Bihar News: दारोगा ने बिना सबूत पति-पत्नी को भेजा जेल, अब सरकार को देना होगा दो लाख रुपये का मुआवजा

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Feb 2022 8:57 AM

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इन तथ्यों के आधार पर ही एसपी पूर्वी चंपारण ने दारोगा को आदेश दिया था कि वह कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दें ताकि निर्दोष दंपती जेल से रिहा हो जाएं, लेकिन दारोगा विनय कुमार ने एसपी के आदेश पर भी अमल नहीं किया.

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पटना. बिहार मानवाधिकार आयोग की उज्ज्वल कुमार दुबे की बैंच ने पूर्वी चंपारण के चकिया थाना में चालक की हत्या कर ट्रक लूट के मामले में गोतिया के झूठे बयान पर बिना सबूत जेल भेजे गये पति-पत्नी को दो लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने दंपती को न्यायिक अभिरक्षा से तत्काल मुक्त करने के लिए कोर्ट में अविलंब रिपोर्ट समर्पित करने का आदेश दिया था, लेकिन दारोगा विनय कुमार सिंह ने इस पर भी अमल नहीं किया.

पूर्वी चंपारण के चकिया थाने का मामला

वर्तमान में मुंगेर में तैनात दारोगा के खिलाफ एसपी मुंगेर द्वारा जांच की जा रही है. पूर्वी चंपारण के चकिया थाने में दिल्ली की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के चालक की हत्या कर माल लदा ट्रक लूट लेने का मामला (कांड संख्या – 06/12) दर्ज हुआ था. चालक का शव चकिया थाना क्षेत्र में एनएच 28 पर मिला था. मामले की जांच कर रहे दारोगा विनय कुमार सिंह ने अप्राथमिकी अभियुक्त योगेंद्र सहनी के बयान के आधार पर 14 दिसंबर, 2017 को हीरा सहनी एवं उसकी पत्नी लक्ष्मी देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

वर्तमान में मुंगेर में तैनात हैं दारोगा

मानवाधिकार आयोग की उज्ज्वल कुमार दुबे की बैंच द्वारा मांगी गयी रिपोर्ट में एसपी पूर्वी चंपारण ने बताया कि अनुसंधान में यह बात सामने आयी कि हत्या और डकैती में गिरफ्तार योगेंद्र सहनी ने गोतिया हीरा सहनी से चल रहे भूमि विवाद का बदला लेने के लिए पुलिस को झूठा बयान दिया था. हीरा सहनी आदि ने योगेंद्र के खिलाफ मुजफ्फरपुर के मोतीपुर थाने में मारपीट आदि का केस भी दर्ज कराया था.

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इन तथ्यों के आधार पर ही एसपी पूर्वी चंपारण ने दारोगा को आदेश दिया था कि वह कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दें ताकि निर्दोष दंपती जेल से रिहा हो जाएं, लेकिन दारोगा विनय कुमार ने एसपी के आदेश पर भी अमल नहीं किया. आयोग ने इसे वरीय पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना कर परिवादीगण को अनावश्यक रूप से न्यायिक अभिरक्षा में रखे जाने का मामला माना. परिवादीगण के मानवाधिकार के हनन का मामला पाकर क्षतिपूर्ति के रूप में पति-पत्नी दोनों को संयुक्त रूप से दो लाख रुपये का भुगतान बैंक खाते में करने का निर्देश दिया.

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