बाबा झुमराज मंदिर में पूजा के लिए आये श्रद्धालु की मौत

Updated at : 18 Feb 2020 6:28 AM (IST)
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बाबा झुमराज मंदिर में पूजा के लिए आये श्रद्धालु की मौत

सोनो : बटिया स्थित प्रसिद्ध बाबा झुमराज मंदिर में सोमवार को तब अफरा-तफरी मच गई जब पूजा के लिए आये एक श्रद्धालु की मृत्यु समीप के कपटवा नदी में स्नान के दौरान हो गयी. मृतक की पहचान देवघर जिला के जसीडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत बसुरिया गांव निवासी 50 वर्षीय महादेव दास के रूप में की […]

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सोनो : बटिया स्थित प्रसिद्ध बाबा झुमराज मंदिर में सोमवार को तब अफरा-तफरी मच गई जब पूजा के लिए आये एक श्रद्धालु की मृत्यु समीप के कपटवा नदी में स्नान के दौरान हो गयी. मृतक की पहचान देवघर जिला के जसीडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत बसुरिया गांव निवासी 50 वर्षीय महादेव दास के रूप में की गयी. लोगों ने बताया कि वह नदी में स्नान के लिए डुबकी लगायी तभी शायद उसकी सांसें रुक गयी और उसकी मौत हो गयी. मृत्यु की घटना से आहत परिजन उनके शव को अपने घर ले गये.

मृत्यु के कारण को लेकर विभिन्न लोगों द्वारा अलग-अलग दावा किया गया. कुछ लोगों का मानना था कि नदी का पानी काफी दूषित है जिस कारण डुबकी लगाते ही महादेव की सांस रुक गयी. वहीं कुछ लोगों का कहना था कि वह नशे में था. मंदिर के धार्मिक न्यास समिति के सचिव मोहन यादव ने बताया कि शव को बाहर करते समय लोगों ने उसके मुंह से शराब की बदबू महसूस किया था.
जिससे स्पष्ट है कि शराब पीकर वह स्नान के लिए गया था और नशे के कारण ही उसकी मृत्यु हो गयी. वैसे इस मंदिर में पूजा के नियम में शराब को लेकर बड़ा ही सख्त प्रतिबंध है. कोई भी व्यक्ति शराब पीकर बाबा झुमराज की पूजा करना तो दूर प्रसाद ग्रहण करने का साहस भी नहीं करता है. ऐसे में देवघर से परिजनों के साथ पूजा के लिए बटिया पहुंचे महादेव भला कब,कैसे और क्यों शराब पी होगी यह जांच का विषय है.
नदी का जल दूषित होने का दावा गलत नहीं
मंदिर के समीप बहने वाले कपटवा नदी का पानी निरंतर बहाव के अभाव और लोगों द्वारा फैलाये जा रहे गंदगी के कारण बेहद दूषित हो गया है. बलि दिये गये बकरे के अपशिष्ट से लेकर बरतन धोने तक के सभी कार्य इसी नदी में होता है.
बरसात के दिनों को छोड़ दें तो इस नदी में पानी का निरंतर बहाव का अभाव है लिहाजा पानी का दूषित होने का दावा और डूबकी के बाद दम घुटने की बात भी सच हो सकता है. कारण जो भी है लेकिन यहां एक श्रद्धालु की यूं हुई मौत ने मंदिर प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किये है. अगर यूं संदेह की स्थिति में श्रद्धालु की मृत्यु होने के बावजूद प्रबंधन समिति को पुलिस को खबर करनी चाहिए थी.
जिसके बाद शव के पोस्टमार्टम से मृत्यु का कारण पता चल पाता. श्रद्धालु महादेव की मृत्यु जिस कारण से भी हुई हो लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि बाबा झुमराज मंदिर में श्रद्धालुओं को बाबा के सहारे ही छोड़ दिया जाता है. लाखों की आमदनी के बावजूद न तो प्रशासन श्रद्धालुओं के लिए यहां सुविधा उपलब्ध करा पाती है और न ही धार्मिक न्यास समिति.
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