जर्जर भवनों से जोखिम में जान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Oct 2017 2:37 AM

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जहानाबाद : स्टेशन की दक्षिण दिशा में अवस्थित रेलवे क्वार्टरों की हालत ठीक नहीं है. 50-60 वर्ष पुराने बने करीब 90 क्वार्टरों में कर्मी रहना नहीं चाहते. कई कर्मी तो भवन की जर्जरता के कारण शहर में किराये के मकान में रह रहे हैं, लेकिन मजबूरीवश जो रेलवे कर्मचारी अपने परिवार के साथ खराब हालत […]

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जहानाबाद : स्टेशन की दक्षिण दिशा में अवस्थित रेलवे क्वार्टरों की हालत ठीक नहीं है. 50-60 वर्ष पुराने बने करीब 90 क्वार्टरों में कर्मी रहना नहीं चाहते. कई कर्मी तो भवन की जर्जरता के कारण शहर में किराये के मकान में रह रहे हैं, लेकिन मजबूरीवश जो रेलवे कर्मचारी अपने परिवार के साथ खराब हालत वाले क्वार्टरों में रह रहे हैं वे सशंकित रहते हैं. उनमें यह भय बना रहता है कि भवन कहीं धराशायी न हो जाये. स्टेशन की उत्तर दिशा में कुछ वर्षों पूर्व नये आवास बनाये गये थे,

जिनमें रेलवे कर्मी रह रहे हैं. रेल पुलिसकर्मियों का भी उसमें बसेरा है, लेकिन दक्षिण दिशा के अत्यंत पुराने हो चुके क्वार्टरों की हालत नहीं सुधारी जा रही है. जर्जर हालत वाले रेलवे क्वार्टरों में स्टेशन प्रबंधक, स्टेशन मास्टर, सहायक स्टेशन मास्टर, पोर्टर, सिग्नल और इंजीनियरिंग सेक्शन के कर्मी, रेल पथ एवं वाणिज्य विभाग के रेलवे कर्मचारी रह रहे हैं. क्वार्टरों की संख्या करीब 90 है और सबों की हालत अत्यंत खराब है. कमरे की सीलिंग और दीवारों के प्लास्टर उखड़े हुए हैं और अक्सर झड़कर गिरते रहते हैं. बरसात में छत से पानी टपकता है. बिजली की व्यवस्था लुंज-पुंज है.

क्वार्टरों की गलियां कच्ची हैं, जहां गंदगी का अंबार लगा रहता है. शौचलयों और स्नानागार डैमेज हैं. ऐसे हालात में कई रेल कर्मी वहां रहने को तैयार नहीं हैं. लाचारी में कुछ लोग भय के माहौल में रह रहे हैं.

गंदे पानी की भी नहीं हो पाता है निकास
रेलवे परिसर में गंदे पानी का जमाव एक बड़ी समस्या है. मुख्य निकास का नाला जाम रहने से परिसर के साथ-साथ कॉलोनियों में गंदगी जमी रहती है. कई क्वार्टरों के बाहर की नालियां कच्ची हैं. लोग करघा बनाकर उसमें गंदे पानी का बहाव करते हैं. वैसे तो नारकीय स्थिति सालों भर रहती है, लेकिन बरसात के दिनों में समस्या और भी विकट हो जाती है. कर्मियों के क्वार्टरों के आंगन में जमा पानी के बीच गंदगी तैरती रहती है.
17 साल से क्वार्टर न0 29/सी में रह कर ट्रैकमैन के पद पर कार्यरत हूं. मेरे क्वार्टर की हालत इतनी खराब है कि अब अनहोनी का डर बना हुआ है. परिवार समेत खतरा झेलते हुए बदहाल रेलवे क्वार्टर में जीवनयापन कर रहा हूं. आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि किराये के मकान में रहूं. यथाशीघ्र क्वार्टर को कम-से-कम मरम्मत कर रहने लायक बनाया जाये.
उमेश कुमार, ट्रैकमैन
मैं दो साल से क्वार्टर न0 45/डी में पत्नी एवं बच्चों के साथ रहकर पटना-गया रेलखंड में गैंगमैन का काम करता हूं. मैंने जब से इस क्वार्टर में वास किया उसके वर्षों पूर्व से ही हालत जर्जर है. घर के आंगन से गंदे पानी का निकास काफी मुश्किल से होता है. बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है. बिजली की वायरिंग लुंज-पुंज है. करेंट लगने का खतरा बना रहता है.
विलट मंडल, गैंगमैन
रेलवे स्टेशन के दक्षिण दिशा वाले क्वार्टरों की हालत अत्यंत खराब है. मैं क्वार्टर नं. 11 /डी में रहता हूं. यहां की सेनेटरी की हालत तो खराब है ही, दीवारों के प्लास्टर उखड़े हुए हैं. क्वार्टर रहने लायक नहीं है. पांच-छह साल पहले दुरुस्त करने के लिए आइओडब्ल्यू को हैंडओवर किया गया था, लेकिन मेंटेनेंस वर्क नहीं किया गया. रेल कर्मी खतरे के बीच रहने को लाचार हैं.
चौधरी नरेंद्र कुमार, स्टेशन प्रबंधक
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