नक्सली जोनल कमांडर सिद्धु कोड़ा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अनियमितता मामले में तीन चिकित्सक निलंबित

स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2020 में एक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर अनियमितता पाये जाने के आरोप में सदर अस्पताल जमुई के तीन चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है.
जमुई. बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2020 में एक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर अनियमितता पाये जाने के आरोप में सदर अस्पताल जमुई के तीन चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है. निलंबित किये गये चिकित्सकों में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ सैयद नौशाद अहमद, डॉ नागेंद्र कुमार, डॉ देवेंद्र कुमार शामिल हैं. इस संबंध में विभाग के अपर सचिव उपेंद्र राम ने आदेश जारी किया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, नक्सली कमांडर सिद्धु कोड़ा उर्फ मुंशी दा की 22 फरवरी 2020 को पुलिस हिरासत में मौत हो गयी थी. इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया था. बाद में सामने आयी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करते समय चिकित्सकीय दल ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया. बताया जाता है कि पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी करायी गयी थी. न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, जमुई के पत्रांक 117 दिनांक 22 अक्तूबर 2021 के माध्यम से स्व सिद्धु कोड़ा के अंत्य परीक्षण से संबंधित वीडियो ग्राफी एवं रिपोर्ट का प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया था. जांच में पाया गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक दल ने बाहरी व्यक्तियों को स्वतंत्र गवाह के रूप में दर्ज नहीं किया तथा मृत्यु के कारण को चिह्नित करने वाली महत्वपूर्ण विशिष्टताओं का भी उल्लेख नहीं किया गया है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मृतक के नाक, कान और मुंह से खून निकलने व शरीर पर कटे के निशान का जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नहीं किया गया. यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली के समक्ष विचाराधीन है. आयोग ने 29 अक्तूबर 2025 को पारित आदेश में पोस्टमार्टम प्रतिवेदन जारी करने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. आयोग के निर्देश और मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीनों चिकित्सकों को बिहार सरकारी सेवा नियमावली के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पटना निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता दिया जायेगा. विभाग ने इस मामले में विस्तृत जांच कर आगे की कार्रवाई करने की भी बात कही है. इस संबंध में पुष्टि करते हुए वर्तमान सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि नक्सली कमांडर सिद्धु कोड़ा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गड़बड़ी के आरोप को लेकर यह निलंबन की कार्रवाई की गयी है. साथ ही, तीनों चिकित्सक पर एफआइआर करने का भी आदेश दिया गया है.
नक्सली संगठन का जोनल कमांडर था सिद्धु कोड़ा
जमुई. जिले के चकाई थाना क्षेत्र के नेहालडीह गांव हार्ड़कोर नक्सली सिद्धु कोड़ा लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था. वह माओवादी संगठन में जोनल कमांडर के रूप में काम करता था और जमुई, लखीसराय, बांका सहित बिहार-झारखंड की सीमा से लगे कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उसका प्रभाव माना जाता था. सिद्धु कोड़ा बिहार-झारखंड क्षेत्र का कुख्यात नक्सली जोनल कमांडर था, जिस पर कई बड़े नक्सली हमले और आपराधिक मामलों का आरोप था. इसके ऊपर बिहार व झारखंड सरकार ने 11 लाख का इनाम भी घोषित किया था. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, विस्फोट और सुरक्षा बलों पर हमले सहित 70 से अधिक संगीन मामले दर्ज थे. साथ ही झारखंड राज्य के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के पुत्र की हत्या में भी शामिल था. 22 फरवरी 2020 को झारखंड एसटीएफ की टीम ने उसे झारखंड के दुमका रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद जमुई पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए जमुई लाया गया था. पूछताछ के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गयी थी और उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया जहां जांच के बाद चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया था. इसी मामले के पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर बाद में विवाद सामने आया और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई.कई बड़े मामलों ने नामजद था जोनल कामांडर सिद्धु कोड़ा
– वर्ष 1998, जमुई के खैरा क्षेत्र में पेट्रोलिंग टीम को विस्फोट से उड़ाया, जिसमें एक मजिस्ट्रेट सहित 3 लोगों की मौत हुई थी.– वर्ष 2003, जमुई के डीएम और एसपी के काफिले पर हमला, जिसमें एक पुलिस अधिकारी की मौत हुई थी.
– वर्ष 2014, नवादा-जमुई सीमा के महुलीटांड़ इलाके में बड़े नक्सली हमले में कई सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी.टाइमलाइन : सिद्धु कोड़ा केस
22 फरवरी 2020 : झारखंड के दुमका रेलवे स्टेशन से एसटीएफ ने सिद्धु कोड़ा को गिरफ्तार किया22 फरवरी 2020 : गिरफ्तारी के बाद पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई2021 : पोस्टमार्टम से संबंधित वीडियोग्राफी और रिपोर्ट न्यायिक दंडाधिकारी को उपलब्ध कराई गई
29 अक्टूबर 2025 : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया2026 : स्वास्थ्य विभाग ने सदर अस्पताल जमुई के तीन चिकित्सकों को निलंबित किया
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