने का असर कई निजी क्लिनिकों पर भी देखा गया. जिन क्लिनिकों में मरीजों की भी लगी रहती थी उनके पास सन्नाटा पसरा रहा.
दवा नहीं मिलने के कारण चिकित्सक भी मरीजों के इलाज करने में विशेष रुचि नहीं ले रहे थे. मरीजों को स्पष्ट रूप से पहले ही बता दिया जा रहा था कि दवाएं नहीं मिलेंगी. ऐसे में उनका इलाज कैसे हो पायेगा. मरीज भी इस बात को समझ रहे थे. इमरजेंसी मरीज सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे थे.
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