किंजर में प्रशासनिक व्यवस्था लचर, सुविधाओं का है अभाव

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जहानाबाद : जिले के किंजर में पिंडदानियों का जमावड़ा मंगलवार से शुरू हो गया है. पितरों को तर्पण करने एवं श्राद्ध क्रम कर घर में सुख-समृद्धि लाने के उद्देश्य से देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं को किंजर पहुंचते ही कई बुनियादी सुविधा का अभाव खटकता है. एक तरफ मोक्ष धाम गया जी में पितृ पक्ष मेले […]

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जहानाबाद : जिले के किंजर में पिंडदानियों का जमावड़ा मंगलवार से शुरू हो गया है. पितरों को तर्पण करने एवं श्राद्ध क्रम कर घर में सुख-समृद्धि लाने के उद्देश्य से देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं को किंजर पहुंचते ही कई बुनियादी सुविधा का अभाव खटकता है. एक तरफ मोक्ष धाम गया जी में पितृ पक्ष मेले को लेकर प्रशासन एक पखवारे पूर्व से ही तैयारी कर विष्णु नगरी को सजाने में जुटी है. वहीं किंजर स्थित पुनपुन नदी घाट पर प्रशासनिक व्यवस्था फीकी दिख रही है.

प्रशासन की नजरों से उपेक्षित घाट पर कई तरह की सुविधाओं का अभाव है. प्रशासनिक महकमे की मुकम्मल व्यवस्था नहीं रहने से पिंडदान कड़ी धूप के बीच पिंडदान करने को मजबूर हैं. ऐसे में आसपास में लगे पेड़ ही देश-विदेश के श्रद्धालु का एक सहारा का काम कर रही है. गौर करें तो पूर्वजों के मोक्ष प्राप्ति में किंजर, पुनपुन नदी का नाम वेद पुराण में वर्णित हैं. पितृ पक्ष के मौके पर बड़े तादाद में देश-विदेश के लोग यहां पहुंचते है . बावजूद सुविधा के नाम पर प्रशासनिक व्यवस्था नाम मात्र ही है.

श्रद्धालु बताते है कि उपेक्षित पड़ा यह जगह को पटल पर लाया जाए तो यह धार्मिक धरोहर के रूप में इसका विकास हो सकता है. हालांकि पिछले दिन अरवल के जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने श्रद्धालुओं का सुविधा का ख्याल रखने के लिए कई वरीय पदाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन डीएम का निर्देश धरातल पर हवा-हवाई दिख रहा है. श्रद्धालुओं को तपती धूप में श्राद्धकर्म करना पड़ रहा है. घाट पर पेयजल, सफाई, सुरक्षा एवं अस्थायी शौचालय का अभाव खटक रहा था. सुबह के समय घाट पर एक भी पुलिस पदाधिकारी मौजूद नहीं थे. लेडिज पुलिस को भी प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी थी. सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं रहने के कारण पिंडदानी शाम ढलते ही गया-पटना एवं जहानाबाद के लिये निकल पड़ते हैं. श्रद्धालुओं को अगर बेहतर सुविधा मिले तो बाजार गुलजार दिखेगा तथा आम लोगों को बेहतर रोजगार मिल सकेगी. घाट पर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल के लिए चापाकल की कमी महसूस हो रही है. पिंडदानी को धूप के वजह से टेंट की जरूरत महसूस हो रही थी. नदी के पानी की अधिक गहराई को देखते हुए किसी प्रकार की बैरिकेडिंग नहीं किया गया है. श्रद्धालु खुले नदी में ही स्नान करते दिखे . ऐसे में दुर्घटना भी हो सकती है. जिस पर प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है. घाट पर देश-विदेश से पहुंचने वाले यात्री को जानकारी देने के लिये काउंटर भी नहीं लगाया गया है .

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