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सदर अस्पताल में सक्रिय हैं दलाल

Updated at : 22 Jun 2019 1:30 AM (IST)
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सदर अस्पताल में सक्रिय हैं दलाल

जहानाबाद : सदर अस्पताल में दलालों की सक्रियता इस कदर है कि जैसे ही किसी मरीज को बड़े अस्पताल में रेफर किया जाता है, दलाल उन्हें अपने झांसे में लेकर बड़े अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल में पहुंचा देते हैं. वहां दलालों को तो तत्काल कमीशन मिल जाता है, वहीं मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना […]

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जहानाबाद : सदर अस्पताल में दलालों की सक्रियता इस कदर है कि जैसे ही किसी मरीज को बड़े अस्पताल में रेफर किया जाता है, दलाल उन्हें अपने झांसे में लेकर बड़े अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल में पहुंचा देते हैं. वहां दलालों को तो तत्काल कमीशन मिल जाता है, वहीं मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है.

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किये जाने के साथ ही उनसे पैसे ऐंठने का खेल खेला जाता है. गुरुवार को शहर के एक निजी अस्पताल में मजिस्ट्रेट द्वारा की गयी छापेमारी के दौरान इसका खुलासा हुआ. मरीज को पैसे के लिए अस्पताल से घर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही थी.
वह मरीज सदर अस्पताल से पीएमसीएच रेफर किया गया था लेकिन दलाल के चक्कर में पड़कर और बेहतर इलाज का सब्जबाग दिखाकर उसे निजी अस्पताल में पहुंचा दिया गया था. जहां उससे मोटी रकम तो ले ली गयी उसका सही तरीके से ख्याल भी नहीं रखा गया. हद तो यह कि और 11 हजार रुपये की मांग की गयी. पैसा नहीं देने पर न तो उसका स्टिच काटा गया और न ही उसे घर जाने की इजाजत दी जा रही थी.
अगर मरीज के परिजन द्वारा इसकी शिकायत नहीं की गयी होती तो यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दब गया होता और मरीज के परिजन मोटी रकम देकर मरीज को घर ले जाते. गुरुवार को इस खुलासे के बाद अस्पताल प्रबंधन भी सकते में है, उसे भी यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर उसके अस्पताल से रेफर मरीज कैसे आसपास के निजी अस्पताल में पहुंचाये जा रहे हैं.
जहां न तो इलाज की समुचित व्यवस्था है, न ही मानकों का ख्याल रखा जाता है. ऐसे में आखिर मरीज कैसे वहां इलाज कराने पहुंच जाते हैं. सदर अस्पताल प्रबंधन वैसे लोगों को चिह्नित करने में भी जुटा हुआ है जो अस्पताल में सक्रिय रहते हुए मरीजों को निजी अस्पताल में ले जाने का काम करते हैं.
निजी अस्पताल में मानकों के अनुरूप नहीं है मरीजों के लिए व्यवस्था
जिले में काफी संख्या में निजी अस्पताल का संचालन हो रहा है लेकिन इनमें एक भी निजी अस्पताल निबंधित नहीं हैं. स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार निबंधन के लिए तीन-चार निजी अस्पतालों द्वारा आवेदन तो किया गया है लेकिन सभी आवेदन अभी जांच की प्रक्रिया में है. वहीं बड़ी संख्या में निजी अस्पताल का संचालन हो रहा है.
जहां न तो प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ही मौजूद रहते हैं, न ही मानकों के अनुरूप मरीजों के लिए व्यवस्था होती है, बावजूद इसके इस तरह का अस्पतालों का संचालन दलालों के भरोसे हो रहा है. दलाल शहरी एवं ग्रामीण इलाके मे सक्रिय रहते हुए मरीजों को ऐसे अस्पतालों में पहुंचाते हैं जहां से उन्हें कमीशन के रूप में मोटी रकम मिलती है. इसके एवज में अस्पताल संचालक द्वारा मरीजों से मोटी रकम ऐंठते हैं.
भले ही उन्हें इलाज मिले या नहीं, उनसे मोटी रकम वसूली जाती है. सूत्रों की मानें तो जिले में बड़ी संख्या में ऐसे निजी अस्पताल संचालित हैं, जहां चिकित्सक ही नहीं रहते. ऐसे अस्पतालों में चिकित्सकों के नाम का बोर्ड तो टंगा रहता है लेकिन वहां इलाज एएनएम या कंपाउंडर द्वारा किया जाता है. कई जगह तो झोलाछाप डॉक्टर बेधड़क ऑपरेशन तक करने से बाज नहीं आते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
सदर अस्पताल में सक्रिय दलालों को चिह्नित कराया जा रहा है. ऐसे लोगों को चिह्नित कराने के बाद उन पर कार्रवाई की जायेगी. विभाग द्वारा यह भी सुनिश्चित कराया जा रहा है कि अगर किसी मरीज को रेफर किया जाता है तो उसे बड़े अस्पताल में पहुंचाया जाये़
डॉ अजय कुमार, प्रभारी अधीक्षक, सदर अस्पताल, जहानाबाद
क्या है निबंधन की प्रक्रिया
निजी अस्पतालों के निबंधन के लिए अस्पताल संचालक द्वारा सिविल सर्जन के नाम आवेदन करना होता है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किये गये फार्मेट में आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन किया जाता है. जिला स्वास्थ्य अधिकारी के समक्ष चिकित्सक होने समेत सभी प्रमाण-पत्रों की जांच होती है. इसके बाद आवेदक को पंजीकृत कर अस्थायी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू होती है.
सीएमएचओ और संबंधित क्षेत्र के बीएलओ के साथ मेडिकल बोर्ड की टीम सत्यापन करने मौके पर जाते हैं. उपलब्ध संसाधन, सुविधाओं के आधार पर लाइसेंस देना या न देना तय होता है. एक्ट के तहत उपकरणों के लिए तकनीकी विशेषज्ञ होना भी जरूरी है. अस्पताल का प्रकार, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पारामेडिकल स्टाफ, फार्मासिस्ट आदि की पूरी जानकारी लेनी होती है. अस्पताल कितने एरिया में संचालित है, कितना बेड लगा है, इस तरह की सभी जानकारी विहित प्रपत्र में देना होता है. स्थायी निबंधन जिला पदाधिकारी के स्तर से दिया जाता है.
क्या हैं उपकरणों के मानक
ऑपरेशन थिएटर,वार्ड और बिस्तर के लिए क्षेत्रफल का निर्धारण
ट्रेंड स्टाफ, अग्निशमन यंत्र, ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था
एंबुलेंस, प्रतीक्षालय ,जीवन रक्षक दवाइंया
इमरजेंसी इलाज की व्यवस्था
मास्क,नाॅर्मल स्लाइन
प्रसूति गृह में स्त्री रोग विशेषज्ञ, सर्जन, अनेस्थेटिस्ट और शिशु रोग विशेषज्ञ होना चाहिए
नवजात शिशु पुनर्जीवन यूनिट, ऑक्सीजन मास्क, न्यूबलाइजर, भ्रूण मॉनीटर, आपातकालीन और जीवन रक्षक के लिए सभी औजार एवं उपकरण रेडिएंट वार्मर
पीड़ित युवक अरवल जिले के इमामगंज स्थित बाजितपुर गांव का मूल निवासी बताया जाता है. इसके थैले में तीन पासबुक भी थे, जिसे गिरोह के सदस्य अपने साथ लेकर फरार हो गये. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.
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