चहारदीवारी नहीं रहने से दुर्घटना का डर

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जहानाबाद,नगर : शहर के एरोड्राम मैदान के समीप संचालित प्राथमिक विद्यालय निषादचक में पढ़ने वाले बच्चों को हमेशा दुर्घटना होने का डर सताते रहता है. विद्यालय में चाहारदिवारी नहीं रहने के कारण बच्चे अक्सर स्कूल के समीप से गुजरने वाली सड़क तक पहुंच जाते हैं जो कि कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकता है. […]

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जहानाबाद,नगर : शहर के एरोड्राम मैदान के समीप संचालित प्राथमिक विद्यालय निषादचक में पढ़ने वाले बच्चों को हमेशा दुर्घटना होने का डर सताते रहता है. विद्यालय में चाहारदिवारी नहीं रहने के कारण बच्चे अक्सर स्कूल के समीप से गुजरने वाली सड़क तक पहुंच जाते हैं जो कि कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकता है.
ऐसे में विद्यालय के एक शिक्षक हमेशा बच्चों को सड़क पर जाने से रोकने में हीं जुटे रहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विद्यालय के समीप हीं कुड़ा डंप किया जाता है. जिससे निकलने वाली दुर्गंध बच्चों के साथ -साथ शिक्षकों को भी परेशान कर रखा है. प्राथमिक विद्यालय निषादचक में वर्ग एक से पांच तक की पढ़ाई होती है. विद्यालय में 50 बच्चे नामांकित हैं जबकि इन बच्चों को शिक्षा का पाठ पढाने के लिए चार शिक्षक पदस्थापित हैं. विद्यालय में चार कमरे हैं जिसमें एक का उपयोग एमडीएम का खाद्यान रखने में किया जाता है. जबकि एक अन्य कमरें में एमडीएम बनाया जाता है.वहीं दो कमरों में वर्ग का संचालन होता है.ऐसे में हमेशा वर्ग एक- दो तथा तीन-चार कम्बाईंड रूप से संचालित होता है.
विद्यालय में शौचालय तथा पेयजल की समुचित व्यवस्था है लेकिन चापाकल से निकलने वाला पानी दुषित रहता है.मंगलवार की दोपहर करीब 12 बजे प्रभात खबर की टीम जब विद्यालय पहुंची तो विद्यालय के बाहर आधे दर्जन बच्चे खेलते-कुदते मिले. वहीं एक शिक्षिका उन बच्चों को नियंत्रित करने में जुटी दिखी. विद्यालय के दो कमरों में वर्ग का संचालन हो रहा था .दो कमरों में एक साथ वर्ग संचालित था. विद्यालय में 30 से 35 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.वहीं तीन शिक्षक भी मौजूद थे. एक शिक्षक जो विद्यालय की प्रधानाध्यापिका हैं वे दो दिनों का विशेष अवकाश पर मिली. विद्यालय के आगे किचड़ों से भरा गड्ढा देखने को मिला वहीं विद्यालय के बगल में हीं कुड़ा डंप किया गया मिला. कुड़े की दुर्गंध विद्यालय में भी फैल रहा था.
विद्यालय में एमडीएम का खाना पकाया जा रहा था वहीं दो शिक्षक वर्ग संचालन में जुटे थे. विद्यालय में पढने वाले बच्चें घर से बोरा लेकर आते हैं उसी बोरे पर बैठकर वे शिक्षा का पाठ याद करते हैं. विद्यालय में न तो बेंच -टेबुल की व्यवस्था है और न हीं बच्चों को बैठने के लिए दरी की ही व्यवस्था है.
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