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जमुई सीट : लोजपा व रालोसपा के बीच कांटे की टक्कर

Updated at : 27 Mar 2019 9:22 AM (IST)
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जमुई सीट : लोजपा व रालोसपा के बीच कांटे की टक्कर

पंकज सिंह जमुई : नामांकन की तिथि खत्म होने के बाद जमुई लोकसभा का दृश्य साफ होने लगा है. दलों के योद्धा अब मैदान में हैं. इस बार कुल 12 प्रत्याशी मैदान में हैं. एनडीए में यह सीट लोजपा के खाते में आयी है. लोजपा ने फिर चिराग पासवान को मैदान में उतारा है. इस […]

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पंकज सिंह
जमुई : नामांकन की तिथि खत्म होने के बाद जमुई लोकसभा का दृश्य साफ होने लगा है. दलों के योद्धा अब मैदान में हैं. इस बार कुल 12 प्रत्याशी मैदान में हैं.
एनडीए में यह सीट लोजपा के खाते में आयी है. लोजपा ने फिर चिराग पासवान को मैदान में उतारा है. इस बार महागठबंधन में यह सीट रालोसपा के खाते में गयी है. भूदेव चौधरी मैदान में हैं. इनके अलावा बसपा के उपेंद्र रविदास सहित नौ निर्दलीय भी चुनाव मैदान में हैं.
एनडीए और महागठबंधन ने अपने प्रत्याशियों के नामांकन के दिन अपनी-अपनी ताकत दिखा कर बताने की कोशिश की कि इस बार मुकाबला आसान नहीं है. लोजपा प्रत्याशी चिराग पासवान के नामांकन में उनका पूरा परिवार साथ था.
खुद लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय मौजूद रहे, तो महागठबंधन की ओर से रालोसपा प्रत्याशी भूदेव चौधरी के नामांकन में खुद पार्टी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा साथ रहे. राजनीतिक जानकारों की मानें तो लोजपा व रालोसपा के बीच कांटे की टक्कर है.
इस बार समीकरण बदला-बदला सा है. निर्दलीय किसी का भी खेल बिगाड़ने में सक्षम हैं. इतना ही नहीं, कई दिग्गजों की चुप्पी भी बहुत कुछ कह रही है. फिलहाल तो मान-मनौव्वल का दौर भी चुपके-चुपके जारी है.
बनता-बिगड़ता रहा है अस्तित्व
1957 में जमुई लोकसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया. पहली बार 1952 में हुए चुनाव में कांग्रेस के बनारसी प्रसाद सिन्हा जीते. 1957 में फिर जमुई का अस्तित्व खत्म हो गया. 1962 में कांग्रेस की नयनतारा दास जीतीं. 1967 में भी नयनतारा का ही कब्जा रहा. 1971 में सीपीआइ के भोला मांझी ने इस सीट पर कब्जा जमाया. 1971 में हुए परिसीमन के बाद जमुई का अस्तित्व खत्म हो गया. यह क्षेत्र मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में आ गया. फिर 2009 के परिसीमन में जमुई लोकसभा सीट अस्तित्व में आया. 2009 के लोस चुनाव में जदयू के भूदेव चौधरी ने इस सीट पर कब्जा जमाया.
2014 में जदयू ने भूदेव चौधरी को टिकट नहीं दिया.
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी को टिकट दिया, जबकि लोजपा ने चिराग पासवान को उतारा. चिराग ने
सीट पर कब्जा जमाया. दूसरे नंबर पर राजद के सुधांशु शेखर भास्कर रहे.
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