जहानाबाद में पहली बार मुख्य मुकाबले में अतिपिछड़ा उम्मीदवार, त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

By Prabhat Khabar Digital Desk
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जहानाबाद : कभी नरसंहारों के लिए कुख्यात रहे जहानाबाद में राजनेताओं की निगाहें सख्त हैं. हर बार की तरह इस बार मुकाबला दो दलों के बीच आमने-सामने का नहीं है.
मौजूदा सांसद डाॅ अरुण कुमार मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की मुहिम में जोर-शोर से जुटे हैं. जहानाबाद में अब तक चुनावी जंग यादव और भूमिहार नेताओं के बीच होती रही है. पहली बार अतिपिछड़ा उम्मीदवार मुख्य मुकाबले में है.
मध्य बिहार में अतिपिछड़ा खासकर चंद्रवंशी समाज की बहुतायत है. जदयू उम्मीदवार चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी इसी समाज से आते हैं. जदयू को अपने सहयोगी भाजपा और लोजपा के वोट बैंक पर भी भरोसा है. जदयू ने इसी गणित पर अतिपिछड़ा कार्ड खेला है. दूसरी ओर राजद उम्मीदवार डाॅ सुरेंद्र प्रसाद यादव को राजद के परंपरागत माय समीकरण पर भरोसा है.
हालांकि, दोनों गठबंधनों की हवा दो उम्मीदवार निकालने में लगे हैं. एनडीए के वोट बैंक में मौजूदा सांसद और राष्ट्रीय समता पार्टी के उम्मीदवार डाॅ अरुण कुमार सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, राजद उम्मीदवार के लिए तेजप्रताप यादव के उम्मीदवार चंद्रप्रकाश मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. जिले की बदलती राजनीति में पूर्व सांसद के बेटे और पूर्व विधायक राहुल कुमार ने जीतन राम मांझी की पार्टी छोड़ जदयू में शामिल हो गये हैं.
ये विस क्षेत्र हैं इस सीट में शामिल
अरवल, कुर्था, घोसी, जहानाबाद, मखदुमपुर एवं अतरी
15,75,018 कुल वोटरों की संख्या
पुरूष वोटर 8,19,469
महिला वोटर 7,55,502
सेवा मतदाता 7153
अन्य वोटर 47
जातीय गोलबंदी भी तेज
जानकार बताते हैं, मौजूदा सांसद की कार्यशैली से नाराजगी के बावजूद जहानाबाद में जातीय गोलबंदी भी तेज हो रही है. यहां कुल 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. आकलन के अनुसार राजद और जदयू के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है. अरुण कुमार अपने स्वजातीय मतों को हर हाल में अपने साथ बांधे रखने की कोशिश कर रहे हैं.
चुनाव परिणाम में सवर्ण और कुशवाहा का मत निर्णायक का काम करेगा. इसके लिए अरुण कुमार के समर्थकों का कहना है कि जदयू ने नया चुनावी समीकरण के तहत एनडीए से चंद्रवंशी को प्रत्याशी बनाकर अतिपिछड़ों को लुभाने की कोशिश की है. उनका तर्क है कि अगर एक बार जहानाबाद की सीट हाथ से निकल गयी, तो आगे मुजफ्फरपुर की तरह जहानाबाद में कभी भूमिहार उम्मीदवार नहीं बनाये जायेंगे.
राजद के अंदर दिख रही बेचैनी
दूसरी ओर अतिपिछड़ी जाति के जदयू के उम्मीदवार होने से राजद में भी बेचैनी देखी जा रही है. राजद अब तक सवर्ण वनाम तमाम पिछड़ी और अतिपिछड़ी जातियों की गोलबंदी अपने पक्ष में होने की कोशिश करता रहा हे.
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