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विकास योजनाओं से वंचित है डहुवा गांव, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

Updated at : 05 May 2025 11:56 PM (IST)
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विकास योजनाओं से वंचित है डहुवा गांव, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

जमुई जिला के सिमुलतला थाना क्षेत्र स्थित डहुवा गांव के लोग आज तक विकास योजनाओं से पूरी तरह वंचित है

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सिमुलतला. जमुई जिला के सिमुलतला थाना क्षेत्र स्थित डहुवा गांव के लोग आज तक विकास योजनाओं से पूरी तरह वंचित है. यह गांव खुरंडा पंचायत के वार्ड संख्या में है और झाझा प्रखंड मुख्यालय से 20 किमी दूर जंगल के बीचों-बीच स्थित है. इस गांव में न सरकारी विद्यालय है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र. गांव में नल जल, प्रधानमंत्री आवास योजना, गली-नली, सड़क योजना, सामुदायिक भवन सहित केंद्र व राज्य सरकार की योजनाएं नहीं पहुंची है. ग्रामीण लखन सोरेन कहते हैं कि हमारे गांव के लोगों को वोट देने के लिए भी आठ किमी दूर खुरंडा या फिर लीलावरण स्कूल जाना पड़ता है. संसदीय चुनाव व विधान सभा चुनाव के दौरान प्रत्याशी और उनके समर्थक वोट मांगने आते हैं, लेकिन मतदान समाप्त होने के बाद हमारी सुधि नहीं लेते हैं. हम आदिवासी समाज को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि उदासीन बने हैं. सरकारी योजना के नाम पर हमारे गांव में मात्र दो सरकारी चापाकल लगाये गये है. जबकि एसएसबी ने दो चापाकलों के साथ गांव के चौक-चौराहाें पर सोलर लाइट भी लगाये थे, जो अब खराब हो गया है. ग्रामीण बुधु राय टुड्डू ने बताया कि हमलोगों को मुख्य सड़क मार्ग पर जाने के लिए तीन किमी की दूरी जंगल के पगडंडी पर चलना पड़ता है. गांव में जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है या फिर गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की नौबत होती है, तो खटिया का ही सहारा लेना पड़ता है. क्योंकि गांव में आने जाने के लिए आज तक सड़क नहीं बनी है. बरसात के समय में तो गांव से कोई व्यक्ति गांव से बाहर नहीं जाते हैं. ग्रामीण गुजा पुझार ने बताया कि हमारे गांव की आबादी चार से पांच सौ है, जिसमें कुल 36 परिवार रहते हैं. करीब दो सौ से अधिक लोग वोट करते हैं. उसके बाद भी हमारे गांव में कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं है. गांव के बच्चे पढ़ाई करने के लिए चार किमी दूर घोरपारन स्कूल जाते हैं. इस कारण से बच्चे पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं. इस गांव के एक भी परिवार को पीएम आवास नहीं मिला है जबकि 36 परिवार में से 25 परिवार का राशन कार्ड बना हुआ है. गांव के लोग लकड़ी, पत्तल एवं दातुन बेचकर अपना जीविकोपार्जन चलाते हैं. ग्रामीणों का कहना था कि जनप्रतिनिधियों का हमलोगों से सिर्फ वोट तक ही नाता रहता है. गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची है जिस कारण शाम होते ही पूरी तरह से अंधकारमय हो जाता है. मोबाइल चार्जिंग के लिए भी लोगों को घोरपारन गांव या फिर सिमलतला बाजार जाना पड़ता है. इस गांव के लिए आज भी लालटेन और ढिबरी जलाकर के सहारे ही रात गुजारते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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