उदासीनता. सरकारी उपेक्षा के कारण आज भी पर्यटन के मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने को तरस रहा है कुकुरझप डैम
बरहट. जमुई-खड़गपुर मुख्य मार्ग से महज 9 किलोमीटर दूर बरहट प्रखंड मुख्यालय में स्थित कुकुरझप डैम प्राकृतिक सौंदर्य का अनमोल खजाना है, लेकिन सरकारी उपेक्षा के कारण आज भी यह पर्यटन के मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने को तरस रहा है. चारों ओर हरियाली व पहाड़ियों से घिरा यह डैम सर्द मौसम में सैलानियों की पहली पसंद बन जाता है, लेकिन सरकारी उदासीनता और ठोस पहल के अभाव में यह स्थल अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है. पहाड़ियों की गोद में बसा यह डैम सर्द मौसम में किसी हिल स्टेशन से कम नहीं लगता. मकर संक्रांति, 26 जनवरी व अन्य त्योहारों पर लोग परिवार के साथ पिकनिक मनाने पहुंचते हैं. बावजूद इसके, यहां शौचालय, बैठने की व्यवस्था, सड़क, सुरक्षा, मनोरंजन और प्रचार जैसी बुनियादी पर्यटन सुविधाएं नदारद हैं.पर्यटन की अनदेखी पर विकास की रफ्तार में ब्रेक
स्थानीय बुद्धिजीवी और समाजसेवी वर्षों से कुकुरझप डैम को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग करते आ रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि सरकार इस डैम को पर्यटन का दर्जा दे तो बरहट प्रखंड की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती हैं. आजादी के अमृत महोत्सव में भी बरहट पंचायत के कई गांवों में लोग जंगल से लकड़ियां काटकर या दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन यापन करने को मजबूर हैं. पर्यटन से होटल, दुकान, नाव संचालन, पार्किंग और स्थानीय उत्पादों की बिक्री जैसे कई रोजगार के रास्ते खुल सकते हैं.मेरा प्रखंड मेरा गौरव में चयन, फिर भी जमीन पर सन्नाटा
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मेरा प्रखंड मेरा गौरव अभियान में कुकुरझप डैम का चयन किया गया. इस उपलब्धि पर बीडीओ एसके पांडेय को बिहार के तत्कालीन पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह और ग्रामीण विकास सचिव लोकेश कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से सम्मानित भी किया गया. सम्मान समारोह के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी कि अब डैम का कायाकल्प होगा, लेकिन सरकार बदलने के महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस विकास कार्य शुरू नहीं होने से लोगों में निराशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है.पर्यटन कमेटी ने भी मानी असीम संभावनाएं : चेयरमैन
बीते वर्ष 2024 में बीआइए पर्यटन कमेटी के चेयरमैन सुनील कुमार सिंह ने बीडीओ, सीओ व मनरेगा के तत्कालीन पीओ के साथ संयुक्त रूप से कुकुरझप डैम का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त बताया. उन्होंने कहा था कि कुकुरझप डैम में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं. यहां पहाड़ियों को जोड़कर रोपवे बनाया जा सकता है. सुरक्षा व्यवस्था, लाइटिंग व कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित कर इसे जिले का प्रमुख पर्यटन स्थल बनाया जा सकता है. टूरिज्म डेवलपमेंट अथॉरिटी इस दिशा में प्रयासरत है. हालांकि, उनके इस बयान के बाद भी अब तक ठोस कार्यवाही शुरू नहीं हो सकी है.—
स्थानीय लोगों की जुबानी दर्द और उम्मीद
बरहट निवासी समाजसेवी श्रीकांत यादव उर्फ बिट्टू कहते हैं कुकुरझप डैम की सुंदरता बेमिसाल है. सालों भर पानी भरा रहता है. 12 महीने लोग यहां घूमने आते हैं. अगर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाये, तो बेरोजगारी काफी हद तक खत्म हो सकती है.
-बरहट जिला परिषद सदस्य कुमारी गुड़िया ने कहा डैम की सुंदरता को देखते हुए पार्षदों की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जायेगा. बरहट पिछड़ा इलाका है. पर्यटन का दर्जा मिलने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा.-मलयपुर निवासी राजेश सिंह का कहना है कुकुरझप डैम चारों तरफ पहाड़ियों से घिरा हुआ है. यहां की वादियां बेहद खूबसूरत हैं. सरकार अगर चाहे तो इसे बिहार के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में शामिल किया जा सकता है.
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कुकुरझप डैम की सुंदरता काफी मनमोहक है. इसे मेरा प्रखंड मेरा गौरव अभियान में शामिल किया गया है. डैम के विकास को लेकर संबंधित विभाग को पत्राचार किया गया है. फिलहाल, लाइटिंग की सुविधा बहाल की गयी है. वरीय अधिकारियों के निर्देशानुसार आगे काम किया जायेगा.
एसके पांडेय, बीडीओडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

