मैट्रिक का अंकपत्र केवल जन्मतिथि का प्रमाण नहीं, अनुशासन व नियोजन का भी प्रतिबिंब : डीएम

Updated at : 01 Apr 2026 9:08 PM (IST)
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मैट्रिक का अंकपत्र केवल जन्मतिथि का प्रमाण नहीं, अनुशासन व नियोजन का भी प्रतिबिंब : डीएम

सिमुलतला आवासीय विद्यालय के पुराने गौरव की वापसी के बीच विद्यालय परिसर में जिला मेधा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.

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जमुई. सिमुलतला आवासीय विद्यालय के पुराने गौरव की वापसी के बीच विद्यालय परिसर में जिला मेधा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन डीएम श्री नवीन ने दीप प्रज्वलित कर किया. छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 10वीं का अंकपत्र केवल जन्मतिथि का प्रमाण नहीं, बल्कि अनुशासन और नियोजन का प्रतिबिंब होता है. उन्होंने कहा कि परिणाम के बाद कुछ दिन ही सक्रिय रहने वाले छात्र पीछे रह जाते हैं, जबकि सफलता उसी को मिलती है जो पूरे वर्ष निरंतर अनुशासन में रहता है. डीएम ने कहा, हार और जीत के बीच का अंतर केवल निरंतरता (कंसिस्टेंसी) है. उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रशासन उन्हें संसाधन दे सकता है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मेहनत खुद करनी होगी. विद्यालय के प्राचार्य डॉ राजीव रंजन ने टॉपर्स फैक्ट्री शब्द पर अपनी असहमति जताते हुए विद्यालय को साधना की शाला और संस्कारों का केंद्र बताया. उन्होंने कहा कि यहां केवल अंकों की नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की शिक्षा दी जाती है. शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने उन्हें ‘माली’ की संज्ञा दी और उनके योगदान की सराहना की. जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा पुष्पांजलि कुमारी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया. उन्होंने कहा कि शुरुआत में घर से दूर रहना कठिन था, लेकिन विद्यालय में शिक्षकों का स्नेह मिलने से माहौल अनुकूल हो गया. उन्होंने भविष्य में वैज्ञानिक बनकर देश सेवा का संकल्प जताया. समारोह में मौजूद दयानंद सिंह ने कहा कि परिणाम आने के महज दो दिनों के भीतर जिला प्रशासन द्वारा विद्यालय पहुंचकर छात्रों का उत्साह बढ़ाना सराहनीय पहल है. उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं और लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं. कार्यक्रम का समापन प्रख्यात कवि शिवमंगल सिंह सुमन की पंक्तयां ””””जब तक न मंज़िल पा सकूँ, तब तक न मुझे विराम है, चलना हमारा काम है ” के साथ हुआ. इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी के साथ-साथ कई वरीय अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थी.

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