फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद मुआवजा राशि पर छिड़ा रार, पिता बोले- 'CO और कथित पत्नी ने मिलकर किया धोखा'

Edited by Vikash Jha
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शुभम कुमार और श्रेया राय। फोटो- प्रभात खबर

Martyr Shubham Kumar News: जहानावद जिले के हुलासगंज थाना क्षेत्र के बनवरिया गांव निवासी शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम की शहादत के बाद उनके पिता अमरेंद्र शर्मा और कथित पत्नी श्रेया राय के बीच विवाद छिड़ गया है. सरकार द्वारा श्रेया राय को शुभम की पत्नी मानते हुए 21 लाख रुपये की अनुग्रह राशि का चेक सौंप दिया गया है. शहीद के पिता का कहना है कि उन्हें इस कोर्ट मैरेज की जानकारी नहीं थी और चेक गोपनीय तरीके से दिया गया. वहीं आजमगढ़ की श्रेया राय का दावा है कि उनका शुभम के साथ फरवरी 2026 में कोर्ट मैरेज हो चुका है.

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Martyr Shubham Kumar News (जहानाबाद से अश्विनी कुमार की रिपोर्ट): असम विमान हादसे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद घर परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. जले पर नमक छिड़कने वाली कहावत भी इनके परिजनों पर चरितार्थ हो रही है. अचानक परिवार वालों को जब पता चला कि शुभम ने अपनी कथित प्रेमिका के संग कोर्ट में शादी रचा ली है. इस बात का खुलासा तब हुआ जब सरकार के द्वारा शहीद के परिजनों को 21 लाख की अनुग्रह राशि बांट दी गई, लेकिन ये राशि पिता के बजाय उसकी कथित पत्नी और आजमगढ़ की रहने वाली श्रेया राय को दी गई. हद तो तब हो गई जब उक्त राशि शहीद के गांव बनबरिया में न देकर गया में बैठी उसकी कथित पत्नी को दे दी गई.

श्रेया राय ने कोर्ट मैरेज करने का किया दावा

इधर, श्रेया राय ने दावा किया है कि उन्होंने शुभम के साथ फरवरी 2026 में ही कोर्ट मैरेज कर लिया था. इसलिए नियमानुकुल शहीद के परिजनों को मिलने वाला हर लाभ पर पत्नी होने के नाते उनका ही दावा बनता है. हुलासगंज सीओ ने फिलहाल शहीद शुभम की पत्नी को 21 लाख रुपए की अनुग्रह राशि सौंपी है. जिसपर फिलहाल शहीद के पिता और कथित पत्नी के बीच रार छिड़ गया है.

पिता ने कहा- वर्ष 2027 में होनी थी दोनों की शादी

शहीद शुभम कुमार के पिता अमरेंद्र शर्मा का दावा है कि कि मैं किसी श्रेया राय को नहीं जानता हूं जो मेरे पुत्र की पत्नी है. यह बात जरूर है कि मेरे बेटे ने उससे शादी का रिश्ता की बात घर में बोला था. जो मेरी मां के निधन के एक साल बाद वर्ष 2027 में उसके साथ शादी होने की बात कही गई थी. घर परिवार के किसी भी सदस्य को इस बात की भनक तक नहीं है की शुभम ने श्रेया से शादी रचाई है. इतना जरूर पता था कि दोनों एक-दूसरे को चाहते हैं और शादी करना चाहते हैं. शुभम के परिवार इस शादी के लिए राजी थे, इसी साल नवंबर में शादी भी होनी थी.

अंतिम संस्कार में शामिल हुई थी कथित पत्नी

उनकी शहादत की सूचना पर कथित पत्नी श्रेया राय पति के पार्थिव शरीर के साथ हुलासगंज थाना क्षेत्र के बनवरिया गांव पहुंची जरूर थी लेकिन मास्क लगा कर चेहरा छुपाती रही, घर परिवार के किसी भी सदस्य से मिलना भी मुनासिब नहीं समझी. शुभम के परिवार वालों के साथ गम में वह भी शरीक हुई थी. गांव से शुभम का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए गयाजी के विष्णुपद ले जाया गया था, वहां भी वह परिवार वालों के साथ मौजूद रही.

‘अगर वह सच में शुभम की पत्नी है तो मेरे घर आकर रहे और सनातन के मुताबिक संस्कार में शामिल हो, तब मैं उसे बहु मानूंगा. पैसा लेकर वो आजमगढ़ चली गई है. वो बहू का फर्ज अदा करे, बुढ़ापे में हमारा और पत्नी का देख भाल करे. आगे कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी.’अमरेंद्र शर्मा, शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम के पिता

गोपनीय तरीके से चेक बांटने का लगाया आरोप

वायुसेना के अधिकारियों द्वारा विष्णुपद में शुभम की मां को तिरंगा व उनकी टोपी सौंपी गई थी, जबकि श्रेया राय को बिहार सरकार की ओर से 21 लाख रुपए का चेक हुलासगंज सीओ के द्वारा दिया गया था. श्रेया राय को चेक मिलने की सूचना से शुभम के माता-पिता वाकिफ नहीं थे. गांव लौटने पर दूसरे दिन पिता अमरेंद्र शर्मा को यह जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने सीओ से संपर्क किया, तब सीओ ने श्रेया राय को 21 लाख रुपए का चेक देने की बात स्वीकार की. देर रात पत्नी ने ससुर को फोन कर बोली कि बहकावे में मत आइए आप.

पुत्र को खोने के बाद पिता ने खुद को बताया बेसहारा

शहीद के पिता का कहना है कि अगर मेरे बेटे ने सचमुच श्रेया राय से शादी की थी, तो वह मेरी बहू है और चेक पाने की पूर्ण हकदार है, लेकिन उसे पत्नी होने का फर्ज भी निभाना चाहिए था, पति के श्राद्धकर्म से पहले ही वह चेक लेकर अपने शहर लौट गई. चेक देने में भी सीओ ने धोखा किया, मुझे इस बात की भनक तक नहीं लगने दी. दोनों की नीयत ठीक नहीं थी, गोपनीय तरीके से चेक बांटा गया है.

‘दोनों ने मेरे साथ धोखा किया. मेरा बेटा वीरगति को प्राप्त हुआ है, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. इस दुख को बांटने पर थोड़ी मदद के लिए सरकार बलिदान के परिवारों को आर्थिक सहायता करती है, जिससे मुझे वंचित किया जा रहा है. मैं काफी निर्धन हूं, बेटा शुभम ही परिवार का सहारा था, उसे खोने के बाद कोई सहारा नहीं बचा है.’अमरेंद्र शर्मा, शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम के पिता

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By Vikash Jha

विकाश झा एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और कंटेंट प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया। News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं। क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अपनी लेखनी का महत्वपूर्ण विषय मानते हैं। उन्हें यात्रा करना, नए लोगों और स्थानों को जानना तथा समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।

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