खेत में मिट्टी के नीचे छुपा कर सिम कार्ड रखता था टाइगर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jan 2018 5:18 AM

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जहानाबाद : अपने कारनामों से कम समय में शहर का आतंक बने रवि टाइगर फिलहाल जेल में कैद है. करतूतों की कहानी सुन पुलिस भी सन्न रह गयी थी. जब चार जनवरी को इसे दबोचा गया तो रंगदार के हाथ से हथियार तो बरामद नहीं हुआ, लेकिन जो सिमकार्ड उसके पास मौजूद मिले उन्हीं नंबरों […]

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जहानाबाद : अपने कारनामों से कम समय में शहर का आतंक बने रवि टाइगर फिलहाल जेल में कैद है. करतूतों की कहानी सुन पुलिस भी सन्न रह गयी थी. जब चार जनवरी को इसे दबोचा गया तो रंगदार के हाथ से हथियार तो बरामद नहीं हुआ, लेकिन जो सिमकार्ड उसके पास मौजूद मिले उन्हीं नंबरों से रंगदारी मांगता था टाइगर उर्फ तूफान सिंह. पटना जिले के कौरी गांव निवासी रंगदार के ऐसे तो कई उपनाम हैं लेकिन मूल नाम सकून कुमार है. पिता की मौत के बाद अपने ननिहाल नोआवां को इसने अपराध का ठिकाना बनाया जहां इसके मंसूबे तब और खतरनाक हो गये जब इसके द्वारा शहर के कई व्यवसायियों से रंगदारी की मांग की जाने लगी.

व्यवसायी सिहर उठे थे, उन्हें फिर से पुराने जमाने की आहट सुनायी पड़ने लगी थी लेकिन पुलिस कप्तान मनीष ने उभर रहे उक्त रंगदार के मंसूबों पर तब पानी फेर दिया, जब चंद दिनों के अंदर ही पुलिस ने टाइगर को अपने चंगुल में जकड़ कर सलाखों के पीछे भेज दिया. तफ्तीश की कहानी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी.
आतंक का साम्राज्य स्थापित कर रहे शख्स ने पुलिस को बताया कि उसने अमीर बनने का ख्वाब पाल रखा था और चंद समय में ही अमीर बनने का इससे बेहतर और कोई रास्ता उसे नजर नहीं आया. लिहाजा प्रयोग के तौर पर व्यवसायियों से रंगदारी मांगने का रिहर्सल करने लगा. सुबह शहर में पहुंचकर शहर का भ्रमण कर शाम को ननिहाल लौट जाता था टाइगर. यहीं दुकानों के आगे लगे बोर्ड से व्यवसायियों का नंबर जुटाकर मांगता था रंगदारी की रकम. उसकी योजना की भनक किसी को कानों-कान न लगे इसके लिए वह गांव के खेत-बधार में देर रात भी अकेले ही आया-जाया करता था. उसके द्वारा जिस सिमकार्ड से रंगदारी मांगी जाती थी वह सिमकार्ड रंगदारी मांगने के बाद मोबाइल से निकाल कर खेत में ही मिट्टी के नीचे छुपा कर चला जाता था.
आतंक की कहानी, टाइगर की जुबानी n चार जनवरी को दबोचा गया था टाइगर उर्फ तूफान सिंह
रंगदारी मांगने के बाद मोबाइल कर देता था ऑफ
कॉल की फेहरिस्त पर भी जब गौर फरमाया गया तो पाया गया कि रकम मांगने के तुरंत बाद मोबाइल स्विच ऑफ है. शातिर रंगदार को लगा कि अगर रंगदारी की रकम दस में से एक जगह से भी मिल गयी तो तकदीर संवर जायेगी. जब कहीं से कोई रकम नहीं मिली तो उसने अलबत्ता एक व्यवसायी से 25 लाख रंगदारी के एवज में एक सोने की चैन लेने पर भी तैयार हो गया था. टाइगर ने शहर के अलग-अलग और भी कई व्यवसायियों को फोन की घंटी घुमानी शुरू कर दी थी.
ननिहाल में एक कमरा भी रखा था सुरक्षित
पुलिस ने उसके सिमकार्ड को खेत-खलिहानों से ही इसी हालात में बरामद भी किया था. ननिहाल में नानी का कमरा भी उसके लिए सुरक्षित ठिकाना था, जहां मोबाइल रखा करता था. पहले तो पुलिस को इसके बताये बयान पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसने पुलिस को अपने ठिकाने सच ही बताया हो लेकिन जब सब कुछ इसके कथनानुसार सही निकला तो पुलिस ने भी राहत की सांस ली.
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