अब टेंडर से बिकेंगे डाढ़ा पंचायत के आम बगीचों के फल
Published by : PANKAJ KUMAR SINGH Updated At : 21 Mar 2026 7:07 PM
पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लगाये गये पौधे अब कमाई का बड़ा जरिया बनता दिख रहा है.
पंसस सुमित कुमार सिंह ने बीडीओ को आवेदन देकर फलों की नीलामी की मांग की
बरहट. पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लगाये गये पौधे अब कमाई का बड़ा जरिया बनता दिख रहा है. बरहट प्रखंड की डाढ़ा पंचायत में मनरेगा योजना के तहत लगाये गये हजारों फलदार पेड़ों पर इस बार प्रशासन की नजर सख्त हुई है. आम के बगीचों में आ चुके मंजर और हर साल होने वाली अनकही लूट के बीच अब टेंडर प्रक्रिया के जरिये बिक्री की तैयारी शुरू हो गयी है. पंचायत समिति सदस्य सुमित कुमार सिंह ने बीडीओ को आवेदन देकर नियमों के तहत फलों की नीलामी की मांग की. बताया जाता है कि करीब 9 एकड़ सरकारी गैरमजरुआ जमीन पर लगे 25 हजार पौधों में से 11 हजार आम के पेड़ अब पूरी तरह फलदार हो चुके हैं. पिछले पांच सालों से ये पेड़ लगातार लाखों रुपये का फल दे रहे हैं, लेकिन अब तक इस हरी दौलत का कोई ठोस हिसाब-किताब नहीं था. यही वजह है कि अब टेंडर प्रक्रिया के जरिये सरकारी राजस्व बढ़ाने की मांग तेज हो गयी है.सड़क किनारे आम, लेकिन ग्रामीणों के हिस्से ना के बराबर
स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो पंचायत की सड़कों के किनारे लगे सैकड़ों आम के पेड़ हर साल लहलहाते हैं, लेकिन उनका स्वाद गांव के लोगों को नसीब नहीं होता. आरोप है कि कुछ रसूखदार लोग औने-पौने दाम पर इन फलों को बेच देते हैं और पूरा खेल चुपचाप निबटा दिया जाता है. नतीजा सरकार को लाखों का नुकसान और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी. इस बार मंजर आते ही गांव में चर्चा गर्म है कि क्या इस बार भी चुपके से सौदा होगा या सच में टेंडर से पारदर्शिता आयेगी. अगर निविदा प्रक्रिया लागू होती है तो सरकारी खजाने में मोटी रकम आने की उम्मीद है, साथ ही सफेदपोश सिंडिकेट पर भी नकेल कस सकती है.
टेंडर बना समाधान या नई सियासत की शुरुआत
पंचायत समिति सदस्य सुमित कुमार सिंह ने टेंडर प्रक्रिया की मांग उठाकर इस पूरे मामले को प्रशासनिक दायरे में ला दिया है. उनका कहना है कि अगर निविदा के जरिये आम की बिक्री होती है तो न सिर्फ सरकार को सही राजस्व मिलेगा, बल्कि गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी. हालांकि, जानकार मानते हैं कि टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी यह मामला पूरी तरह शांत नहीं होगा. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टेंडर में कौन-कौन भाग लेता है और क्या स्थानीय लोगों को इसमें प्राथमिकता मिलती है या फिर बाहरी ठेकेदार इस हरे सोने पर कब्जा जमाते हैं.
क्या कहतें हैं बीडीओ
पंचायत समिति सदस्य की ओर से आम की फसल को टेंडर के जरिये बेचने का प्रस्ताव मिला है. टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी गयी है और अब आगे का फैसला उनके निर्देश पर लिया जायेगा.
एसके पांडेय, बीडीओप्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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