बिना निबंधन के चल रहे जिले में कोचिंग संस्थान
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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पढ़ाई के दौरान सिलेबस का भी नहीं रखा जाता ख्याल अंधेरे कमरे में चल रहे अधिकतर कोचिंग संस्थान जहानाबाद (नगर) : विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षा, मैट्रिक व इंटर की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों की जिले में भरमार है.शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी काफी संख्या में ऐसे कोचिंग संस्थान हैं, जहां बेहतर शिक्षा […]
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पढ़ाई के दौरान सिलेबस का भी नहीं रखा जाता ख्याल
अंधेरे कमरे में चल रहे अधिकतर कोचिंग संस्थान
जहानाबाद (नगर) : विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षा, मैट्रिक व इंटर की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों की जिले में भरमार है.शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी काफी संख्या में ऐसे कोचिंग संस्थान हैं, जहां बेहतर शिक्षा देने का दावा किया जाता है, लेकिन शिक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है. इन कोचिंग संस्थानों की मनमानी से यहां पढ़ने वाले बच्चे बेहाल हैं. उन्हें पेयजल व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी यहां नहीं मिल पाती हैं. कोचिंग संस्थानों द्वारा किसी भी स्तर पर मानकों का ख्याल नहीं रखा जाता है. शहरी क्षेत्र में संचालित अधिकतर कोचिंग संस्थान अंधेरे कमरों में संचालित हो रहे हैं, जहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होती है.
बेहतर शिक्षा के नाम पर यहां सिर्फ खानापूर्ति की जाती है. सच्चाई तो यह है कि यहां पढ़ाने वाले शिक्षक खुद प्रशिक्षित नहीं हैं. ऐसे में उनके द्वारा बच्चों को बेहतर शिक्षा देना संभव नहीं है. कोचिंग संस्थानों द्वारा बच्चों को सब्जबाग दिखा कर अपनी ओर आकर्षित कर लिया जाता है, लेकिन समय पर कोर्स पूरा कराने में सक्षम नहीं हो पाते. कई कोचिंग संस्थान तो ऐसे हैं, जहां बच्चों को यह बताया ही नहीं जाता है कि उन्हें किस सिलेबस के तहत पढ़ाया जायेगा. ऐसे में छात्र बेहतर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं.
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से कोचिंग के प्रति बढ़ा रुझान : जिले के अधिकतर माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की काफी कमी है.
कई विद्यालयों में साइंस विषय के एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में कोर्स पूरा करने के लिए छात्र कोचिंग संस्थान का सहारा लेते हैं, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है. छात्र-छात्राओं को समय पर कोर्स पूरा कराने का सब्जबाग दिखाया जाता है, लेकिन पढ़ाई के दौरान सिलेबस का ख्याल नहीं रखा जाता.
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